किसी फ्लाइट के बिजनेस क्लास में ट्रैवल करने के बाद जनरल क्लास में ट्रैवल करना अच्छा नहीं लगता। ओमेगा की घड़ी पहनने के बाद साधारण स्टेनलेस स्टील की घड़ी पहनने के बारे में आप नहीं सोच सकते। क्या मर्सीडीज ई-क्लास का आनंद उठाने के बाद आपको मारुति डिजायर में बैठना अच्छा लगेगा?
लाइफस्टाइल बढ़ने पर आपका खर्च बढ़ता जाता है
ये ऐसे खर्च है, जो आप दिखावे के लिए नहीं करते हैं बल्कि अपने आप आपकी जरूरतें अपग्रेड होती जाती हैं। यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि लाइफस्टाइल अपग्रेड की वजह से इनफ्लेशन बगैर बताए आप पर असर डालने लगता है। अपने पैसे के प्रबंधन में आपको भविष्य में अपने पोर्टफोलियो की ग्रोथ के लिए पर्याप्त पैसे का इंतजाम रखना होगा। इसका मतलब है कि आपको लाइफस्टाइल अपग्रेड के पड़ने वाले असर से खुद को बचाना होगा।
जरूरी है फाइनेंशियल प्लानिंग पर फोकस
दुनियाभर में अनिश्चितता, ट्रेड टेंशन और इकोनॉमीज पर इसके पड़ने वाले असर को देखते हुए आपके लिए अपने फाइनेंशियल प्लानिंग पर फोकस करना और भी जरूरी हो जाता है, जो आपके नियंत्रण में है।
कई एसेट्स की कीमतों में उछाल
शेयर, डेट, गोल्ड, कमोडिटीज और क्रिप्टोकरेंसीज सहित सभी एसेट्स की कीमतें हाई लेवल पर चल रही हैं। इस साल (2025) इनवेस्टर्स ने भारी मुनाफा कमाए हैं। आईपीओ मार्केट में इनवेस्टर्स की जबर्दस्त दिलचस्पली दिख रही है। हाल में आए लेंसकार्ट के आईपीओ में शेयर की कीमत अर्निंग्स का 230 गुना थी। ऐसा लगता है कि ग्लोबल फाइनेंशियल मार्केट्स जियोपॉलिटिकल और इकोनॉमीज में अनिश्चितता को देखने के लिए तैयार नहीं है।
शेयर बाजारों में इस साल बड़ा उछाल
भारत और दुनिया में बड़ी कंपनियों ने एंप्लॉयीज की छंटनी की हैं। 2025 में अब तक एसएंडपी 500 करीब 18 फीसदी चढ़ा है। जर्मनी का डीएएक्स 21 फीसदी चढ़ा है। जापान का निक्केई 31 फीसदी उछला है। हमारा निफ्टी 50 भी हाल में आई तेजी के बाद इस दौरान करीब 9 फीसदी ऊपर है।
एसेट्स की कीमतें बबल का दे रही संकेत
फाइनेंशियल एसेट्स, गोल्ड और क्रिप्टोकरेंसीज में पिछले पांच सालों में आई तेजी बबल का संकेत दे रही है। सवाल है कि अगर यह बबल फूटता है तो आप क्या करेंगे? इसका न सिर्फ पैसिव पोर्टफोलियो से होने वाली आपकी कमाई पर असर पड़ेगा बल्कि नौकरी से हर महीने आने वाली सैलरी पर भी इसका निगेटिव असर पड़ सकता है।
कंजम्प्शन से जुड़े खर्च के लिए लोग ले रहे कर्ज
हाल में इंडिया में रिटेल डेट के डेटा से कंजम्प्शन से जुड़े खर्च में लोगों की बढ़ती दिलचस्पी का संकेत मिलता है। ऐसे वक्त जब एसेट्स की कीमतें गिर रही होंगी बढ़ता पर्सनल और गोल्ड लोन बड़ी मुसीबत पैदा कर सकता है। अगले एक साल या दो साल में एसेट के प्राइसेज की दिशा का अंदाजा कोई भी लगा सकता है। सोने की संस्थागत खरीदारी कम नहीं हुई है। अनुमान है कि थोड़े समय की गिरावट के बाद गोल्ड की कीमतें नई ऊंचाई पर पहुंच जाएंगी।
इनवेस्टमेंट आपके खर्च के प्लान के हिसाब से होना चाहिए
गोल्ड हो या शेयर, करेक्शन के अनुमान को देखते हुए अभी बेचने का मतलब है कि आपको दोबारा निवेश के समय के बारे में भी सोचना होगा। ऐसा करने में आपको यह ध्यान में रखना होगा कि आज लाइफस्टाइल पर होने वाला आपका खर्च फ्यूचर की आपकी लाइफस्टाइल की कीमत पर नहीं होना चाहिए। आपका लॉन्ग टर्म इनवेस्टमेंट आपके लॉन्ग टर्म में खर्च के गोल के हिसाब से होना चाहिए।