Gold Price: पुराने गहनों की बिक्री 43% बढ़ी, कीमत गिरने के डर से मुनाफा वसूल रहे लोग

Gold Price: सोने की कीमतों में गिरावट की आशंका के बीच लोग पुराने गहने तेजी से बेच रहे हैं। अप्रैल-जून तिमाही में बिक्री 43% बढ़ गई। जानिए लोग अभी मुनाफा क्यों वसूल रहे हैं और इसका गोल्ड मार्केट पर क्या असर पड़ सकता है।

अपडेटेड Jun 29, 2026 पर 9:24 PM
IBJA के नेशनल सेक्रेटरी सुरेंद्र मेहता के मुताबिक, लोग गोल्ड की ऊंची कीमत का फायदा उठाकर नकदी जुटाना चाहते हैं।

Gold Price: भारतीय परिवारों में पुराने गहने बेचने का चलन तेजी से बढ़ा है। इसकी वजह सोने का भाव है। दरअसल, लोगों को डर है कि इस साल की रिकॉर्ड ऊंचाई के बाद सोने के दाम और नीचे आ सकते हैं। ऐसे में कई लोग अभी मुनाफा वसूलना बेहतर समझ रहे हैं।

43% बढ़ी पुराने सोने की बिक्री

इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) के मुताबिक, अप्रैल-जून तिमाही में करीब 50 टन पुराने सोने की बिक्री हुई। यह पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 43% ज्यादा है।


रिपोर्ट के मुताबिक, सोने की कीमत करीब 1.42 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम तक आ गई है। इसके बाद भी लोगों को आशंका है कि भाव 1.20 लाख रुपये तक गिर सकते हैं। इसी वजह से कई लोग पुराने गहनों को बदलने की बजाय सीधे बेचकर नकद ले रहे हैं।

क्यों बेच रहे हैं लोग?

IBJA के नेशनल सेक्रेटरी सुरेंद्र मेहता के मुताबिक, लोग ऊंची कीमत का फायदा उठाकर नकदी जुटाना चाहते हैं।

उनका कहना है कि साल की शुरुआत में सोना करीब 1.80 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गया था। अब कीमत घटकर करीब 1.40 लाख रुपये रह गई है। ऐसे में लोगों को डर है कि आगे और गिरावट आ सकती है, इसलिए वे अभी सोना बेच रहे हैं।

गोल्ड रीसाइक्लिंग को मिल रही रफ्तार

पुराने सोने की बढ़ती बिक्री से देश के संगठित गोल्ड रीसाइक्लिंग कारोबार को भी फायदा हो रहा है। अब लोग घर में पड़ा बेकार सोना बेचकर उसे फिर से बाजार में ला रहे हैं।

इंडस्ट्री के मुताबिक, 2025 में भारत में 125 से 150 टन रीसाइकल्ड गोल्ड बाजार में आया था। अगर मौजूदा रुझान जारी रहा, तो 2026 में यह आंकड़ा 200 से 250 टन तक पहुंच सकता है।

आयात पर निर्भरता घटाने में मिलेगी मदद

भारत दुनिया के सबसे बड़े सोना आयात करने वाले देशों में शामिल है। FY26 में देश ने करीब 72.4 अरब डॉलर का सोना आयात किया। इंडस्ट्री का मानना है कि अगर पुराने सोने की रीसाइक्लिंग बढ़ती है, तो आयात पर निर्भरता कम होगी। साथ ही, घरेलू बाजार में सोने की उपलब्धता भी बढ़ेगी।

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