RBI: क्या आपको कभी गलत इंश्योरेंस या इनवेस्टमेंट प्रोडक्ट बेचा गया है? RBI मिस-सेलिंग रोकने के लिए बना रहा बड़ा प्लान

मिस-सेलिंग की समस्या घटने के बजाय बढ़ रही है। इससे सिर्फ आम लोगों को नुकसान नहीं होता। इससे बैंकों की प्रतिष्ठा को भी चोट पहुंचती है और उन्हें कानूनी मामलों में उलझना पड़ता है। इससे फाइनेंशियल इनक्लूजन यानी आबादी के बड़े हिस्से को बैंकिंग सेवाओं के दायरे में लाने के मकसद का मजाक बनता है

अपडेटेड Jun 30, 2025 पर 11:31 AM
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महाराष्ट्र में 2024 में एक मामला सामने आया था, जिसमें एक किसान को आसान सेविंग प्लान की जगह रिस्की ULIP बेचा गया था।

क्या आपको किसी इंश्योरेंस कंपनी ने ऐसी पॉलिसी बेचने की कोशिश की है, जिसकी आपको जरूरत नहीं है? दरअसल बैंकिंग इंडस्ट्री में ऐसी पॉलिसी बेचने के मामले बढ़े हैं। आरबीआई ने इस पर चिंता जताई है। आरबीआई ने कहा है कि इस ट्रेंड की वजह से बैंकों का नाम खराब हो रहा है। इससे फाइनेंशियल इनक्लूजन के मकसद को भी झटका लगता है। ऐसी खबरें हैं कि आरबीआई मिस-सेलिंग को रोकने के लिए नई गाइडलाइंस भी इश्यू कर सकता है।

RBI के डिप्टी गवर्नर एम राजेश्वर राव ने हाल में इंश्योरेंस और वेल्थ मैनेजमेंट प्रोडक्ट्स की मिस-सेलिंग के लिए बैंकों की आलोचना की थी। यह मामला कितना गंभीर है? SEBI की 2024 की एक रिपोर्ट के मुताबिक, सिर्फ FY24 में गलत तरीके से इंश्योरेंस-लिंक्ड इनवेस्टमेंट्स प्रोडक्ट्स बेचने की 12,000 से ज्यादा शिकायतें आई थीं। IRDAI ने बताया है कि साल दर साल आधार पर FY24 में इंश्योरेंस पॉलिसी की मिस-सेलिंग की शिकायतें 18 फीसदी बढ़ गईं।

मिस-सेलिंग से सिर्फ आम लोगों को नुकसान नहीं होता। इससे बैंकों की प्रतिष्ठा को भी चोट पहुंचती है और उन्हें कानूनी मामलों में उलझना पड़ता है। इससे फाइनेंशियल इनक्लूजन यानी आबादी के बड़े हिस्से को बैंकिंग सेवाओं के दायरे में लाने के मकसद का मजाक बनता है। बैंकों ने अपनी फीस आधारित इनकम बढ़ाने के लिए अपनी ब्रांचेज को एक सेल्स के प्रेशर कूकर में बदल दिया है। बैंक के स्टाफ ग्राहकों को रिस्क और कॉस्ट बताए बगैर ULIP और म्यूचुअल फंड्स प्रोडक्ट्स बेच देते हैं।

Centre for Financial Inclusion की 2024 की एक रिपोर्ट बताती है कि लोन देते वक्त बैंकों ने ग्रामीण इलाकों में 62 फीसदी ग्राहकों को अतिरिक्त प्रोडक्ट्स खरीदने के लिए दबाव बनाया। इससे कई ग्राहकों को अपनी गाढ़ी कमाई गंवानी पड़ती है। कुछ ग्राहकों की उम्मीदों को ठेस लगती है तो कुछ बड़े वित्तीय संकट में फंस जाते हैं।


RBI के खुद के डेटा बताते हैं कि FY24 में बैंकों के खिलाफ अनफेयर प्रैक्टिसेज के इस्तेमाल से जुड़ी शिकायतें 15 फीसदी बढ़ गईं। RBI के डिप्टी गवर्नर राव ने बताया कि मिस-सेलिंग को रोकने के लिए नई गाइडलांइस पर काम चल रहा है। आरबीआई ने 2024 में बैंकअश्योरेंस के नियमों को सख्त बनाया था। बैंकों के इंश्योरेंस कंपनियों से समझौते की सीमा तय की गई थी। आरबीआई बैंकों को खुद साथ सुथरे तरीके से काम करने की सलाह देता रहा है।

सवाल है कि क्या नए नियमों से मिस-सेलिंग रुक जाएगी? यह इतना आसान नहीं है। मिस-सेलिंग ने बैकिंग इंडस्ट्री में गहरी जड़े जमा ली है। आरबीआई की सख्ती के बावूजद बैंक क्रॉस-सेलिंग, इंश्योरेंस पॉलिसी और वेल्थ प्रोडक्ट्स की बिक्री से फीस के रूप में कमाई पर फोकस कर रहे हैं। क्रिसिल की एक रिपोर्ट के मुताबिक, प्राइवेट बैंकों के FY24 में नॉन-इंटरेस्ट इनकम में इसकी हिस्सेदारी 20 फीसदी थी। ऐसे प्रोडक्ट्स बेचने का दबाव ब्रांच में स्टॉफ पर बनाया जाता है।

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महाराष्ट्र में 2024 में एक मामला सामने आया था, जिसमें एक किसान को आसान सेविंग प्लान की जगह रिस्की ULIP बेचा गया था। बाद में विरोध बढ़ने पर बैंक के प्रैक्टिसेज की जांच शुरू हुई थी। आरबीआई का कहना है कि जटिल प्रोडक्ट्स के बारे में ग्राहकों के लिए ऑडियो और विजुअल डिसक्लोजर्स होने चाहिए। लेकिन, असल समस्या बैंकिंग सेक्टर की सोच को लेकर है। उन्हें सेल्स पर फोकस करने की जगह ग्राहकों के हित पर फोकस करना होगा। जब तक बैंक अपने रिवॉर्ड सिस्टम में बदलाव नहीं करेंगे और जिम्मेदारी के साथ काम नहीं करेंगे तब तक मिस-सेलिंग एक बड़ी समस्या बनी रहेगी।

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