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Mutual Funds Tax Rules: निवेश से पहले जान लें ये नियम, वरना मुनाफे पर लगेगा झटका

पिछले कुछ सालों में म्यूचुअल फंड्स के टैक्स के नियमों में बदलाव आया है। इक्विटी फंड, डेट फंड, हाइब्रिड स्कीम, ELSS और REIT/InvITs के टैक्स के नियम अलग-अलग हैं। टैक्सपेयर्स के लिए इन नियमों के बारे में जानना बहुत जरूरी है

Translated By: Rakesh Ranjanअपडेटेड Feb 19, 2026 पर 2:36 PM
Mutual Funds Tax Rules: निवेश से पहले जान लें ये नियम, वरना मुनाफे पर लगेगा झटका
म्यूचुअल फंड की अलग-अलग स्कीमों के टैक्स के नियम अलग-अलग हैं।

म्यूचुअल फंड्स में लोगों की दिलचस्पी बढ़ी है। लोग अब बैंक एफडी में पैसे रखने की जगह सिप के जरिए म्यूचुअल फंड्स की स्कीम में निवेश कर रहे है। लेकिन, कई इनवेस्टर्स म्यूचुअल फंड्स के टैक्स के नियमों के बारे में ठीक तरह से नहीं जानते। इसका सीधा असर उनके रिटर्न पर पड़ता है। म्यूचुअल फंड की अलग-अलग स्कीमों के टैक्स के नियम अलग-अलग हैं। इनवेस्टर्स को म्यूचुअल फंड की स्कीम में निवेश करने से पहले टैक्स के नियमों के बारे में ठीक तरह से जानना जरूरी है।

पिछले कुछ सालों में टैक्स के नियमों में बदलाव

पिछले कुछ सालों में म्यूचुअल फंड्स के टैक्स के नियमों में बदलाव आया है। इक्विटी फंड, डेट फंड, हाइब्रिड स्कीम, ELSS और REIT/InvITs के टैक्स के नियम अलग-अलग हैं। डेलॉयट इंडिया के पार्टनर राजेश गांधी ने कहा, "इंडिया में म्चूचुअल फंड के टैक्स के नियम तीन चीजों पर निर्भर करते हैं। इनमें इनवेस्टर का टाइप (रेजिडेंट इंडिविजुअल/HUF, नॉन-रेजिडेंट या डोमेस्टिक कंपनी), स्कीम के पोर्टफोलियो का कंपोजिशन (इक्विटी, डेट या दूसरे एसेट्स) और इनवेस्टमेंट का होल्डिंग पीरियड शामिल हैं।"

इक्विटी ऐलोकेशन के आधार पर टैक्स के नियम

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