PM RAHAT Scheme: ‘गोल्डन आवर’ यानी सड़क हादसे के बाद का पहला एक घंटा जान बचाने के लिए सबसे अहम माना जाता है। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने हाल ही में PM RAHAT (रोड एक्सीडेंट विक्टिम हॉस्पिटलाइजेशन एंड एश्योर्ड ट्रीटमेंट) स्कीम शुरू की है।
PM RAHAT Scheme: ‘गोल्डन आवर’ यानी सड़क हादसे के बाद का पहला एक घंटा जान बचाने के लिए सबसे अहम माना जाता है। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने हाल ही में PM RAHAT (रोड एक्सीडेंट विक्टिम हॉस्पिटलाइजेशन एंड एश्योर्ड ट्रीटमेंट) स्कीम शुरू की है।
इस योजना के तहत हर सड़क दुर्घटना पीड़ित को ₹1.5 लाख तक का कैशलेस इलाज मिलेगा। योजना पिछले सप्ताह लॉन्च की गई और इसमें हादसे की तारीख से 7 दिनों तक इलाज की गारंटी दी गई है। इसका मकसद है कि पैसे की कमी के कारण किसी भी घायल को अस्पताल से लौटाया न जाए।
प्रधानमंत्री कार्यालय के नए भवन ‘सेवा तीर्थ’ में शिफ्ट होने के बाद इस योजना को प्रधानमंत्री की पहली मंजूरी मिली। इसे समय पर इलाज और अस्पतालों को तय समय में भुगतान सुनिश्चित करने वाली नागरिक केंद्रित पहल के रूप में देखा जा रहा है।
कौन उठा सकता है योजना का लाभ?
PM RAHAT योजना के तहत किसी भी तरह की सड़क - हाईवे, शहर की सड़क या ग्रामीण मार्ग पर हुए हादसे का हर पात्र पीड़ित कैशलेस इलाज का हकदार होगा।
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के मुताबिक भारत में हर साल बड़ी संख्या में सड़क हादसों में मौतें होती हैं। मंत्रालय का कहना है, 'करीब 50% सड़क दुर्घटना मौतों को टाला जा सकता है, अगर पीड़ित को पहले एक घंटे में अस्पताल में भर्ती करा दिया जाए।'
योजना को इमरजेंसी रिस्पॉन्स सपोर्ट सिस्टम यानी 112 हेल्पलाइन से जोड़ा गया है। दुर्घटना पीड़ित, राह वीर (Good Samaritans) या मौके पर मौजूद कोई भी व्यक्ति 112 पर कॉल कर नजदीकी नामित अस्पताल की जानकारी ले सकता है और एंबुलेंस बुला सकता है। यह जानकारी मंत्रालय ने PIB रिलीज में दी है।
₹1.5 लाख की सुविधा में क्या-क्या शामिल है?
PM RAHAT योजना के तहत प्रति पीड़ित ₹1.5 लाख तक का कैशलेस इलाज मिलेगा और यह सुविधा हादसे की तारीख से 7 दिन तक लागू रहेगी। योजना का फोकस साफ तौर पर गोल्डन आवर में जिंदगी बचाने वाला इलाज तय करना है, ताकि अस्पताल में तुरंत भर्ती से मौत का खतरा कम किया जा सके।
अगर मामला जानलेवा नहीं है तो 24 घंटे तक स्टेबलाइजेशन ट्रीटमेंट दिया जाएगा। अगर स्थिति गंभीर या जानलेवा है तो 48 घंटे तक इलाज की सुविधा रहेगी। इलाज से पहले और दौरान की पूरी प्रक्रिया एकीकृत डिजिटल सिस्टम पर पुलिस सत्यापन के अधीन होगी।
कैशलेस क्लेम की प्रक्रिया कैसे चलेगी?
PM RAHAT योजना पूरी तरह तकनीक आधारित सिस्टम पर चलेगी। इसमें सड़क परिवहन मंत्रालय का इलेक्ट्रॉनिक डिटेल्ड एक्सीडेंट रिपोर्ट (eDAR) प्लेटफॉर्म और राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण का ट्रांजैक्शन मैनेजमेंट सिस्टम (TMS 2.0) आपस में जुड़े हुए हैं।
इस डिजिटल इंटीग्रेशन के जरिए हादसे की रिपोर्ट दर्ज होने से लेकर अस्पताल में भर्ती, पुलिस सत्यापन, इलाज, क्लेम प्रोसेसिंग और अंतिम भुगतान तक की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन ट्रैक की जाएगी। गैर-जानलेवा मामलों में पुलिस को 24 घंटे के भीतर और जानलेवा मामलों में 48 घंटे के भीतर पुष्टि करनी होगी।
अस्पतालों को भुगतान मोटर व्हीकल एक्सीडेंट फंड (MVAF) से किया जाएगा। अगर मामला बीमित है तो राशि जनरल इंश्योरेंस कंपनियों के योगदान से दी जाएगी। अगर मामला बिना बीमा या हिट एंड रन का है तो भुगतान केंद्र सरकार के बजटीय प्रावधान से होगा।
मंत्रालय के अनुसार, राज्य स्वास्थ्य एजेंसी द्वारा मंजूरी मिलने के बाद क्लेम का भुगतान 10 दिनों के भीतर कर दिया जाएगा, ताकि अस्पतालों को वित्तीय अनिश्चितता का सामना न करना पड़े और इलाज बाधित न हो।
शिकायत होने पर क्या होगा?
अगर किसी सड़क दुर्घटना पीड़ित को योजना से जुड़ी कोई समस्या होती है तो उसकी शिकायत जिला सड़क सुरक्षा समिति द्वारा नामित शिकायत निवारण अधिकारी देखेंगे। यह समिति जिला कलेक्टर, जिला मजिस्ट्रेट या डिप्टी कमिश्नर की अध्यक्षता में काम करती है।
₹1.5 लाख तक का कैशलेस इलाज इस योजना की सबसे बड़ी खासियत है। डिजिटल सिस्टम के जरिए तय समय में सत्यापन किया जाएगा। अस्पतालों को भुगतान भी समयबद्ध तरीके से मिलेगा। PM RAHAT योजना का मकसद भारत की आपातकालीन स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करना है। कोशिश यह है कि हादसे के बाद इलाज में देरी न हो। पैसों की कमी किसी की जान पर भारी न पड़े।
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