NPS निवेशकों के लिए खुशखबरी! पेंशन फंड के बढ़ेंगे विकल्प, फीस पर लगेगी लगाम; जानिए डिटेल

PFRDA ने NPS में बड़े सुधारों को मंजूरी दी है। बैंकों को पेंशन फंड शुरू करने की इजाजत मिलेगी और इनवेस्टमेंट मैनेजमेंट फीस में बदलाव होगा। इससे सब्सक्राइबर्स को ज्यादा विकल्प, बेहतर गवर्नेंस और कम लागत का फायदा मिल सकता है। जानिए डिटेल।

अपडेटेड Jan 01, 2026 पर 5:23 PM
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PFRDA ने पेंशन फंड्स के लिए इनवेस्टमेंट मैनेजमेंट फीस यानी IMF स्ट्रक्चर में भी बदलाव किया है।

पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (PFRDA) ने नेशनल पेंशन सिस्टम (National Pension System) को और मजबूत बनाने के लिए कई नीतिगत सुधारों को मंजूरी दी है। इन सुधारों का मकसद पेंशन फंड के विकल्प बढ़ाना, सिस्टम में प्रतिस्पर्धा लाना और निवेशकों यानी सब्सक्राइबर्स के हितों की बेहतर सुरक्षा करना है।

बैंकों को पेंशन फंड शुरू करने की मंजूरी

PFRDA ने सैद्धांतिक तौर पर शेड्यूल्ड कमर्शियल बैंकों को यह अनुमति दी है कि वे स्वतंत्र रूप से पेंशन फंड स्थापित कर सकें और NPS के तहत जमा होने वाली रकम का मैनेजमेंट करें। यह प्रस्ताव उन पुराने रेगुलेटरी प्रतिबंधों को हटाने की दिशा में है, जिनकी वजह से अब तक बैंक पेंशन फंड सेगमेंट में सीमित भूमिका निभा पा रहे थे।


कौन से बैंक होंगे पात्र

रेगुलेटर ने साफ किया है कि हर बैंक को यह अनुमति नहीं मिलेगी। सिर्फ वही बैंक पेंशन फंड स्पॉन्सर कर सकेंगे, जो मजबूत वित्तीय स्थिति वाले हों और सिस्टम के लिहाज से भरोसेमंद माने जाते हों।

पात्रता का आकलन बैंक की नेटवर्थ, मार्केट कैपिटलाइजेशन और RBI के नियमों के मुताबिक उसकी वित्तीय मजबूती के आधार पर किया जाएगा। इस संबंध में विस्तृत मानदंड बाद में अधिसूचित किए जाएंगे, जो नए और मौजूदा दोनों तरह के पेंशन फंड्स पर लागू होंगे।

NPS ट्रस्ट बोर्ड में नए ट्रस्टी

गवर्नेंस को मजबूत करने के लिए PFRDA ने चयन प्रक्रिया के बाद NPS ट्रस्ट के बोर्ड में तीन नए ट्रस्टियों की नियुक्ति की है। इनमें SBI के पूर्व चेयरमैन दिनेश कुमार खारा, UTI एसेट मैनेजमेंट कंपनी की पूर्व एग्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट स्वाति अनिल कुलकर्णी और डिजिटल इंडिया फाउंडेशन के को-फाउंडर अरविंद गुप्ता शामिल हैं। दिनेश कुमार खारा को NPS ट्रस्ट बोर्ड का चेयरपर्सन भी नियुक्त किया गया है।

इनवेस्टमेंट मैनेजमेंट फीस में बदलाव

PFRDA ने पेंशन फंड्स के लिए इनवेस्टमेंट मैनेजमेंट फीस यानी IMF स्ट्रक्चर में भी बदलाव किया है। यह नया ढांचा 1 अप्रैल 2026 से लागू होगा। इसमें सरकारी और गैर-सरकारी सेक्टर के सब्सक्राइबर्स के लिए अलग-अलग फीस दरें तय की गई हैं, ताकि निवेशकों के हितों की बेहतर सुरक्षा की जा सके।

यह संशोधित फीस ढांचा मल्टीपल स्कीम फ्रेमवर्क के तहत आने वाली स्कीम्स पर भी लागू होगा। इसमें हर स्कीम का कॉर्पस अलग-अलग गिना जाएगा। हालांकि, रेगुलेटर ने यह भी स्पष्ट किया है कि पेंशन फंड्स द्वारा चुकाई जाने वाली 0.015 प्रतिशत की एनुअल रेगुलेटरी फीस में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

इन सुधारों का मकसद क्या है

PFRDA के मुताबिक, इन सभी फैसलों का उद्देश्य NPS इकोसिस्टम को ज्यादा प्रतिस्पर्धी, बेहतर गवर्नेंस वाला और लंबे समय तक टिकाऊ बनाना है। साथ ही, इससे सरकारी, कॉरपोरेट, रिटेल और उभरते वर्कफोर्स से जुड़े सब्सक्राइबर्स को रिटायरमेंट के बाद ज्यादा सुरक्षित भविष्य मिल सकेगा।

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