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15 दिन बाद बेसिक वेतन 15000 से बढ़कर हो जाएगा 21000 रुपये! मोदी सरकार लाएगी बदलाव

1 अक्टूबर से प्राइवेट और सरकारी सेक्टर के कर्मचारियों को फायदा हो सकता है

MoneyControl Newsअपडेटेड Sep 17, 2021 पर 3:50 PM
15 दिन बाद बेसिक वेतन 15000 से बढ़कर हो जाएगा 21000 रुपये! मोदी सरकार लाएगी बदलाव

Labour Code Rules: 1 अक्टूबर से प्राइवेट और सरकारी सेक्टर के कर्मचारियों को फायदा हो सकता है। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो मोदी सराकर लेबर कोड के नियमों को 1 अक्टूबर से लागू करना चाहती है। 1 अक्टूबर से लेबर कोड के नियमों को माना जाता है तो कर्मचारियों की बेसिक सैलरी 15000 रुपये से बढ़कर 21000 रुपये हो सकती है। दरअसल, लेबर कोड के नियमों को लेकर लेबर यूनियन मांग कर रही थी कि कर्मचारियों की न्यूनतम बेसिक सैलरी को बढ़ाकर 15000 रुपये से 21000 रुपये किया जाना चाहिए। अगर ऐसा होता है तो आपका वेतन बढ़ सकता है।

वेतन में हो सकता है बदलाव

नए ड्राफ्ट रूल के अनुसार, मूल वेतन कुल वेतन का 50% या अधिक होना चाहिए। इससे ज्यादातर कर्मचारियों की वेतन का स्ट्रक्चर में बदलाव होगा। बेसिक सैलरी बढ़ने से PF और ग्रेच्युटी के लिए कटने वाला पैसा बढ़ जाएगा क्योंकि इसमें जानें वाला पैसा बेसिक सैलरी के अनुपात में होता है। अगर ऐसा होता है जो आपके घर आने वाली सैलरी घट जाएगी रिटायरमेंट पर मिलने वाला PF और ग्रेच्युटी का पैसा बढ़ जाएगा। लेबर यूनियन की मांग थी कि न्यूनतम बेसिक सैलरी को बढ़ाकर 21000 रुपये किया जाए ताकि पीएफ और ग्रेच्युटी में पैसा कटने के बाद भी टेक होम सैलरी में कमी न आए।

रिटायरमेंट पर मिलने वाला पैसा बढ़ जाएगा

ग्रेच्युटी और पीएफ में योगदान बढ़ने से रिटायरमेंट के बाद मिलने वाली राशि में इजाफा होगा। पीएफ और ग्रेच्युटी बढ़ने से कंपनियों की लागत में भी वृद्धि होगी। क्योंकि उन्हें भी कर्मचारियों के लिए पीएफ में ज्यादा योगदान देना पड़ेगा। इन चीजों से कंपनियों की बैलेंस शीट भी प्रभावित होगी।

1 अक्टूबर से बदलेंगे सैलरी से जुड़े अहम नियम

सरकार नए लेबर कोड में नियमों को 1 अप्रैल, 2021 से लागू करना चाहती थी लेकिन राज्यों की तैयारी न होने और कंपनियों को एचआर पॉलिसी बदलने के लिए ज्यादा समय देने के कारण इन्हें टाल दिया गया। लेबर मिनिस्ट्री के मुताबिक सरकार लेबर कोड के नियमों को 1 जुलाई से नोटिफाई करना चाहते थे लेकिन राज्यों ने इन नियमों को लागू करने के लिए और समय मांगा जिसके कारण इन्हें 1 अक्टूबर तक के लिए टाल दिया गया।

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