New Labour Codes: गिग वर्कर्स को मिलेगी सोशल सिक्योरिटी, लेकिन 90 दिनों की ये शर्त करनी होगी पूरी

New Labour Codes: केंद्र सरकार देश के करोड़ों कामगारों के लिए लेबर कानूनों में बड़ा बदलाव करने जा रही है। सरकार ने नए लेबर कोड्स के ड्राफ्ट नियम जारी कर दिए हैं और इन पर लोगों से सुझाव मांगे गए हैं

अपडेटेड Jan 02, 2026 पर 1:47 PM
Story continues below Advertisement
केंद्र सरकार देश के करोड़ों कामगारों के लिए लेबर कानूनों में बड़ा बदलाव करने जा रही है।

New Labour Codes: केंद्र सरकार देश के करोड़ों कामगारों के लिए लेबर कानूनों में बड़ा बदलाव करने जा रही है। सरकार ने नए लेबर कोड्स के ड्राफ्ट नियम जारी कर दिए हैं और इन पर लोगों से सुझाव मांगे गए हैं। योजना है कि 1 अप्रैल 2026 से पूरे देश में ये नियम एक साथ लागू किए जाएं। इसका सबसे ज्यादा असर गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स पर पड़ेगा, जिन्हें पहली बार सोशल सिक्योरिटी का फायदा मिलने वाला है। हालांकि, इसके साथ कुछ शर्तें भी जुड़ी हैं, जिन्हें पूरा करना जरूरी होगा। ऐसे में सवाल यह है कि नए नियम आम कामगारों के लिए क्या आसान बनाएंगे और गिग वर्कर्स को कितना फायदा मिलेगा?

कौन-से हैं ये चार लेबर कोड?

कोड ऑन वेजेस, 2019


इंडस्ट्रियल रिलेशंस कोड, 2020

कोड ऑन सोशल सिक्योरिटी, 2020

ऑक्यूपेशनल सेफ्टी, हेल्थ एंड वर्किंग कंडीशंस कोड, 2020

इनका मकसद है कामगारों को ज्यादा सुरक्षा देना, नियमों को आसान बनाना और कारोबार के लिए एक समान स्ट्रक्चर तैयार करना है।

गिग वर्कर्स के लिए क्या बदलेगा?

ड्राफ्ट नियमों में पहली बार गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स के लिए सोशल सिक्योरिटी का साफ ढांचा प्रस्तावित किया गया है। लेकिन इसके लिए कुछ शर्तें भी रखी गई हैं। नियमों के मुताबिक कोई गिग या प्लेटफॉर्म वर्कर तभी इन कोड्स के तहत लाभ का हकदार होगा, जब उसने किसी एक एग्रीगेटर के साथ कम से कम 90 दिन काम किया हो। या अगर वह एक से ज्यादा एग्रीगेटर्स के साथ काम करता है, तो पिछले फाइनेंशियल ईयर में कुल मिलाकर 120 दिन का काम पूरा किया हो।

कई प्लेटफॉर्म पर काम करने वालों के लिए नियम कैसे गिने जाएंगे?

जिस दिन गिग वर्कर ने किसी प्लेटफॉर्म से थोड़ी भी कमाई की, वह दिन काम का दिन माना जाएगा।

अगर कोई वर्कर कई एग्रीगेटर्स के साथ काम करता है, तो सभी प्लेटफॉर्म के दिन जोड़कर गिने जाएंगे।

अगर किसी एक दिन वर्कर ने तीन अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर काम किया, तो वह तीन दिन माने जाएंगे।

यह नियम उन गिग वर्कर्स के लिए अहम है, जो एक साथ फूड डिलीवरी, कैब, या अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर काम करते हैं।

सुझाव देने का मौका

लेबर राज्य और केंद्र दोनों के अधिकार क्षेत्र में आता है। इसलिए अब राज्य सरकारें भी इन कोड्स के तहत अपने-अपने नियम जारी करेंगी। इंडस्ट्रियल रिलेशंस कोड पर सुझाव देने के लिए 30 दिन मिलेंगे। बाकी तीन कोड्स पर 45 दिन का समय दिया गया है।

सरकार का बड़ा टारगेट

केंद्रीय श्रम मंत्री मनसुख मंडाविया पहले ही साफ कर चुके हैं कि सरकार का टारगेट मार्च 2026 तक 100 करोड़ कामगारों को सोशल सिक्योरिटी कवर देने का है। अभी यह कवरेज करीब 94 करोड़ तक पहुंच चुकी है। 2015 में जहां यह सिर्फ 19% थी, वहीं 2025 तक बढ़कर 64% से ज्यादा हो चुकी है।

आम कर्मचारियों के लिए क्यों अहम है यह बदलाव?

अपॉइंटमेंट लेटर देना अनिवार्य होगा। 40 साल से ऊपर के कर्मचारियों के लिए मुफ्त हेल्थ चेकअप होगा। समान काम के लिए समान वेतन होगा। महिलाओं को सभी शिफ्ट्स में काम करने का सामान मौका मिलेगा।

Gold-Silver Price: ग्लोबल मार्केट में सोना 0.9% और चांदी 2% हुई महंगी, नए साल 2026 में भी तेजी जारी

हिंदी में शेयर बाजार स्टॉक मार्केट न्यूज़,  बिजनेस न्यूज़,  पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App  डाउनलोड करें।