1 अप्रैल 2026 से सैलरी पाने वाले कर्मचारियों के लिए बड़ा बदलाव आने वाला है। नया इनकम टैक्स एक्ट 2025 लागू होने के साथ इनकम टैक्स रूल्स 2026 भी प्रभाव में आ जाएंगे। मार्च में सरकार इन नियमों को नोटिफाई कर चुकी है। अब इनका असर सीधे कर्मचारियों की सैलरी स्ट्रक्चर और टेक-होम पर दिख सकता है।
CA नितिन कौशिक के मुताबिक, ऑफिस में मिलने वाले कई पर्क्स अब पहले जैसे ‘फ्री’ नहीं रहेंगे। सरकार इन नॉन-मोनेटरी बेनिफिट्स यानी पर्क्स की वैल्यू नए तरीके से तय कर रही है, जिससे उन पर टैक्स बढ़ सकता है। यही वजह है कि कई लोगों की इनहैंड सैलरी चुपचाप कम हो सकती है।
यह बदलाव पुराने और नए दोनों टैक्स रिजीम पर लागू होगा, क्योंकि यह टैक्स स्लैब से नहीं बल्कि सैलरी में मिलने वाले पर्क्स की वैल्यूएशन से जुड़ा है।
कंपनी कार पर टैक्स का बोझ बढ़ेगा
नए नियमों में कंपनी की तरफ से मिलने वाली कार की टैक्सेबल वैल्यू बढ़ा दी गई है। अगर आपको 1.6 लीटर तक का इंजन वाली कार मिली है और आप उसे ऑफिस के साथ पर्सनल काम में भी इस्तेमाल करते हैं, तो उसकी टैक्सेबल वैल्यू ₹1,800 से बढ़कर ₹5,000 प्रति महीने हो जाएगी। यानी हर महीने ₹3,200 ज्यादा आपकी टैक्सेबल इनकम में जुड़ जाएगा।
अगर आपके पास 1.8 लीटर इंजन वाली SUV है, तो यह वैल्यू करीब ₹2,400 से बढ़कर ₹7,000 प्रति महीने हो गई है। वहीं, अगर कंपनी ड्राइवर भी देती है, तो उसकी टैक्सेबल वैल्यू ₹900 से बढ़ाकर ₹3,000 प्रति महीने कर दी गई है।
इसका सीधा मतलब है कि सीनियर लेवल के कर्मचारियों की टैक्सेबल इनकम सालाना ₹1.2 लाख तक बढ़ सकती है। इसमें जिससे टैक्स स्लैब का फायदा काफी हद तक खत्म हो सकता है।
हालांकि, सभी बदलाव नुकसान वाले नहीं हैं। कुछ ऐसे भी बदलाव किए गए हैं, जो कर्मचारियों को टैक्स बचाने में मदद करेंगे।
कंपनी से मिलने वाले ब्याज-फ्री लोन पर टैक्स-फ्री लिमिट ₹20,000 से बढ़ाकर ₹2 लाख कर दी गई है। यानी अगर आप छोटे लोन लेते हैं, तो अब उस पर टैक्स नहीं लगेगा, जब तक वह इस सीमा के भीतर है।
मील वाउचर्स (जैसे Sodexo या Pluxee) पर भी राहत मिली है। अब प्रति मील टैक्स-फ्री लिमिट ₹50 से बढ़ाकर ₹200 कर दी गई है। अगर किसी कर्मचारी को दिन में दो मील मिलते हैं, तो सालाना ₹1.05 लाख तक का फायदा मिल सकता है।
इसके अलावा गिफ्ट और वाउचर की सालाना टैक्स-फ्री लिमिट ₹5,000 से बढ़ाकर ₹15,000 कर दी गई है, जिससे कर्मचारियों को थोड़ी अतिरिक्त राहत मिलेगी।
सरकार क्या मैसेज देना चाहती है
इन बदलावों से सरकार का इरादा साफ नजर आता है। महंगे पर्क्स जैसे कंपनी कार और लग्जरी सुविधाओं पर टैक्स बढ़ाया गया है, जबकि जरूरी और रोजमर्रा के फायदों पर राहत दी गई है।
अब कर्मचारियों के सामने दो विकल्प हैं या तो सिंपल और कैश-बेस्ड सैलरी स्ट्रक्चर रखें, या फिर कॉर्पोरेट लाइफस्टाइल के साथ आने वाले पर्क्स पर पूरा टैक्स चुकाने के लिए तैयार रहें।