एमएमटीसी-पीएएमपी ने सिल्वर बायबैक स्कीम शुरू की है। इस स्कीम के तहत आप चांदी की ज्वेलरी, बार और कॉइंस बेच सकेंगे। शुरुआत में यह स्कीम देश के 7 बड़े शहरों में शुरू की गई है। कंपनी ने इसे 8 अप्रैल को लॉन्च किया। एमएमटीसी-पीएएमपी एक ज्वाइंट वेंचर है। इसमें सरकारी कंपनी एमएमटीसी लिमिटेड और स्विट्जरलैंड के एमकेएस पीएएमपी ग्रुप की हिस्सेदारी है।
सिल्वर कॉइंस, बार्स और ज्वेलरी की पहली ऑर्गेनाइज्ड बायबैक स्कीम
यह सिल्वर कॉइंस, बार्स और ज्वेलरी की पहली ऑर्गेनाइज्ड बायबैक स्कीम है। MMTC-PAMP की यह सर्विस कोलकाता, भुवनेश्वर, गुवाहाटी, लुधियाना, अहमदाबाद, मुंबई और नई दिल्ली में एक्सक्लूसिव ब्रांड स्टोर्स और प्योरिटी वेरिफिकेशन सेंटर्स में उपलब्ध होगी। अगले वित्त वर्ष से यह स्कीम पूरे देश में उपलब्ध होगी। इस स्कीम उन लोगों के लिए काफी फायदेमंद साबित हो सकती है, जिनके घर में चांदी की ज्वेलरी, बार और सिक्के हैं। पैसे की जरूरत पड़ने पर वे इसका इस्तेमाल कर सकते हैं।
ऐसे काम करेगी एमएमटीसी-पीएएमपी की यह स्कीम
एमएमटीसी-पीएएमपी बुलियन रिफाइनर है। देश में अभी इसके 17 गोल्ड रिसाइक्लिंग स्टोर्स हैं। कंपनी की सिल्वर बायबैक स्कीम में कोई व्यक्ति चांदी के सिक्के, ज्वेलरी और बार को सेल कर सकता है। कंपनी अपने प्योरिटी वेरिफिकेशन सेंटर्स पर चांदी के उत्पादों को गलाएगी। उसके बाद एक्सआरएफ टेक्नोलॉजी से उसकी शुद्धता की जांच करेगी। चूंकि यह पूरा प्रोसेस टेक्नोलॉजी की मदद से पूरा होगा, जिससे इसमें पारदर्शिता बनी रहेगी।
सीधे ग्राहक के बैंक अकाउंट में आएगा पैसा
चांदी के उत्पादों की शुद्धता की जांच के बाद मार्केट में चल रहे बायबैक रेट के आधार पर ग्राहक के बैंक अकाउंट में पैसा सीधे ट्रांसफर कर दिया जाएगा। कंपनी ने यह जानकारी दी है। कंपनी का मानना है कि इस स्कीम से लोगों के घरों में पड़ी चांदी का इस्तेमाल किया जा सकेगा। चांदी की डिमांड और उसके उत्पादन के बीच बड़ा गैप है। इसका असर चांदी की कीमतों पर पड़ता है। चांदी की डिमांड जिस रफ्तार से बढ़ रही है, उस रफ्तार से उसकी सप्लाई नहीं बढ़ रही है।
चांदी की बढ़ती मांग पूरी करने में मिलेगी मदद
एमएमटीसी-पीएएमपी के एमडी और सीईओ समित गुहा ने कहा, "भारतीय परिवारों के पास करीब 35,000 टन सोना और इससे ज्यादा चांदी है। दुनियाभर में चांदी का उत्पादन उस रफ्तार से नहीं बढ़ रहा है, जिस रफ्तार से इसकी डिमांड बढ़ रही है। डिमांड बढ़ने की रफ्तार काफी तेज है। हमें उम्मीद है कि रिसाइकल्ड सिल्वर से डिमांड और सप्लाई के बीच के इस फर्क को पूरा करने में मदद मिलेगी।"