Personal Loan: सैलरी वालों को आसानी से मिलता है पर्सनल लोन, लेकिन इन 5 बातों नजरअंदाज करना पड़ेगा महंगा

Personal Loan: सैलरी के आधार पर मिलने वाला पर्सनल लोन जल्दी और आसानी से मिल सकता है। लेकिन एक छोटी सी गलती आपकी जेब पर भारी पड़ सकती है। इसीलिए आवेदन से पहले 5 बातों को समझना बेहद जरूरी है।

अपडेटेड Jun 17, 2026 पर 5:41 PM
पर्सनल लोन लेने से पहले सिर्फ ब्याज दर ही नहीं, बल्कि प्रोसेसिंग फीस, दूसरे चार्ज और लोन की शर्तों की भी तुलना करें।

Personal Loan: भारत में डिजिटल पर्सनल लोन का चलन तेजी से बढ़ा है। खासकर, सैलरी को देखकर मिलने वाला पर्सनल लोन। पारंपरिक लोन के मुकाबले इसमें कम कागजी काम होती है। लोन देने वाली कंपनियां आपकी सैलरी, नौकरी की स्थिरता, क्रेडिट स्कोर, पुराने लोन चुकाने का रिकॉर्ड और बैंकिंग पैटर्न देखकर तय करती हैं कि आपको कितना लोन दिया जा सकता है।

इस वजह से लोन जल्दी मंजूर हो जाता है और कम समय में पैसा मिल सकता है। लोग इन लोन का इस्तेमाल मेडिकल इमरजेंसी, शादी-ब्याह, बच्चों की पढ़ाई, पुराने कर्ज चुकाने या कई महंगे लोन को एक जगह जोड़ने के लिए करते हैं।

हालांकि, आसान से मिलने का मतलब यह नहीं है कि बिना सोचे-समझे लोन ले लिया जाए। कुछ गलतियां आपको बाद में परेशानी में डाल सकती हैं।


सैलरी वाले पर्सनल लोन में क्या जोखिम हैं?

ऐसे लोन में कई बार सिर्फ ब्याज ही नहीं, बल्कि प्रोसेसिंग फीस और दूसरे चार्ज भी जुड़ जाते हैं। इससे लोन की कुल लागत बढ़ सकती है। आसान मंजूरी मिलने की वजह से कुछ लोग जरूरत से ज्यादा रकम उधार ले लेते हैं। इससे बाद में EMI का बोझ बढ़ जाता है।

इसके अलावा अगर आप लंबी अवधि का लोन चुनते हैं, तो मंथली EMI कम जरूर हो सकती है, लेकिन कुल ब्याज ज्यादा देना पड़ सकता है। समय पर EMI नहीं चुकाने पर क्रेडिट स्कोर खराब हो सकता है। इसका असर भविष्य में होम लोन, कार लोन या क्रेडिट कार्ड मिलने पर भी पड़ सकता है।

समझदारी से लोन लेने के 5 तरीके

1. सिर्फ जरूरत भर का लोन लें

कई बार लोग जितना लोन मिल सकता है, उतना ले लेते हैं। लेकिन सही तरीका यह है कि सिर्फ उतनी ही रकम लें, जिसकी वास्तव में जरूरत हो।

ज्यादा लोन का मतलब ज्यादा EMI और ज्यादा ब्याज है। इसलिए पहले जरूरत का सही आकलन करें और फिर लोन लें।

2. EMI चुकाने की क्षमता जरूर देखें

लोन लेना आसान है, लेकिन हर महीने EMI भरना उतना आसान नहीं होता।

नया लोन लेने से पहले यह जरूर देखें कि आपकी सैलरी का कितना हिस्सा EMI में जाएगा। अगर पहले से कोई लोन चल रहा है, तो उसका भी ध्यान रखें। ऐसी EMI चुनें जिसे आप आराम से चुका सकें।

3. अलग-अलग बैंकों की तुलना करें

लोन लेने से पहले सिर्फ ब्याज दर ही नहीं, बल्कि प्रोसेसिंग फीस, दूसरे चार्ज और लोन की शर्तों की भी तुलना करें।

कई बार कम ब्याज वाला लोन दूसरे चार्ज की वजह से महंगा पड़ सकता है। इसलिए पूरी लागत समझने के बाद ही फैसला लें।

4. अच्छा क्रेडिट स्कोर बनाए रखें

क्रेडिट स्कोर जितना अच्छा होगा, भविष्य में उतनी ही आसानी से लोन मिल सकता है। 750 या उससे ज्यादा का क्रेडिट स्कोर आमतौर पर अच्छा माना जाता है।

इसके लिए EMI और क्रेडिट कार्ड बिल हमेशा समय पर चुकाएं। लोन या कार्ड पेमेंट में देरी करने से क्रेडिट स्कोर पर नेगेटिव असर पड़ता है।

5. लोन का इस्तेमाल सही काम में करें

लोन की रकम का इस्तेमाल सोच-समझकर करें। महंगे गैजेट, लग्जरी शॉपिंग या गैर-जरूरी खर्चों के लिए बार-बार लोन लेना सही नहीं माना जाता।

कोशिश करें कि लोन का इस्तेमाल किसी जरूरी जरूरत, इमरजेंसी या ऐसे काम में हो जो आपकी वित्तीय स्थिति को बेहतर बनाने में मदद करे।

लोन लेते समय जल्दबाजी न करें

सैलरी पर मिलने वाला पर्सनल लोन जरूरत के समय काफी मददगार साबित हो सकता है। लेकिन लोन लेने से पहले उसकी लागत, EMI, ब्याज और अपनी चुकाने की क्षमता को अच्छी तरह समझ लेना जरूरी है।

अगर सही योजना और अनुशासन के साथ लोन लिया जाए, तो यह आपके वित्तीय लक्ष्यों को पूरा करने में मदद कर सकता है। वहीं बिना योजना के लिया गया लोन लंबे समय तक आर्थिक दबाव बढ़ा सकता है।

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