Mutual Funds or ULIP: टैक्स बचाने के लिए किसमें करें निवेश, समझिए दोनों के फायदे और नुकसान

Mutual Funds or ULIP: वित्त वर्ष खत्म होने से पहले कई निवेशक टैक्स बचाने के लिए निवेश विकल्प तलाश रहे हैं। ULIP और ELSS म्यूचुअल फंड सेक्शन 80C के तहत टैक्स छूट देते हैं। दोनों के फायदे, लागत, लचीलापन और रिटर्न समझकर सही विकल्प चुनना जरूरी है। जानिए डिटेल।

अपडेटेड Mar 17, 2026 पर 3:01 PM
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ULIP में बीमा और निवेश दोनों शामिल होते हैं।

Mutual Funds or ULIP: वित्त वर्ष 2026 अपने आखिरी महीने में पहुंच चुका है। ऐसे में कई निवेशक अपने फाइनेंस, टैक्स प्लानिंग और निवेश से जुड़े फैसलों की समीक्षा कर रहे हैं। नई टैक्स व्यवस्था लागू होने के बाद भले ही कई टैक्स छूट कम हो गई हों, लेकिन सेक्शन 80C के तहत मिलने वाली छूट अब भी उन लोगों के लिए अहम है जो पुरानी टैक्स व्यवस्था चुनते हैं।

इसी कारण इस समय दो निवेश विकल्पों पर ज्यादा चर्चा होती है, यूनिट लिंक्ड इंश्योरेंस प्लान (ULIP) और इक्विटी लिंक्ड सेविंग्स स्कीम (ELSS) जैसे म्यूचुअल फंड। दोनों ही निवेश विकल्प टैक्स बचत के साथ बाजार से जुड़े रिटर्न का मौका देते हैं। हालांकि, इनका स्ट्रक्चर और मकसद अलग-अलग होता है।

ULIP और म्यूचुअल फंड में अंतर


ULIP में बीमा और निवेश दोनों शामिल होते हैं। निवेशक जो प्रीमियम देता है, उसका एक हिस्सा जीवन बीमा के लिए जाता है और बाकी पैसा इक्विटी, डेट या बैलेंस्ड फंड में निवेश किया जाता है।

इसके उलट म्यूचुअल फंड पूरी तरह निवेश का साधन होते हैं। इसमें कई निवेशकों का पैसा एक साथ जमा करके शेयर, बॉन्ड या अन्य सिक्योरिटीज में लगाया जाता है। इसमें बीमा का कोई हिस्सा नहीं होता। इसलिए पूरी रकम निवेश के जरिए रिटर्न कमाने के लिए काम करती है।

टैक्स लाभ कितना अहम है

ULIP और ELSS दोनों ही सेक्शन 80C के तहत सालाना 1.5 लाख रुपये तक की टैक्स छूट के लिए योग्य हैं। यही वजह है कि वित्त वर्ष के आखिरी महीनों में इनमें निवेश बढ़ जाता है।

हालांकि ULIP से जुड़े टैक्स नियमों में हाल के वर्षों में बदलाव हुए हैं। फरवरी 2021 के बाद जारी ऐसे ULIP जिनका सालाना प्रीमियम 2.5 लाख रुपये से ज्यादा है, उनकी मैच्योरिटी पर मिलने वाला लाभ पूरी तरह टैक्स फ्री नहीं रहता। ऐसे मामलों में मुनाफे पर इक्विटी निवेश की तरह टैक्स लगाया जाता है। इस बदलाव के बाद ULIP का टैक्स फायदा पहले जैसा नहीं रहा।

लचीलापन और लॉक इन

ULIP और म्यूचुअल फंड के बीच एक बड़ा अंतर निवेश की लचीलेपन में है। ULIP में पांच साल का अनिवार्य लॉक इन पीरियड होता है। इस दौरान पैसा नहीं निकाला जा सकता। इससे लंबी अवधि का निवेश अनुशासन बना रहता है, लेकिन जरूरत पड़ने पर पैसा निकालना मुश्किल हो जाता है।

म्यूचुअल फंड में ज्यादा लचीलापन होता है। ELSS को छोड़कर ज्यादातर फंड में निवेशक कभी भी पैसा निकाल सकते हैं। ELSS में भी लॉक इन अवधि सिर्फ तीन साल होती है।

लागत और पारदर्शिता का हाल

म्यूचुअल फंड में खर्च का ढांचा स्पष्ट होता है जिसे एक्सपेंस रेशियो कहा जाता है। इससे निवेशकों को पता रहता है कि फंड मैनेजमेंट पर कितना खर्च हो रहा है।

ULIP में कई तरह के शुल्क हो सकते हैं। जैसे कि प्रीमियम एलोकेशन चार्ज, पॉलिसी प्रशासन शुल्क और बीमा कवर से जुड़े मॉर्टैलिटी चार्ज। हालांकि नए ULIP पहले की तुलना में सस्ते हुए हैं, लेकिन शुरुआती वर्षों में ये खर्च रिटर्न को प्रभावित कर सकते हैं।

कौन सा विकल्प रहेगा सही?

ULIP उन निवेशकों के लिए सही हो सकता है, जो एक ही उत्पाद में बीमा और लंबी अवधि का निवेश चाहते हैं। वहीं म्यूचुअल फंड उन लोगों के लिए बेहतर माने जाते हैं जो ज्यादा लचीलापन, कम लागत और अलग अलग निवेश विकल्प चाहते हैं।

कई वित्तीय सलाहकार यह भी सुझाव देते हैं कि बीमा और निवेश को अलग रखा जाए। यानी सुरक्षा के लिए टर्म इंश्योरेंस और संपत्ति बनाने के लिए म्यूचुअल फंड का इस्तेमाल किया जाए।

आखिर में सही विकल्प इस बात पर निर्भर करता है कि आपकी वित्तीय प्राथमिकताएं क्या हैं, जोखिम लेने की क्षमता कितनी है और निवेश की अवधि कितनी लंबी है।

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