Property Market : नोएडा के पास जेवर में बने नोएडा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे (Noida International Airport) का उद्घाटन 28 मार्च को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे। हालांकि फ्लाइट शुरू होने में अभी थोड़ा वक्त है,लेकिन एयरपोर्ट बनने से ही आसपास के इलाकों में प्रॉपर्टी की कीमतें आसमान छूने लगी हैं। यह दिल्ली एनसीआर का दूसरा और नोएडा का पहला एयरपोर्ट। यहां एक कार्गो विलेज भी बनाया गया है। एयरपोर्ट के आसपास के खेतों में अब फाइव स्टार होटल,मॉल,वेयरहाउस और ऑफिस स्पेस बनाने की तैयारी है। जेवर गांव अब अर्बन सेंटर बनेगा। यहां रेजिडेंशियल अपार्टमेंट की कीमत दोगुनी तो प्लॉट की कीमत 5 गुनी हो गई है।
2020 में जहां इस क्षेत्र में एक रेजिडेंशियल अपार्टमेंट औसत कीमत ₹4,000–5,000 प्रति स्क्वायर फिट के आसपास थी, वहीं इस वक्त इसकी कीमत 10000 रुपए प्रति स्क्वायर फिट हो गई है। यानी, कीमतों में करीब 100 फीसदी तक उछाल आया है। इस इलाके में प्लॉट 5 साल पहले ₹30,000 प्रति स्क्वायर यार्ड पर मिल रहे थे जो अब बढ़ कर 1.5 लाख रूपये प्रति प्रति स्क्वायर यार्ड हो गए हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है ये सिर्फ शुरुआत है। एयरपोर्ट चालू होने के बाद कीमतें और बढ़ेंगी।
अनुमान है कि इस क्षेत्र में ऑफिस स्पेस की सालाना मांग 2–3 मिलियन स्क्वायर फीट तक पहुंच सकती है। पिछले कुछ महीनों में यहां प्रॉपर्टी डीलिंग का काम तेजी से बढ़ा है। निवेशकों ने एयरपोर्ट शुरू होने से पहले ही बड़ी मात्रा में निवेश कर दिया है। जिसकी वजह से कीमतें पहले ही काफी बढ़ चुकी हैं। एक प्रॉपर्टी डीलर नीरज कौशिक ने कहा कि 40 फीसदी गांव की जमीन बाहर वाले खरीद रहे हैं। बहुत डिमांड है।
शानदार कनेक्टिविटी ने बढ़ाया आकर्षण
इस ग्रोथ की सबसे बड़ी वजह है शानदार कनेक्टिविटी। इस इलाके की यमुना एक्सप्रेसवे से सीधी कनेक्टिविटी है। जेवर-फरीदाबाद के 31 KM ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे को मंजूरी मिल चुकी है और गंगा एक्सप्रेसवे से भी कनेक्शन की योजना है।
बता दें कि आज से 25 साल पहले 2001 में उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री राजनाथ सिंह की ओर से जेवर में ग्रीनफील्ड इंटरनेशनल और एविएशन हब (टीआईएएच) का प्रस्ताव पेश किया था। साल 2014 और इसी साल इस योजना को नई उड़ान मिली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 26 नवंबर 2021 को यूपी में जेवर के पास नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट की नींव रखी और करीब साढ़े 4 साल बाद एयरपोर्ट के पहले चरण का काम पूरा हुआ। जब यह एयरपोर्ट पूरी तरह से बन जाएगा तब यह एशिया का सबसे बड़ा एयरपोर्ट बन जाएगा। इसके ऑपरेशनल होने से दिल्ली हवाई अड्डे पर यातायात का बोझ कम होगा।