New vs Old Tax Regime: नई या पुरानी टैक्स रीजीम? जानिए बजट 2026 के बाद अब किसमें ज्यादा बचेगा टैक्स
New vs Old Tax Regime: बजट 2026 में टैक्स स्लैब नहीं बदले, लेकिन नई और पुरानी टैक्स रीजीम को लेकर दुविधा बनी हुई है। जानिए किन टैक्सपेयर्स के लिए नई रीजीम और किनके लिए पुरानी रीजीम बेहतर रहेगी।
FY 2026-27 के लिए नए टैक्स सिस्टम में स्लैब को बिना किसी बदलाव के बरकरार रखा गया है।
New vs Old Tax Regime: केंद्रीय बजट 2026 के बाद इनकम टैक्स फिर चर्चा में है। टैक्स स्लैब, रेट और छूट को लेकर लाखों टैक्सपेयर्स बजट भाषण पर नजर लगाए बैठे थे। लेकिन वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के रिकॉर्ड नौवें लगातार बजट भाषण के बाद साफ हो गया कि इनकम टैक्स के ढांचे में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया गया है। यानी सिस्टम में स्थिरता तो है, लेकिन स्लैब को लेकर कोई नई राहत नहीं मिली।
नया और पुराना टैक्स सिस्टम
2020 में शुरू किया गया नया इनकम टैक्स सिस्टम अब भी पुराने सिस्टम के साथ चलता रहेगा। इसका मतलब है कि टैक्सपेयर्स के सामने वही पुरानी दुविधा बनी हुई है। कम टैक्स रेट लेकिन कम छूट वाला नया सिस्टम चुनें या ज्यादा टैक्स रेट के साथ ज्यादा डिडक्शन वाला पुराना सिस्टम।
समय के साथ यह फैसला और ज्यादा जटिल हो गया है, क्योंकि यह पूरी तरह इस बात पर निर्भर करता है कि किसी की सालाना आय कितनी है और वह कितनी छूट व डिडक्शन क्लेम कर सकता है।
टैक्स सिस्टम के स्लैब जस के तस
FY 2026-27 के लिए नए टैक्स सिस्टम में स्लैब को बिना किसी बदलाव के बरकरार रखा गया है। इसके तहत 4 लाख रुपये तक की आय पूरी तरह टैक्स फ्री रहेगी।
4 लाख से 8 लाख रुपये तक की आय पर 5 प्रतिशत टैक्स लगेगा। 8 लाख से 12 लाख रुपये तक की आय पर 10 प्रतिशत टैक्स देना होगा। इसके बाद टैक्स स्लैब धीरे-धीरे बढ़ते हैं और 24 लाख रुपये से ऊपर की आय पर टैक्स रेट 30 प्रतिशत तक पहुंच जाता है।
12 लाख तक की आय पर अब भी जीरो टैक्स
पहले दी गई एक बड़ी राहत इस साल भी जारी रहेगी। रेजिडेंट इंडिविजुअल्स जिनकी सालाना आय 12 लाख रुपये तक है, उन्हें पूरा टैक्स रिबेट मिलेगा। इसका मतलब है कि उनकी टैक्स देनदारी शून्य रहेगी।
सैलरीड टैक्सपेयर्स के लिए यह सीमा और बढ़ जाती है। 75,000 रुपये के स्टैंडर्ड डिडक्शन के चलते वे 12.75 लाख रुपये तक की आय पर भी टैक्स फ्री रह सकते हैं। यही वजह है कि जिन लोगों के पास ज्यादा डिडक्शन नहीं हैं, उनके लिए नया टैक्स सिस्टम ज्यादा फायदेमंद माना जा रहा है।
ज्यादा डिडक्शन वालों के लिए पुराना सिस्टम
पुराना इनकम टैक्स सिस्टम भी बिना बदलाव के बना हुआ है और उन टैक्सपेयर्स के लिए अब भी उपयोगी है, जो ज्यादा छूट और डिडक्शन का पूरा फायदा उठाते हैं। इस सिस्टम में 2.5 लाख रुपये तक की आय टैक्स फ्री रहती है। इसके बाद 5 प्रतिशत, 20 प्रतिशत और 30 प्रतिशत के टैक्स स्लैब लागू होते हैं।
पुराने सिस्टम में हाउस रेंट अलाउंस, लीव ट्रैवल अलाउंस, सेक्शन 80C के निवेश, सेक्शन 80D के तहत मेडिकल इंश्योरेंस, NPS में निवेश और होम लोन के ब्याज जैसी कई अहम छूट मिलती हैं।
किसके लिए कौन सा सिस्टम बेहतर
टैक्स एक्सपर्ट्स का मानना है कि 12 लाख रुपये तक की आय वालों के लिए नया टैक्स सिस्टम साफ तौर पर बेहतर है, क्योंकि इसमें टैक्स पूरी तरह जीरो हो जाता है।
लेकिन ज्यादा आय वालों के लिए, खासतौर पर 24 लाख रुपये से ऊपर कमाने वालों के लिए फैसला इस बात पर निर्भर करता है कि वे कुल मिलाकर कितनी छूट और डिडक्शन ले पा रहे हैं। अगर यह रकम करीब 8 लाख रुपये से ज्यादा है, तो पुराना टैक्स सिस्टम टैक्स बचाने में ज्यादा मददगार साबित हो सकता है।
स्लैब नहीं बदले, लेकिन प्रक्रिया हुई आसान
भले ही टैक्स स्लैब और रेट में कोई बदलाव नहीं किया गया हो, लेकिन बजट 2026 में टैक्स फाइलिंग और कंप्लायंस से जुड़े कई अहम सुधार किए गए हैं। संशोधित इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने की आखिरी तारीख को दिसंबर 31 से बढ़ाकर 31 मार्च कर दिया गया है, हालांकि इसके लिए मामूली फीस देनी होगी।
इसके अलावा, फाइलिंग की समयसीमा को भी सरल बनाया गया है। ITR-1 और ITR-2 अब 31 जुलाई तक फाइल किए जा सकेंगे। वहीं नॉन-ऑडिट बिजनेस मामलों और ट्रस्ट्स को 31 अगस्त तक का समय मिलेगा।
अन्य टैक्स राहत और आगे का रोडमैप
बजट में कुछ और राहत भी दी गई है। मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल से मिलने वाले ब्याज को पूरी तरह टैक्स फ्री कर दिया गया है। वहीं लिबरलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम के तहत विदेश यात्रा, शिक्षा और मेडिकल खर्च पर लगने वाला TCS भी घटाया गया है।
नया इनकम टैक्स एक्ट, 2025, 1 अप्रैल 2026 से लागू होगा और जल्द ही ज्यादा सरल ITR फॉर्म आने की उम्मीद है। हालांकि इन प्रक्रियात्मक बदलावों के बावजूद, आने वाले वित्त वर्ष के लिए इनकम टैक्स सिस्टम की बुनियादी संरचना में कोई बदलाव नहीं किया गया है।