PM मोदी ने पहने शुजाउद्दौला की वंशज के बनाए कपड़े, रॉयल फैमिली की अस्मा हुसैन ने बनाई फैशन की दुनिया में अलग पहचान

अस्मा हुसैन देश के फेमस भारतीय फैशन डिजाइनरों में से एक हैं जो अवध के शाही परिवार से हैं। अस्मा हुसैन शुजा-उद-दौला की वंशज हैं। उन्होंने 1994 में अपना पहला कलेक्शन शोकेस किया और उत्तर प्रदेश में अस्मा हुसैन इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी (AIFT) की शुरुआत की

अपडेटेड Feb 08, 2024 पर 2:41 PM
अस्मा हुसैन देश के फेमस भारतीय फैशन डिजाइनरों में से एक हैं जो अवध के शाही परिवार से हैं।

अस्मा हुसैन देश के फेमस भारतीय फैशन डिजाइनरों में से एक हैं जो अवध के शाही परिवार से हैं। अस्मा हुसैन शुजाउद्दौला की वंशज हैं। उन्होंने 1994 में अपना पहला कलेक्शन शोकेस किया और उत्तर प्रदेश में अस्मा हुसैन इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी (AIFT) की शुरुआत की। हालांकि, वह अपनी शाही विरासत के लिए जाने जाने के बजाय अपने काम के लिए भी जानी जाती हैं क्योंकि उनके बनाए कपड़े प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, शबाना आजमी, सायरा बानो उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पहन चुके हैं।

देश के प्रधानमंत्री पहन चुके हैं उनके बनाए कपड़े

अस्मा हुसैन देश के जाने माने लोगों को अपने बनाए कपड़े पहना चुकी है। उनकी क्लाइंट की लिस्ट में बॉलीवुड की गुजरे जमाने की अभिनेत्री सायरा बानो, किरण खेर, शबाना आजमी और यहां तक कि भारत के प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जैसी कई प्रसिद्ध हस्तियां शामिल है। रिपोर्ट्स के मुताबिक 1996 में उनके फैशन हाउस का उद्घाटन उस समय के मशहूर बॉलीवुड स्टार देव आनंद ने किया था।


अपनी मां को कपड़े सिलते देख जागा शौक

अस्मा हुसैन इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी को भारत सरकार की राष्ट्रीय व्यावसायिक प्रशिक्षण परिषद से मान्यता मिली हुई है। अस्मा हुसैन ने एक बार एक इंटरव्यू में खुलासा किया था कि वह अपनी मां को कपड़े सिलते हुए देखकर बड़ी हुई हैं। 6 साल की उम्र में उन्होंने सिलाई मशीनें चलाना सीख लिया। उन्होंने दावा किया कि यही वजह है कि उन्हें कपड़े सिलने का शौक हो गया और उम्र के साथ उनकी रुचि आदत में बदल गई।

देश के आर्टवर्क को करीब से जाना

अस्मा हुसैन ने आगे दावा किया कि वह 1993 में डॉक्टर का पेशा बीच में छोड़कर लखनऊ आ गईं और डिजाइनर बनने के अपने सपने पर ध्यान लगाया। उन्होंने लखनऊ में एक फैशन डिजाइनर के रूप में काम करना शुरू किया और अपनी कला के साथ शहर की खोई हुई संस्कृति और विरासत को वापस लाने की उनकी खोज शुरू हुई। उन्होंने कहा कि जब वह लखनऊ आईं तो ऐसे कारीगर मिलना मुश्किल था जो बारीक काम कर सकें। उन्होंने आर्टवर्क को जानने के लिए देश के अलग-अलग कोनों का दौरा किया। उन्होंने हाथ से किया जाने वाल काम भी सीखा।

खोला अपना इंस्टीट्यूट

1995 के बाद उनके जीवन में एक नया मोड़ आया क्योंकि अपने दोस्तों की सलाह पर उन्होंने हजरतगंज में अस्मा हुसैन इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी को शुरू किया और यहां तक कि वह पढ़ाना भी शुरू कर दिया जो उन्हें सबसे ज्यादा पसंद था।

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