ईपीएफओ ने ईपीएस पेंशनर्स के लिए एक क्रांतिकारी कदम उठाया है। अब पेंशन लेने वालों को बैंक या ईपीएफओ कार्यालय के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक (आईपीपीबी) के साथ मिलकर मुफ्त डोरस्टेप डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट (डीएलसी) सेवा शुरू की गई है। यह सुविधा खासकर बुजुर्गों और ग्रामीण इलाकों के पेंशनर्स के लिए वरदान साबित होगी, जो स्मार्टफोन इस्तेमाल करने में असमर्थ हैं।
पोस्टमैन या डाकसेवक सीधे पेंशनर के घर पहुंचेंगे। पहले वे पेंशन पेमेंट ऑर्डर (पीपीओ) और आधार की डिटेल्स मैच करेंगे। फिर फेस ऑथेंटिकेशन टेक्नोलॉजी (एफएटी) से डीएलसी जेनरेट करेंगे। अगर फेस काम न करे, तो बायोमेट्रिक फिंगरप्रिंट का सहारा लेंगे। सफल होने पर पेंशनर को एसएमएस मिलेगा और डीएलसी जीवनप्रमाण पोर्टल पर उपलब्ध हो जाएगी। यह पूरी प्रक्रिया मुफ्त है, क्योंकि खर्च ईपीएफओ की ओर से वहन किया जा रहा है। पेंशनर चाहें तो आईपीपीबी कस्टमर केयर (033-22029000) पर कॉल कर घर आने की रिक्वेस्ट कर सकते हैं।
ईपीएफओ ने निर्देश जारी किए हैं कि 5 साल से ज्यादा लटके डीएलसी वाले मामलों को सबसे पहले निपटाया जाए। उसके बाद 2-5 साल पुराने केस जांचे जाएंगे। लक्ष्य मार्च 2026 तक सभी लंबित केस क्लियर करना है। अगर डाकसेवक को पेंशनर की मृत्यु का पता चले, तो तुरंत रिपोर्ट करेंगे। इससे अगले लाभार्थी को पेंशन शुरू हो सकेगी या पीपीओ बंद हो जाएगा। जोनल ऑफिसेस को प्रगति की निगरानी करने को कहा गया है।
ईपीएफओ ने स्मार्टफोन वाले पेंशनर्स को जीवनप्रमाण या उमंग ऐप से खुद डीएलसी बनाने की सलाह दी है। जो मुश्किल महसूस करें, वे इस फ्री सेवा का लाभ लें। 2020 से चल रही यह योजना अब मुफ्त हो गई है। इससे लाखों पेंशनर्स को आसानी होगी और पेंशन में कोई रुकावट नहीं आएगी। ईपीएफओ का यह प्रयास डिजिटल इंडिया को मजबूत बनाते हुए बुजुर्गों की चिंता कम कर रहा है।
EPFO का कहना है कि इस पहल से न केवल बुजुर्गों को राहत मिलेगी बल्कि लंबे समय से लंबित DLC मामलों को मार्च 2026 तक निपटाने का लक्ष्य भी पूरा किया जा सकेगा। इस सेवा का लाभ उठाने के लिए पेंशनर्स को IPPB के मोबाइल ऐप या टोल-फ्री नंबर के जरिए स्लॉट बुक करना होगा। इसके बाद निर्धारित समय पर पोस्टमैन उनके घर पहुंचकर आधार-बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन के जरिए डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट जनरेट करेंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम पेंशनर्स के लिए ‘ईज ऑफ लिविंग’ की दिशा में बड़ा बदलाव है। इससे न केवल बुजुर्गों की परेशानी कम होगी बल्कि डिजिटल सेवाओं पर उनका भरोसा भी बढ़ेगा। EPFO और IPPB की यह संयुक्त पहल पेंशनर्स के लिए एक मानवीय और सुविधाजनक समाधान है, जो उन्हें सम्मानजनक तरीके से अपनी पेंशन जारी रखने में मदद करेगी।