New Income Tax Draft Rules: जानिए 1 अप्रैल से नए इनकम टैक्स एक्ट लागू होने पर पैन कहां-कहां जरूरी होगा

ड्राफ्ट इनकम टैक्स रूल्स, 2026 में पैन के इस्तेमाल के नियमों में बदलाव का प्रस्ताव है। इसका आपके रोजमर्रा के फाइनेंशियल ट्रांजेक्शंस पर पड़ेगा। इनमें बैंक अकाउंट में कैश निकालने और जमा करना, कार/बाइक और प्रॉपर्टी की खरीद, होटल के बिल का पेमेंट आदि शामिल हैं

अपडेटेड Feb 11, 2026 पर 8:05 PM
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इनकम टैक्स के नए नियम 1 अप्रैल से लागू होंगे।

कई तरह के फाइनेंशियल ट्रांजेक्शंस में पैन के इस्तेमाल से जुड़े नियम बदल सकते हैं। ड्राफ्ट इनकम टैक्स रूल्स, 2026 में इसका प्रस्ताव है। इसका असर आपके रोजमर्रा के फाइनेंशियल ट्रांजेक्शंस पर पड़ेगा। इनमें बैंक अकाउंट में कैश निकालने और जमा करना, कार/बाइक और प्रॉपर्टी की खरीद, होटल के बिल का पेमेंट आदि शामिल हैं।

इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने नए इनकम टैक्स रूल्स का ड्राफ्ट पेश कर दिया है। इस बारे में 22 फरवरी तक राय दी जा सकती है। राय मिलने के बाद इनकम टैक्स डिपार्टमेंट फाइनल रूल्स पेश करेगा।

मोटर व्हीकल ट्रांजेक्शंस

अभी स्कूटर और बाइक को छोड़ बाकी सभी व्हीकल्स से जुड़े ट्रांजेक्शंस के लिए पैन जरूरी है। इसके लिए ट्रांजेक्शंस के लिए कोई लिमिट तय नहीं है। ड्राफ्ट इनकम टैक्स रूल्स में कहा गया है कि 5 लाख रुपये से ज्यादा वैल्यू के व्हीकल से जुड़े ट्रांजेक्शंस के लिए पैन जरूरी होगा। इसमें दोपहिया भी शामिल होंगे। सिर्फ ट्रैक्टर पर यह नियम लागू नहीं होगा।


होटल/रेस्टॉरेंट्स के बिल

अभी होटल या रेस्टॉरेंट्स को एक बार में 50,000 रुपये से ज्यादा के कैश पेमेंट के लिए पैन जरूरी है। ड्राफ्ट रूल में कहा गया है कि इसकी सीमा बढ़ाकर 1 लाख रुपये की जाएगी। इसका मतलब है कि एक लाख रुपये से ज्यादा वैल्यू के ट्रांजेक्शंस के लिए पैन बताना होगा। इससे कंप्लायंस में कमी आएगी।

लाइफ इंश्योरेंस का प्रीमियम

अभी लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी का प्रीमियम सालाना 50,000 रुपये से ज्यादा होने पर पैन जरूरी होता है। ड्राफ्ट रूल्स में कहा गया है कि अब सभी अकाउंट-बेस्ड रिलेशनशिप शुरू करने के लिए पैन जरूरी होगा। इसका मतलब है कि लाइफ इंश्योरेंस प्रीमियम से जुड़े ट्रांजेक्शंस इसके दायरे में आएंगे।

प्रॉपर्टी के ट्रांजेक्शंस

अभी 10 लाख रुपये से ज्यादा की प्रॉपर्टी के ट्रांजेक्शंस के लिए पैन जरूरी है। ड्राफ्ट रूल्स में इस सीमा को बढ़ाकर 20 लाख रुपये कर दिया गया है। इससे प्रॉपर्टी की कम वैल्यू के ट्रांजेक्शंस में कंप्लायंस घटेगा।

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बैंक/पोस्ट ऑफिस से विड्रॉल

अभी एक वित्त वर्ष में 20 लाख रुपये से ज्यादा कैश विड्रॉल की रिपोर्टिंग जरूरी है। इस सीमा को ड्राफ्ट रूल में घटाकर 10 लाख रुपये कर दिया गया है। यह कदम टैक्स चोरी पर अंकुश लगाने के लिए उठाया गया है।

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