Personal Finance: 'वन-वीक रूल' का करें इस्तेमाल, आपको कभी नहीं होगी पैसों की दिक्कत

अट्रैक्टिव ऑफर देखकर खुद को खरीदारी से नहीं रोक पाने की समस्या कई लोगों के साथ है। इसका बहुत खराब असर व्यक्ति के पर्सनल फाइनेंस यानी वित्तीय स्थिति पर पड़ता है। इस समस्या का आसान समाधान 'वन वीक रूल' है

अपडेटेड Apr 03, 2026 पर 11:50 AM
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अचानक इच्छा होने पर किसी चीज को सोचे-समझे बगैर खरीद लेने को इंपल्स पर्चेज कहा जाता है।

क्या आपको फोन पर फ्लैश सेल का मैसेज मिला है? छुट्टी के दिन ऐसे ज्यादा मैसेजेज फोन पर आते रहते हैं। वे इतने अट्रैक्टिव होते हैं कि खुद को रोकना मुश्किल हो जाता है। आप जल्दबाजी में ऐसी खरादीरी कर लेते हैं, जिसकी जरूरत आपको नहीं थी। अगर पहले की गई ऐसी खरीदारी को याद करें तो आप पाएंगे कि शायद ही कभी उस चीज का आपने इस्तेमाल किया होगा। यह भी हो सकता है कि खरीदने के बाद आप उसे भूल गए होंगे। आप ऐसा करने वाले अकेले नहीं हैं।

इंपल्स पर्चेज की समस्या कई लोगों के साथ होती है

अट्रैक्टिव ऑफर देखकर खुद को खरीदारी से नहीं रोक पाने की समस्या कई लोगों के साथ है। इसका बहुत खराब असर व्यक्ति के पर्सनल फाइनेंस यानी वित्तीय स्थिति पर पड़ता है। सवाल है कि इस समस्या का समाधान क्या है? इस समस्या का आसान समाधान 'वन वीक रूल' है। यह आपको नियम आपको अनावश्यक खरीदारी करने से रोकता है।


वन-वीक रूल पर अमल करना काफी आसान है

वन-वीक रूल पर अमल करना काफी आसान है। यह नियम कहता है कि अगली बार जब आपको कोई गैर-जरूरी चीज खरीदने की इच्छा हो तो आपको उसे तुरंत नहीं खरीदना है। आपको एक हफ्ते इंतजार करना है। अगर एक हफ्ते बाद भी आपको लगता है कि उस चीज को खरीदना जरूरी है तो आप उसे खरीद सकते हैं। अगर, एक हफ्ते बाद उसे खरीदने की आपकी इच्छा कम हो जाती है तो आप उसे खरीदने का प्लान कैंसिल कर सकते हैं। इस नियम से गैर-जरूरी चीजों की खरीदारी पर लगाम लगाने में मदद मिलती है।

इंपल्स पर्चेज के पीछे सबसे बड़ा हाथ इमोशन का होता है

अचानक इच्छा होने पर किसी चीज को सोचे-समझे बगैर खरीद लेने को इंपल्स पर्चेज कहा जाता है। इसके पीछे इमोशन, रोमांच, जल्दबाजी और FOMO का हाथ होता है। फोमो (fear of missing out) का मतलब कोई मौका चूक जाने का डर होता है। वन-वीक गैप कूलिंग ऑफ पीरियड का काम करता है। इस पीरियड में आपकी भावना और विवेक के बीच रस्साकशी चलती है। कई बार विवेक भावना पर भारी पड़ता है। आपको लगता है कि आप जिस चीज को खरीदने जा रहे थे, उसकी कोई जरूरत आपको नहीं थी।

कुछ समय बाद दिखता है वन-वीक रूल का फायदा

वन-वीक रूल का का फायदा आपको कुछ समय बाद दिखता है। मान लीजिए आप हर महीने सिर्फ 5000 रुपये की इंपल्स पर्चेज करते हैं। इसका मतलब है कि आप एक साल में 60,000 रुपये की ऐसी खरीदारी करते हैं। पांच साल में यह अमाउंट बढ़कर 3 लाख हो जाता है। अगर आप इस पैसे को इनवेस्ट करते हैं तो आपका पैसा हर साल बढ़ता जाता है। अगर सालाना रिटर्न 12 फीसदी भी मान लिया जाए तो आपकी 5,000 रुपये का मंथली इनवेस्टमेंट पांच साल में बढ़कर 4.05 लाख रुपये हो जाता है।

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इनवेस्टमेंट के पैसे का इस्तेमाल आप जरूरी कामों के लिए कर सकते हैं

अगली बार जब अचानक कोई चीज खरीदने की इच्छा हो तो आप इस रूल का इस्तेमाल कर सकते हैं। साथ ही आप उस पैसे को कहीं निवेश कर सकते हैं। आप देखेंगे कि कुछ साल में आपका यह पैसा बढ़ जाता है। इस पैसे का इस्तेमाल आप जरूरी कामों के लिए कर सकते हैं। इससे आपकी वित्तीय स्थिति पर काफी पॉजिटिव असर पड़ेगा।

डिसक्लेमर: मनीकंट्रोल पर एक्सपर्ट्स की तरफ से व्यक्त विचार उनके अपने विचार होते हैं। ये वेबसाइट या इसके मैनेजमेंट के विचार नहीं होते। मनीकंट्रोल की यूजर्स को सलाह है कि उन्हें निवेश का फैसला लेने से पहले सर्टिफायड एक्सपर्ट्स की राय लेनी चाहिए।

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