सरकार ने शुरू की e-Zero FIR सर्विस, जानिये आम लोगों को कैसे होगा फायदा

E-Zero FIR: भारत सरकार ने हाल ही में ई-जीरो FIR नाम की एक नई सर्विस शुरू की है। इसका मकसद साइबर सुरक्षा को मजबूत करना और बड़ी साइबर धोखाधड़ी की जांच में तेजी लाना है। यह व्यवस्था फिलहाल दिल्ली में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू हुई है और इसमें 10 लाख रुपये से ज्यादा की ऑनलाइन ठगी की शिकायतें अपने आप FIR में बदल जाएंगी

अपडेटेड May 22, 2025 पर 7:05 AM
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E-Zero FIR: भारत सरकार ने हाल ही में ई-जीरो FIR नाम की एक नई सर्विस शुरू की है।

E-Zero FIR: भारत सरकार ने हाल ही में ई-जीरो FIR नाम की एक नई सर्विस शुरू की है। इसका मकसद साइबर सुरक्षा को मजबूत करना और बड़ी साइबर धोखाधड़ी की जांच में तेजी लाना है। यह व्यवस्था फिलहाल दिल्ली में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू हुई है और इसमें 10 लाख रुपये से ज्यादा की ऑनलाइन ठगी की शिकायतें अपने आप FIR में बदल जाएंगी। इस पहल से सरकार का मकसद है कि साइबर अपराधियों पर तुरंत कार्रवाई और जांच में समय को बचाने की है।

10 लाख रुपये से अधिक की साइबर वित्तीय ठगी की शिकायतें अब अपने-आप FIR में बदल जाएंगी। यह सुविधा 1930 हेल्पलाइन या राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर की गई शिकायतों पर लागू होगी। यह नई व्यवस्था ई-जीरो FIR के नाम से शुरू की गई है, जो कि फिलहाल दिल्ली में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू हुई है। अमित शाह ने कहा कि इससे तेजी से जांच और कार्रवाई संभव हो सकेगी और अपराधियों को जल्द पकड़ा जा सकेगा। आने वाले समय में यह प्रणाली पूरे देश में लागू की जाएगी।

गृह मंत्री ने अपने X (पूर्व में ट्विटर) पोस्ट में लिखा कि मोदी सरकार साइबर सुरक्षित भारत की दिशा में तेजी से काम कर रही है। यह नई प्रणाली साइबर अपराधियों पर लगाम लगाने में अहम भूमिका निभाएगी।


क्या है ई-जीरो FIR?

एक अधिकारी ने बताया कि NCRP और 1930 पर दर्ज 10 लाख से अधिक की ठगी की शिकायतें अब अपने आप जीरो FIR में बदल जाएंगी। यह FIR दिल्ली के ई-क्राइम पुलिस स्टेशन में दर्ज होगी और फिर संबंधित एरिया के साइबर पुलिस स्टेशन को भेज दी जाएगी। शिकायतकर्ता को तीन दिन के अंदर संबंधित साइबर थाना जाकर जीरो FIR को नियमित FIR में बदलवाना होगा। इस प्रक्रिया में I4C (Indian Cyber Crime Coordination Centre) दिल्ली पुलिस की e-FIR प्रणाली, और NCRB के क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क को आपस में जोड़ा गया है।

कानूनी आधार

यह पहल भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (Bhartiya Nagarik Suraksha Sanhita) की धारा 173(1) और 1(ii) के तहत शुरू की गई है। दिल्ली पुलिस और I4C ने मिलकर यह नई प्रणाली बनाई है ताकि प्रभावित व्यक्ति का पैसा जल्दी वापस मिल सके और अपराधियों को सख्त सजा मिल सके।

क्या मिलेगा फायदा?

शिकायत करना होगा आसान

FIR दर्ज होगी तुरंत

धोखाधड़ी के पैसे की वसूली आसान होगी

अपराधियों पर जल्द कार्रवाई

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