आज के समय में ज्यादातर लोग अपनी जरूरतें पूरी करने के लिए लोन और EMI पर निर्भर रहते हैं। लेकिन अगर आप समय पर EMI नहीं चुकाते, तो इसका असर सिर्फ आपके क्रेडिट स्कोर पर ही नहीं, बल्कि बैंकिंग रिकॉर्ड पर भी पड़ता है। बैंक ऐसे मामलों को SMA (Special Mention Account) में डाल देते हैं। यह एक तरह का अलर्ट होता है कि ग्राहक समय पर भुगतान नहीं कर रहा है और उसका खाता जोखिम में है।
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने SMA को तीन हिस्सों में बांटा है:
- SMA-1: जब देरी 31–60 दिन तक पहुंच जाती है।
- SMA-2: जब EMI 61–90 दिन तक नहीं चुकाई जाती।
अगर 90 दिन से ज्यादा समय तक EMI नहीं दी जाती, तो खाता NPA (Non-Performing Asset) घोषित कर दिया जाता है।
SMA में दर्ज होने का मतलब है कि बैंक आपके खाते को हाई रिस्क मानने लगता है। इससे भविष्य में नया लोन लेना मुश्किल हो सकता है। आपका क्रेडिट स्कोर गिर जाता है और बैंक या NBFC आपको भरोसेमंद ग्राहक नहीं मानते।
कई बार EMI मिस होना किसी की नौकरी जाने, बीमारी या अचानक खर्च बढ़ने जैसी परिस्थितियों की वजह से होता है। ऐसे हालात में ग्राहक पर मानसिक दबाव भी बढ़ जाता है। बैंक का SMA रिकॉर्ड इस दबाव को और बढ़ा देता है, क्योंकि व्यक्ति को लगता है कि उसकी वित्तीय साख खत्म हो रही है।
- EMI मिस होने से पहले बैंक को सूचित करें और री-शेड्यूलिंग की मांग करें।
- ऑटो-डेबिट सुविधा का इस्तेमाल करें ताकि भुगतान समय पर हो सके।
- इमरजेंसी फंड तैयार रखें जिससे अचानक खर्चों में भी EMI प्रभावित न हो।
- क्रेडिट कार्ड और लोन का इस्तेमाल सोच-समझकर करें ताकि बोझ न बढ़े।
EMI मिस करना सिर्फ एक छोटी गलती नहीं, बल्कि आपकी पूरी वित्तीय साख को प्रभावित कर सकता है। SMA में दर्ज होने से लेकर NPA बनने तक की प्रक्रिया यह दिखाती है कि समय पर भुगतान कितना जरूरी है। सही योजना और अनुशासन से आप इस स्थिति से बच सकते हैं और अपनी वित्तीय जिंदगी को सुरक्षित रख सकते हैं।