1 अप्रैल से लागू होंगे नए लेबर कोड? जानिए ओवरटाइम पे से सोशल सिक्योरिटी तक क्या-क्या बदलेगा

1 अप्रैल 2026 से नए लेबर कोड लागू हो सकते हैं। इससे ओवरटाइम, काम के घंटे और सोशल सिक्योरिटी में बड़े बदलाव दिखेंगे। जानिए कर्मचारियों के लिए क्या बदलेगा और इसका आपकी नौकरी पर क्या असर पड़ेगा।

अपडेटेड Mar 31, 2026 पर 11:05 PM
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नए लेबर कोड का बड़ा लक्ष्य ज्यादा लोगों को सोशल सिक्योरिटी के दायरे में लाना है।

केंद्र सरकार 1 अप्रैल 2026 से नए लेबर कोड लागू कर सकती है। श्रम और रोजगार मंत्रालय ने चारों कोड के नियम तैयार कर लिए हैं और कानून मंत्रालय से मंजूरी मिलने के बाद इन्हें लागू किया जा सकता है।

ये चार कोड हैं- Code on Wages, Code on Social Security, Industrial Relations Code और Occupational Safety, Health and Working Conditions Code। ये मिलकर देश के 44 अलग-अलग श्रम कानूनों को आसान ढांचे में बदलेंगे, जिसमें कुल 29 प्रावधान होंगे।

सरकार ने इन्हें 21 नवंबर 2025 से नोटिफाई किया था और ड्राफ्ट नियमों पर लोगों से सुझाव भी मांगे थे। जनवरी तक फीडबैक लेने के बाद अब नियमों को अंतिम रूप दे दिया गया है।


काम के घंटे वही, लेकिन तरीका बदलेगा

नए नियमों के तहत रोजाना काम के घंटे 8 ही रहेंगे और हफ्ते में अधिकतम 48 घंटे की सीमा भी बनी रहेगी। यानी बेसिक वर्किंग आवर्स में कोई बदलाव नहीं होगा।

लेकिन अब काम करने के तरीके में लचीलापन बढ़ेगा। कंपनियां फ्लेक्सिबल वर्किंग शेड्यूल दे सकती हैं और जरूरत के हिसाब से ओवरटाइम का विकल्प भी मिलेगा।

ओवरटाइम के नियम अंतरराष्ट्रीय मानकों के हिसाब से बनाए गए हैं, ताकि कंपनियां काम का दबाव संभाल सकें और कर्मचारियों को अतिरिक्त काम का सही पैसा मिले।

सोशल सिक्योरिटी का दायरा बड़ा होगा

नए लेबर कोड का बड़ा लक्ष्य ज्यादा लोगों को सोशल सिक्योरिटी के दायरे में लाना है। सरकार मार्च 2026 तक 100 करोड़ कामगारों को इसमें शामिल करना चाहती है। अभी यह संख्या करीब 94 करोड़ है।

पिछले कुछ सालों में इसमें तेजी से बढ़ोतरी हुई है। 2015 में जहां सिर्फ 19% लोग इसके दायरे में थे, वहीं 2025 तक यह बढ़कर 64% से ज्यादा हो गया है। अब असंगठित क्षेत्र के मजदूर, गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स, और खुद काम करने वाले लोग भी इसमें शामिल होंगे।

समान वेतन और सुरक्षा पर जोर

नए नियमों में पारदर्शिता और कर्मचारियों की सुरक्षा पर खास ध्यान दिया गया है। अब हर कर्मचारी को अपॉइंटमेंट लेटर देना जरूरी होगा, ताकि उसकी नौकरी आधिकारिक रूप से दर्ज हो सके।

इसके साथ ही, समान काम के लिए समान वेतन का नियम लागू होगा और महिलाओं को भी बराबर मौके मिलेंगे। महिलाएं अलग-अलग शिफ्ट में काम कर सकेंगी, लेकिन उनकी सुरक्षा के लिए जरूरी इंतजाम करना होगा। इसके अलावा, 40 साल से ज्यादा उम्र के कर्मचारियों को हर साल मुफ्त हेल्थ चेकअप की सुविधा मिलेगी।

कुल मिलाकर क्या बदलने वाला है?

नए लेबर कोड का मकसद सिस्टम को आसान बनाना और ज्यादा से ज्यादा लोगों को सुरक्षा देना है। हालांकि, काम के घंटे वही रहेंगे, लेकिन काम करने का तरीका, ओवरटाइम के नियम और सोशल सिक्योरिटी का दायरा पहले से ज्यादा व्यवस्थित और व्यापक हो जाएगा।

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