Petrol Diesel Price: पेट्रोल पर ₹18 और डीजल पर ₹25 का नुकसान... जानिए कितना बढ़ सकता है दाम

Petrol Diesel Price: कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और अमेरिका-ईरान तनाव के बीच पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने की आशंका तेज हो गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक तेल कंपनियां भारी नुकसान झेल रही हैं। जानिए सरकार कीमतों में कितनी बढ़ोतरी कर सकती है।

अपडेटेड May 11, 2026 पर 8:55 PM
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सरकारी तेल कंपनियां पेट्रोल पर करीब 18 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर लगभग 25 रुपये प्रति लीटर तक का नुकसान झेल रही हैं।

Petrol Diesel Price: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी हालिया अपील में लोगों से पेट्रोल और डीजल का इस्तेमाल कम करने को कहा था। इसे अब पेट्रोल-डीजल की कीमतों में संभावित बढ़ोतरी से जोड़कर देखी जा रही है। सूत्रों के मुताबिक अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के कारण सरकार फ्यूल प्राइस पर गंभीर चर्चा कर रही है।

सूत्रों का कहना है कि वित्त मंत्रालय, पेट्रोलियम मंत्रालय और सरकारी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों यानी OMCs के बीच लगातार बातचीत चल रही है। कीमतें कब बढ़ेंगी और कितनी बढ़ेंगी, यह काफी हद तक वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों और सरकार की रणनीति पर निर्भर करेगा। सरकार के सामने महंगाई, सरकारी खर्च और ऊर्जा कीमतों के बीच संतुलन बनाने की चुनौती है।

OMCs पर बढ़ रहा है भारी दबाव


पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने 10 मई को LinkedIn पोस्ट में कहा कि इस तिमाही में सरकारी तेल कंपनियों यानी OMCs की अंडर रिकवरी 2 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है। वहीं अनुमानित नुकसान करीब 1 लाख करोड़ रुपये बताया गया है।

पुरी के मुताबिक पश्चिम एशिया संकट के कारण सरकारी तेल कंपनियां महंगे दाम पर कच्चा तेल, गैस और LPG खरीद रही हैं। लेकिन उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए पेट्रोल, डीजल और LPG कम कीमत पर बेचे जा रहे हैं। इससे कंपनियों को हर दिन करीब 1000 करोड़ रुपये तक का नुकसान हो रहा है।

कितना बढ़ सकता है पेट्रोल-डीजल का दाम

एक अनुमान के मुताबिक, मौजूदा समय में सरकारी तेल कंपनियां पेट्रोल पर करीब 18 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर लगभग 25 रुपये प्रति लीटर तक का नुकसान झेल रही हैं। यानी अगर सरकार पेट्रोल की कीमत में 18 रुपये और डीजल में 25 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी करती है, तो BPCL और HPCL जैसी कंपनियों की अंडर रिकवरी लगभग खत्म हो सकती है।

इंडिया टुडे ने अपनी एक रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया कि सरकार पेट्रोल और डीजल के दाम में एकमुश्त इजाफे से बचेगी, क्योंकि इससे अचानक महंगाई का खतरा भी बढ़ जाएगा। ऐसे में शुरुआत में पेट्रोल और डीजल के दाम 4 से 5 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ सकते हैं। वहीं LPG सिलेंडर की कीमत में 40 से 50 रुपये तक की बढ़ोतरी मानी जा रही है।

अमेरिका-ईरान तनाव से क्यों बढ़ी चिंता

अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष अब तीसरे महीने में पहुंच चुका है। 10 मई को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के शांति प्रस्ताव को 'पूरी तरह अस्वीकार्य' बताया, जिससे युद्ध खत्म होने की उम्मीदों को बड़ा झटका लगा।

Petroleum Planning and Analysis Cell के डेटा के मुताबिक मई में भारत के लिए कच्चे तेल की औसत आयात कीमत बढ़कर 104.68 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई है। फरवरी में यह कीमत 69.01 डॉलर प्रति बैरल थी। यानी कुछ ही महीनों में तेल काफी महंगा हो गया है।

28 फरवरी को जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर हमला किया था, तब Brent Crude करीब 72.50 डॉलर प्रति बैरल पर था। 11 मई तक यह बढ़कर 105 डॉलर तक पहुंच गया। संघर्ष तेज होने के दौरान कीमतें 120 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर भी चली गई थीं।

भारत के लिए कितना बड़ा खतरा

Grant Thornton Bharat के ऑयल एंड गैस पार्टनर सौरव मित्रा का कहना है कि अगर कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक 65-70 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी रहती हैं, तो कीमत बढ़ाना लगभग तय है। भारत में पेट्रोल और डीजल की रिटेल कीमतें अप्रैल 2022 से लगभग स्थिर बनी हुई हैं। इससे OMCs के मार्जिन पर दबाव बढ़ गया है और कंपनियों की बैलेंस शीट प्रभावित हो रही है।

विश्लेषकों का कहना है कि भारत ने अलग अलग देशों से तेल खरीदकर सप्लाई का जोखिम कुछ हद तक कम किया है। लेकिन भारत अब भी बड़े पैमाने पर तेल आयात पर निर्भर है और Strait of Hormuz जैसे अहम समुद्री रास्ते पर भी उसकी निर्भरता काफी ज्यादा है। यह मार्ग 28 फरवरी से प्रभावित बना हुआ है।

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