Property Transfer: भारत में अक्सर लोग सोचते हैं कि प्रॉपर्टी का म्यूटेशन (Mutation) करा देने से मालिकाना हक मिल जाता है। लेकिन यही सबसे बड़ी गलती साबित हो सकती है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि म्यूटेशन सिर्फ सरकारी रिकॉर्ड अपडेट करने की प्रक्रिया है, इससे असली मालिकाना हक ट्रांसफर नहीं होता।
म्यूटेशन क्या है और क्या नहीं है?
म्यूटेशन का मतलब है जमीन या मकान का नाम नगर निगम या राजस्व रिकॉर्ड में अपडेट करना, ताकि प्रॉपर्टी टैक्स सही व्यक्ति से लिया जा सके। लेकिन यह सिर्फ एक मैनेजिरियल प्रोसेस है। इसका मालिकाना हक से कोई सीधा संबंध नहीं होता। यानी सिर्फ म्यूटेशन के आधार पर आप खुद को कानूनी मालिक साबित नहीं कर सकते।
फिर असली मालिकाना हक कैसे मिलता है?
अगर पिता अपनी प्रॉपर्टी बच्चों को देना चाहते हैं, तो इसके लिए कुछ कानूनी डॉक्यूमेंट जरूरी होते हैं। जैसे गिफ्ड डीड, सेल डील और वसीयत आदि।
अगर पिता अपने लाइफटाइम में प्रॉपर्टी ट्रांसफर करना चाहते हैं, तो रजिस्टर्ड गिफ्ट डीड सबसे साफ और सेफ तरीका माना जाता है। वहीं, अगर वे चाहते हैं कि प्रॉपर्टी उनकी मृत्यु के बाद बच्चों को मिले, तो वसीयत बनाई जाती है।
पैतृक संपत्ति में क्या अलग है?
अगर प्रॉपर्टी पैतृक (Ancestral) है, तो मामला और जटिल हो जाता है। इसमें सभी कानूनी वारिसों का अधिकार होता है, इसलिए बिना उनकी सहमति के ट्रांसफर नहीं किया जा सकता। ऐसे मामलों में अक्सर पार्टिशन डीड (बंटवारा) जरूरी होता है।
सिर्फ म्यूटेशन पर भरोसा करने का खतरा
अगर परिवार ने सिर्फ म्यूटेशन कराया है और कोई वैलिड डॉक्यूमेंट नहीं है, तो भविष्य में बड़ी परेशानी हो सकती है।
प्रॉपर्टी बेचते समय दिक्कत
कोर्ट केस का खतरा आदि रहता है। ऐसी स्थिति में आपके पास मालिकाना हक साबित करने के लिए मजबूत कानूनी दस्तावेज नहीं होते।
विवाद से बचने के लिए क्या करें?
पहले यह तय करें कि प्रॉपर्टी सेल्फ-अक्वायर्ड है या पैतृक।
सही तरीका चुनें - गिफ्ट डीड या वसीयत।
डॉक्यूमेंट को सही तरीके से ड्राफ्ट और रजिस्टर कराएं।
स्टांप ड्यूटी का पेमेंट करें।
पुराने कागजात और मालिकाना रिकॉर्ड सुरक्षित रखें। इन सभी प्रक्रियाओं के बाद ही म्यूटेशन कराना चाहिए, ताकि सरकारी रिकॉर्ड अपडेट हो सके।