Personal Loan EMI: पर्सनल लोन लेना अब काफी आसान है। जरूरत पड़ी और कुछ घंटों में पैसा खाते में आ गया। लेकिन असली हिसाब EMI शुरू होने के बाद समझ आता है। चूंकि पर्सनल लोन में कुछ गिरवी रखने की जरूरत नहीं होती, तो इसमें ब्याज दर अधिक होती है। इसलिए कम रकम के लोन पर भी लंबी अवधि में अच्छा खासा ब्याज देना पड़ सकता है।
इसे 5 लाख रुपये के पर्सनल लोन से समझते हैं। इसमें ब्याज दर 12% सालाना मान लेते हैं। वैसे ये आपके सिबिल स्कोर और कमाई के हिसाब से कम या ज्यादा भी हो सकती है। अब देखते हैं कि यही लोन 2 साल, 3 साल, 4 साल और 5 साल में चुकाने पर कितना ब्याज देना पड़ेगा।
2 साल में लोन खत्म किया तो
अगर 5 लाख रुपये का लोन 2 साल के लिए लिया जाता है, तो EMI करीब 23,537 रुपये होगी। 24 महीने तक यह EMI चुकाने पर बैंक को कुल करीब 5.65 लाख रुपये देने होंगे। इसमें करीब 64,882 रुपये ब्याज होगा। यानी कम अवधि रखने पर EMI जरूर बड़ी होगी, लेकिन ब्याज का बोझ काफी कम रहेगा।
अब लोन की अवधि 3 साल कर देते हैं। EMI घटकर करीब 16,607 रुपये रह जाएगी। 36 महीने में कुल भुगतान करीब 5.98 लाख रुपये होगा। इसमें ब्याज करीब 97,858 रुपये बैठेगा। यानी 5 साल के मुकाबले 3 साल में लोन खत्म करने पर करीब 69 हजार रुपये ब्याज बच सकता है।
4 साल की अवधि में कितना खर्च?
अगर 5 लाख रुपये का यही लोन 4 साल में चुकाते हैं, तो EMI करीब 13,167 रुपये होगी। इस दौरान बैंक को कुल करीब 6.32 लाख रुपये देने होंगे। इसमें करीब 1.32 लाख रुपये ब्याज के रूप में जाएगा। यानी EMI कम करने के लिए अवधि बढ़ाने पर कुल ब्याज बढ़ता चला जाता है।
अब आते हैं सबसे लंबी अवधि पर। 5 साल यानी 60 महीने के लिए लोन लेने पर EMI करीब 11,122 रुपये होगी। यह चारों विकल्पों में सबसे कम EMI है। लेकिन इसकी कीमत भी चुकानी पड़ेगी। 60 महीने में बैंक को कुल करीब 6.67 लाख रुपये देने होंगे। इसमें करीब 1.67 लाख रुपये सिर्फ ब्याज होगा।
अवधि बढ़ी तो ब्याज भी बढ़ेगा
सिर्फ ब्याज बचाने के चक्कर में पूरी बचत न लगाएं
यहां एक बात का ध्यान रखना जरूरी है। पर्सनल लोन जल्दी खत्म करना अच्छा हो सकता है, लेकिन इसके लिए अपनी पूरी बचत लोन में डाल देना समझदारी नहीं है। घर के जरूरी खर्च और इमरजेंसी फंड के लिए पैसा बचा रहना चाहिए। अगर अचानक नौकरी या आमदनी से जुड़ी दिक्कत आती है, तो यही पैसा काम आएगा।
अगर पहले से चल रहे लोन को समय से पहले बंद करना चाहते हैं, तो बैंक या NBFC के नियम भी देख लें। कुछ मामलों में प्रीपेमेंट चार्ज या फ्रीक्लोजर चार्ज लग सकते हैं। ऐसे में असल बचत थोड़ी कम हो सकती है।
Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।