केंद्र सरकार के एंप्लॉयीज के लिए सेक्शन 80सी (Section 80C) के तहत आने वाले इंस्ट्रूमेंट्स में टैक्स-सेविंग्स के अलावा टैक्स बचाने का एक और ऑप्शन है। यह है नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) टियर-2 (इनवेस्टमेंट) अकाउंट। केंद्र सरकार ने सितंबर 2020 में एनपीएस टियर-2 वैरिएंट (NPS-TTS) शुरू किया था। इसमें लॉक-इन पीरियड 3 साल है। यह सिर्फ केंद्र सरकार के ऐसे एंप्लॉयीज के लिए हैं, जिनका एक्टिव एनपीएस टियर-1 (प्राइमरी, रिटायरमेंट) अकाउंट है। केंद्र सरकार के एंप्लॉयीज इस स्कीम में निवेश कर सकते हैं और सेक्शन 80सी के तहत 1.5 लाख रुपये तक के टैक्स-डिडक्शन का फायदा उठा सकते हैं।
टियर 2 अकाउंट में निवेश के लिए एक्टिव टियर 1 अकाउं होना चाहिए
इस स्कीम में केंद्र सरकार के एंप्लॉयीज ने ज्यादा दिलचस्पी नहीं दिखाई है। लेकिन, यह ऐसा विकल्प है, जिसका इस्तेमाल वे 31 मार्च से पहले टैक्स-सेविंग्स के लिए कर सकते हैं। केंद्र सरकार के एंप्लॉयीज के अलावा दूसरे लोग भी एनपीएस के लो चार्ज स्ट्रक्चर का फायदा उठाने के लिए इस अकाउंट को ओपन कर सकते हैं। शर्त यह है कि उनके पास एनपीएस टियर-1 अकाउंट होना चाहिए।
इक्विटी और डेट में निवेश करने का विकल्प
म्यूचुअल फंड्स की तरह टियर 1 और टियर 2 अकाउंट्स के जरिए डेट (कॉर्पोरेट डेट एंड गवर्नमेंट सिक्योरिटीज), इक्विटी और अल्टरनेटिव एसेट स्कीम में निवेश किया जा सकता है। NPS टियर 2 में टियर 1 से अलग पैसे निकालने की फ्लेक्सिबिलिटी है। टियर 1 में पैसा अकाउंट होल्डर की उम्र 60 साल तक होने तक लॉक हो जाता है। टियर-1 में जमा 60 फीसदी पैसे को निकालने की इजाजत है, जिस पर टैक्स नहीं लगता है। बाकी पैसे को पेंशन इनकम के लिए एन्युटी खरीदने के लिए इस्तेमाल करना पड़ता है। कुछ खास कामों के लिए आंशिक निकासी (Partial Withdrawal) की इजाजत है। इनमें घर खरीदना, गंभीर बीमारी का इलाज और बच्चों की शिक्षा शामिल हैं।
टियर 2 अकाउंट के गेंस पर कैसे टैक्स लगता है?
टियर-1 रिटायरमेंट अकाउंट से पैसे निकालने पर टैक्स के नियम स्पष्ट हैं। टियर-2 भी आपको पेंशन फंड मैनेजर को चुनने और उसकी स्कीमों-इक्विटी, कॉर्पोरेट डेट, गवर्नमेंट सिक्योरिटीज और अल्टरनेट एसेट्स में निवेश करने की इजाजत देता है। हालांकि, अगर आप सरकारी एंप्लॉयी नहीं हैं, जिसने तीन साल लॉक-इन के साथ इस अकाउंट को टैक्स-सेविंग विकल्प के रूप में चुना है तो आपको जब जरूरत हो पैसे निकालने की इजाजत है।
अब तक, यह स्पष्ट नहीं है कि एनपीएस टियर 2 अकाउंट में हुए गेंस पर रिडेम्प्शन के वक्त किस तरह टैक्स लगेगा। कुछ एक्सपर्ट्स का कहना है कि पैसे निकालने की फ्लेक्सिबिलिटी को देखते हुए ऐसा लगता है कि गेंस को टैक्सपेयर की अन्य स्रोत से हुई इनकम माना जाएगा और उस पर टैक्सपेयर के स्लैब के हिसाब से टैक्स लगेगा।
हालांकि, इस बारे में कुछ एक्सपर्ट्स की राय अलग है। टैक्स कंसल्टेंसी फर्म टैक्सबीरबल के डायरेक्टर चेतन चंडाक ने कहा, "इस बारे में इनकम टैक्स डिपार्टमेंट और PFRDA को स्थिति स्पष्ट करने के लिए गाइडलाइंस इश्यू करनी चाहिए। इसलिए फिलहाल यह इस बात पर निर्भर करता है कि नियम का क्या मतलब निकाला जाता है।"
अगर आप केंद्र सरकार के एंप्लॉयी हैं और एनपीएस टियर-2 में टैक्स-सेविंग्स के लिए इनवेस्ट करना चाहते हैं तो आपको टैक्स के मसले को ध्यान में रखना होगा।
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