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म्यूचुअल फंड में निवेश के बदलेंगे नियम, KYC रूल्स को सख्त कर रहा SEBI; जानिए डिटेल

SEBI म्यूचुअल फंड में नए फोलियो और पहले निवेश के लिए KYC नियमों को सख्त करने की तैयारी कर रहा है। इसका मकसद गलतियों और ग्राहकों को भुगतान में देरी को रोकना है। जानिए डिटेल।

Edited By: Suneel Kumarअपडेटेड Oct 23, 2025 पर 5:33 PM
म्यूचुअल फंड में निवेश के बदलेंगे नियम, KYC रूल्स को सख्त कर रहा SEBI; जानिए डिटेल
SEBI ने इस नए नियम पर आम जनता और निवेशकों से सुझाव मांगे हैं।

मार्केट रेगुलेटर SEBI ने म्यूचुअल फंड निवेशकों के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। अब नए फोलियो खोलते समय और पहली निवेश राशि डालते समय पूरी KYC (Know Your Customer) प्रक्रिया पूरी होना जरूरी होगा। इसका मकसद है निवेशकों को संभावित गलतियों और लेन-देन में होने वाली देरी से बचाना, ताकि हर निवेश सुरक्षित और सही तरीके से हो सके।

पहला निवेश KYC पूरा होने के बाद

अब नया नियम यह सुनिश्चित करेगा कि नए फोलियो केवल तभी अपनी पहली निवेश रकम डाल सकेंगे, जब KYC रजिस्ट्रेशन एजेंसी (KRA) उन्हें पूरी तरह KYC-संगत मान ले। पहले, एसेट मैनेजमेंट कंपनी (AMC) अपने आंतरिक KYC चेक के आधार पर तुरंत निवेश स्वीकार कर लेती थी। इस वजह से अगर बाद में फोलियो KYC में गड़बड़ी पाई जाती, तो निवेशक को रिडेम्प्शन, डिविडेंड या नोटिफिकेशन में देरी का सामना करना पड़ता था।

KYC की देरी से क्या असर होता है

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