रिटायरमेंट के बाद जमा पूंजी को सुरक्षित रखने का सबसे पसंदीदा जरिया फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) है। बैंक या पोस्ट ऑफिस में निवेश करने पर निश्चित ब्याज मिलता रहता है, जो दवाइयों, घर के खर्च और छोटे-मोटे जरूरतों को आसानी से पूरा कर देता है। लेकिन ब्याज आने पर टीडीएस (टैक्स डिडक्टेड एट सोर्स) कटने की चिंता बुजुर्गों को परेशान कर देती है। अच्छी खबर यह है कि 1 अप्रैल 2025 से लागू नए नियमों से सीनियर सिटीजन्स ₹1 लाख तक ब्याज पर पूरी तरह TDS से मुक्त हैं, और स्मार्ट प्लानिंग से इससे ज्यादा पर भी बच सकते हैं।
बैंकों और पोस्ट ऑफिस में जमा FD पर अगर ब्याज की राशि सालाना ₹50,000 से अधिक हो जाती है, तो उस पर TDS काटा जाता है। यह नियम खासतौर पर सीनियर सिटीज़न को प्रभावित करता है, क्योंकि वे अक्सर बड़ी रकम FD में रखते हैं ताकि सुरक्षित रिटर्न मिल सके।
अब एक वित्त वर्ष में किसी एक बैंक या पोस्ट ऑफिस से ₹1 लाख तक का FD ब्याज TDS मुक्त है। यह सरकारी, निजी, कोऑपरेटिव बैंकों और पोस्ट ऑफिस पर लागू होता है। मिसाल के तौर पर बिना किसी कटौती के 8% ब्याज दर पर ₹12-13 लाख की FD से सालाना ₹1 लाख ब्याज बनेगा। लेकिन अगर एक ही बैंक से ज्यादा हो जाए, तो TDS कट सकता है।
सीनियर सिटीजन के पास TDS से बचने के लिए कुछ आसान विकल्प मौजूद हैं:
- फॉर्म 15H जमा करें: अगर आपकी कुल आय टैक्सेबल लिमिट से कम है, तो बैंक में फॉर्म 15H भरकर जमा करने से TDS नहीं कटेगा।
- धारा 80TTB का लाभ: आयकर कानून की धारा 80TTB के तहत सीनियर सिटीजन को सालाना ₹50,000 तक ब्याज आय पर टैक्स छूट मिलती है।
- PAN अपडेट करें: बैंक में अपना PAN कार्ड अपडेट रखना जरूरी है। अगर PAN दर्ज नहीं है तो TDS की दर और ज्यादा हो सकती है।
- ब्याज का वितरण: कई FD बनाकर ब्याज को अलग-अलग खातों में बांटने से भी TDS की सीमा से बचा जा सकता है।
कई बुजुर्गों के लिए FD का ब्याज ही उनकी मेडिकल जरूरतों, घरेलू खर्च और बच्चों पर निर्भरता कम करने का साधन होता है। ऐसे में TDS कटने से उनकी मासिक आय प्रभावित होती है। सरकार ने सीनियर सिटीज़न को राहत देने के लिए 80TTB जैसी छूट दी है, ताकि वे अपने जीवन के इस चरण में आर्थिक रूप से सुरक्षित रह सकें।