छुट्टी के दिन आपको काम करने के लिए मजबूर कर सकता है बॉस? नए लेबर कानून में कर्मचारियों के साफ हैं सभी नियम
क्या आपका बॉस वीकेंड या छुट्टी के दिन काम करा सकता है? क्या 8 या 9 घंटे की शिफ्ट से ज्यादा रूकने के लिए कह सकता है? ज्यादातर प्राइवेट कर्माचरियों का जवाब होगा- हां। लेकिन ऐसा नहीं है
क्या आपका बॉस वीकेंड या छुट्टी के दिन काम करा सकता है?
क्या आपका बॉस वीकेंड या छुट्टी के दिन काम करा सकता है? क्या 8 या 9 घंटे की शिफ्ट से ज्यादा रूकने के लिए कह सकता है? ज्यादातर प्राइवेट कर्माचरियों का जवाब होगा- हां। लेकिन ऐसा नहीं है। आपक बॉस आपको वीकेंड, छुट्टी या काम के घंटों से एक्स्ट्रा काम करने का नहीं कह सकता। लेबर कानून के नियम कर्मचारियों के लिए साफ-साफ बनाए गए हैं। अगर बॉस या कंपनी छुट्टी, वीकेंड या काम के घंटों से एक्स्ट्रा काम करने के लिए कहता है। तो उसे एक्स्ट्रा पैसा या अलग छुट्टी देनी होगी। जानिये क्या कहते है लेबर कानून।
छुट्टी लेना है आपका अधिकार
भारतीय लेबर कानूनों के अनुसार हर कर्मचारी को हफ्ते में कम से कम एक दिन की छुट्टी मिलना जरूरी है। यह कोई कंपनी की मर्जी नहीं, बल्कि आपका कानूनी अधिकार है। फैक्टरीज एक्ट 1948 और OSH Code 2020 के तहत हर 6 दिन काम के बाद 1 दिन आराम जरूरी है। अगर आपसे छुट्टी के दिन काम कराया जाता है, तो बदले में आपको कंपनसेटरी ऑफ या डबल सैलरी मिलनी चाहिए।
बिना सहमति काम करवाना गलत
अगर आपके जॉब कॉन्ट्रैक्ट में वीकेंड या छुट्टी में काम करने की शर्त नहीं है, तो कंपनी आपको जबरदस्ती काम करने के लिए नहीं कह सकती। खासकर जब कोई एक्स्ट्रा पेमेंट या छुट्टी नहीं दी जा रही हो
पर्सनल या धार्मिक कारण
हालांकि, अगर आपके कॉन्ट्रैक्ट में रोटेशनल शिफ्ट या जरूरत पड़ने पर काम जैसी शर्त है, तो कंपनी का पक्ष मजबूत हो सकता है।
पब्लिक हॉलिडे पर काम के नियम
राज्य के नेशनल और फेस्टिनव हॉलिडे एक्ट के तहत कर्मचारियों को पब्लिक हॉलिडे पर पेड लीव मिलती है। अगर उस दिन काम कराया जाता है, तो कंपनी को डबल सैलरी देनी होगी या एक एक्स्ट्रा छुट्टी देनी होगी।
छुट्टी कैंसल करना भी नियमों के तहत
अगर आपने पहले से छुट्टी ली है और मैनेजर अचानक उसे कैंसल कर देता है, तो यह गलत माना जा सकता है। नियम के अनुसार छुट्टी में बदलाव के लिए पहले से नोटिस देना जरूरी होता है।
सबूत रखना क्यों जरूरी है?
अगर आपसे बार-बार छुट्टी के दिन काम कराया जा रहा है, तो उसका रिकॉर्ड रखना बहुत जरूरी है। जैसे ईमेल, व्हाट्सऐप मैसेज, कॉल रिकॉर्ड आदि। ये सबूत बाद में लेबर कोर्ट में आपके काम आ सकते हैं। इससे यह साबित किया जा सकता है कि आप पर दबाव बनाकर काम करवाया गया।
कर्मचारियों के अधिकार
छुट्टी के दिन काम करने पर अतिरिक्त पेमेंट या छुट्टी देना होगा।
बिना वजह छुट्टी कैंसल करने पर विरोध का अधिकार होगा।
बार-बार दबाव बनने पर शिकायत करने का अधिकार होगा।
कंपनी का पक्ष क्या होता है?
कंपनियां अक्सर यह तर्क देती हैं कि जॉब कॉन्ट्रैक्ट में जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त काम की शर्त है। या कर्मचारी ने खुद सहमति से काम किया। बिजनेस टारगेट पूरा करना जरूरी है आदि, ऐसे तर्क कंपनी देती है।