सरकार घर खरीदने वालों पर मेहरबान होती हुई नजर आ रही है। घर खरीदारों को बिल्डरों द्वारा परेशान न किया जा सके। इसके लिए समय -समय पर सराकर द्वारा गाइडलाइंस जारी होती रहती है। अब सरकार टैक्स के मामले में घर खरीदारों के पक्ष में आती हुई दिख रही है। यानी की घर खरीदारों से ली जाने वाली जीएसटी सरकार वापस करने का मन बना रही है। इसके तहत अब अंडर कंस्ट्रक्शन प्रॉपर्टी रद्द करने पर घर खरीदारों को GST रिफंड मिलेगा। पहले अंडरकंस्ट्रक्शन प्रॉपर्टी रद्द करने के बाद भी खरीदार को इसके लिए भरी गई जीएसटी रकम वापस नहीं मिल पाती थी। इसके लिए वित्त मंत्रालय जल्द गाइडलाइन्स जारी करेगा।
इस खबर पर ज्यादा डिटेल बताते हुए सीएनबीसी-आवाज़ के लक्ष्मण रॉय ने कहा कि सरकार घर खरीदारों को बड़ी राहत देने जा रही है। इसके तहत अंडर कंस्ट्रक्शन प्रॉपर्टी रद्द करने पर खरीदारों को GST रिफंड मिलेगा। वित्त मंत्रालय जल्द ही इससे संबंधित गाइडलाइन जारी करेगा। इसे सरकार की तरफ से घर खरीदारों के लिए बड़ी राहत देने वाला कदम माना जा रहा है।
लक्ष्मण ने आगे कहा कि इसमें GST काउंसिल के नियम बदलने का असर दिखाई देगा। नई गाइडलाइंस के तहत घर रजिस्टर्ड नहीं होने पर घर खरीदार को जीएसटी रिफंड मिलेगा। इसके लिए खरीदार को बिल्डर के ऑफिस के चक्कर नहीं काटने होंगे। घर खरीदार को सीधे सरकार से जीएसडी रिफंड मिलेगा। फिलहाल जो व्यवस्था है उसमें अभी क्रेडिट नोट जारी करने की अवधि के बाद रिफंड नहीं मिलता है।
जीएसटी कानून 2017 के एक प्रावधान में बदलाव का होगा असर
लक्ष्मण ने इसे विस्तार से बताते हुए कहा कि जीएसटी काउंसिल की पिछले बैठक में एक महत्वपूर्ण फैसला ये लिया गया कि जीएसटी कानून 2017 के एक प्रावधान में बदलाव किया जायेगा। इस बदलाव के तहत ये प्रावधान किया जायेगा कि यदि अंडर कंस्ट्रक्शन प्रॉपर्टी कोई खरीद रहा है और रजिस्ट्री से पहले उस प्रॉपर्टी को कैंसल कर देता है तो खरीदार की तरफ से जो जीएसटी चुकाया जाता है। उसको रिफंड कर दिया जायेगा।
जब कोई घर खरीदार बिल्डर से घर खरीदने के लिए बिल्डर को भुगतान करता है। उस समय उसे जीएसटी का भी भुगतान करना होता है। लेकिन रजिस्ट्री से पहले सौदा रद्द होने पर बिल्डर घर खरीदारों को अपनी शर्तों पर पैसे लौटा देता है। परंतु जीएसटी भुगतान के पैसे वह नहीं देता था और खरीदारी के जीएसटी के पैसे डूब जाया करते थे। लेकिन अब नई गाइडलाइंस जारी होने पर उन्हें जीएसटी रिफंड सीधे वित्त मंत्रालय से मिलेगा।