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Mutual Fund: म्यूचुअल फंड निवेशकों के लिए राहत! अब मृत्यु के बाद परिवार आसानी से कर सकेगा क्लेम, जानिए सेबी के नए नियम

Mutual Fund Transmission Rules SEBI: क्लेम की पूरी प्रक्रिया इस बात पर निर्भर करती है कि म्यूचुअल फंड का निवेश किस तरह से किया गया था। अगर निवेश ज्वॉइंट होल्डिंग में था और किसी एक धारक की मृत्यु हो जाती है, तो जीवित धारक नाम हटाने या यूनिट्स के ट्रांसफर के लिए आवेदन कर सकता है

Curated By: Abhishek Guptaअपडेटेड Jul 22, 2026 पर 5:09 PM
Mutual Fund: म्यूचुअल फंड निवेशकों के लिए राहत! अब मृत्यु के बाद परिवार आसानी से कर सकेगा क्लेम, जानिए सेबी के नए नियम
जानें सेबी के नए नियमों के तहत ट्रांसमिशन प्रक्रिया को कैसे आसान बनाया गया है

Mutual Fund Death Claim Rules: किसी निवेशक की मृत्यु के बाद उनके म्यूचुअल फंड यूनिट्स या पैसों का क्या होता है? ये सवाल सबके मन में आता होगा। आपको बता दें कि उन पैसों को क्लेम करना अब पहले से और भी आसान हो गया है। अक्सर परिवारों को पुराने पते, नाम में अंतर या सिग्नेचर मैच न होने जैसी तकनीकी दिक्कतों के कारण लंबी परेशानियों का सामना करना पड़ता था। इसी समस्या को दूर करने के लिए भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (AMFI) के मानकों में बड़े बदलाव किए हैं।

आइए जानते हैं कि सेबी के नए नियमों के तहत ट्रांसमिशन प्रक्रिया को कैसे आसान बनाया गया है और परिवार के सदस्यों या नॉमिनी को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

क्या-क्या बड़े बदलाव हुए हैं?

सेबी के नए दिशा-निर्देशों का मुख्य उद्देश्य ट्रांसमिशन दावों में आने वाली ऑपरेशनल बाधाओं को कम करना है:

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