MC Exclusive: DLF नोएडा में दूसरे डेटा सेंटर पर काम शुरू करेगी, करीब 135 करोड़ रुपये का निवेश होगा

को-वर्किंग, को-लिविंग और वेयरहाउसिंग जैसे सेगमेंट शुरू होने के बाद डेटा सेंटर एक एसेट क्लास के रूप में उभर रहा है। इंडिया में सरकार कंपनियों पर इंडियन सिटीजंस के डेटा इंडिया में ही स्टोर करने पर जोर दे रही है। इससे रियल एस्टेट कंपनियां अपने पोर्टफोलियो में डेटा सेंटर शामिल कर रही हैं

अपडेटेड Sep 12, 2022 पर 5:49 PM
इस साल जून मे उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य में चार डेटा सेंटर बनाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। इस पर 15,950 करोड़ रुपये का निवेश होगा।

DLF नोएडा में दूसरा डेटा सेंटर (date centre) बनाएगी। इसे पहले ही सिंगापुर की ST Telemedia Global Data Centres को लीज पर दिया जा चुका है। डीएलएफ इंडिया की सबसे बड़ी लिस्टेड रियल एस्टेट कंपनी है।

डीएलएफ इस डेटा सेंटर को बनाने पर करीब 135 करोड़ रुपये निवेश करेगा। डीएलएफ के मैनेजिंग डायरेक्टर (रेंटल बिजनेस) श्रीराम खट्टर ने मनीकंट्रोल को बताया कि यह डेटा सेंटर 3,64,000 वर्ग फीट में फैला होगा। उन्होंने कहा कि इसका कंस्ट्रक्शन 8-10 हफ्तों में शुरू हो जाने की उम्मीद है। यह दो साल में बनकर तैयार हो जाएगा।

DLF ने 2020 में नोएडा मार्केट में एक डेटा सेंटर और एक आईटी पार्क के साथ वापसी की थी। ये सेक्टर 143 में नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे पर स्थित हैं। डीएलएफ ने प्रस्तावित नोएडा आईटी पार्क में करीब 3,60,000 वर्ग फीट ST Telemedia को 2020 में लीज पर दिया था। इसे दोगुना करने का विकल्प था।


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पहले डेटा सेंटर को बनाने पर करीब 130 करोड़ रुपये की लागत आई थी। डीएलएफ को इसका ऑक्युपेंसी सर्टिफिकेट जल्द मिल जाने की उम्मीद है। खट्टर ने कहा कि ST Telemedia ने उनके लिए एक दूसरा डेटा सेंटर बनाने के लिए हमसे संपर्क किया था।

डीएलएफ ने अप्रैल में कहा था कि वह नोएडा में 37 लाख वर्ग फीट में ऑफिस स्पेस और एक डेटा सेंटर बनाने के लिए करीब 1,700 करोड़ रुपये इनवेस्ट करेगी। डीएलएफ ने नोएडा में बन रहे आईटी पार्क का 50 फीसदी से ज्यादा पहले ही लीज पर दे चुकी है।

खट्टर ने कहा कि इस प्रोजेक्ट में दो ऑफि टावर्स का भी प्लान बनाया है। इसका 50 फीसदी स्पेस पहले ही लीज पर दिया जा चुका है। उन्होंने कहा, "यह 25 एकड़ी की एक बड़ी फैसिलिटी है। हमने एक डेटा सेंटर को पूरा कर लिया है। हम जल्द एक ऑफिस टावर पूरा करने जा रहे हैं। यह करीब 4,15,000 वर्ग फीट का है। इसमें से 2,90,000 वर्ग फीट पहले ही लीज पर दिया जा चुका है।"

उन्होंने कहा कि हम अगले तीन महीने में इसे पूरा कर लेंगे और हमें ऑक्युपेंसी सर्टिफिकेट मिल जाएगा। उम्मीद है कि लीज पर स्पेस लेने वाली कंपनियां जैसे ही ऑक्युपेंसी सर्टिफिकेट मिल जाएगा, यहां आ जाएंगी। दूसरा टावर अभी प्लानिंग स्टेज में है।

खट्टर ने कहा, "अभी हमने दूसरे टावर पर कंस्ट्रक्शन शुरू करने के समय के बारे में फैसला नहीं किया है। इस टावर के लिए अब तक करीब 140-150 करोड़ रुपये का निवेश हुआ है।"

को-वर्किंग, को-लिविंग और वेयरहाउसिंग जैसे सेगमेंट शुरू होने के बाद डेटा सेंटर एक एसेट क्लास के रूप में उभर रहा है। इंडिया में सरकार कंपनियों पर इंडियन सिटीजंस के डेटा इंडिया में ही स्टोर करने पर जोर दे रही है। इससे रियल एस्टेट कंपनियां अपने पोर्टफोलियो में डेटा सेंटर शामिल कर रही हैं।

इस साल जून मे उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य में चार डेटा सेंटर बनाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। इस पर 15,950 करोड़ रुपये का निवेश होगा। यूपी सरकार ने कहा है कि इससे 4,000 नौकरियों के मौके पैदा होंगे। यूपी सरकार की डेटा सेंटर पॉलिसी में कैपिटल सब्सिडी, इंटरेस्ट सबवेंशन, स्टैंप ड्यूटी एग्जेम्प्शन और दूसरे तरह की इनसेंटिव शामिल हैं।

ग्रेटर नोएडा में डेटा सेंटर में करीब 8,000 करोड़ रुपये का निवेश होने वाला है। इसमें 7,000 करोड़ रुपये का निवेश हीरानंदानी ग्रुप की योटा इंफ्रास्ट्रक्चर करेगी। 1000 करोड़ रुपये का निवेश जापान की एनटीटी ग्लोबल करेगी।

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