Noida: प्लॉट का पोजेशन नहीं तो लीज रेंट नहीं! इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नोएडा को लगाई फटकार

नोएडा में प्लॉट खरीदारों के लिए राहत की खबर है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक अहम फैसला सुनाया। कोर्ट ने कहा कि जब तक प्लॉट का अलग से पोजेशन सर्टिफिकेट नहीं दिया जाता, तब तक NOIDA लीज रेंट नहीं वसूल सकता। यह फैसला प्लॉट खरीदारों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है

अपडेटेड Feb 20, 2026 पर 1:14 PM
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कोर्ट ने कहा कि जब तक प्लॉट का अलग से पोजेशन सर्टिफिकेट नहीं दिया जाता, तब तक NOIDA लीज रेंट नहीं वसूल सकता।

नोएडा में प्लॉट खरीदारों के लिए राहत की खबर है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक अहम फैसला सुनाया। कोर्ट ने कहा कि जब तक प्लॉट का अलग से पोजेशन सर्टिफिकेट नहीं दिया जाता, तब तक NOIDA लीज रेंट नहीं वसूल सकता। यह फैसला प्लॉट खरीदारों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है। ये फैसला 19 दिसंबर 2025 को सुनाया गया था।

मामला सेक्टर 94 नोएडा के एक बड़े कमर्शियल प्लॉट से जुड़ा था। यह प्लॉट पहले BPTP इंटरनेशनल ट्रेड सेंटर को दिया गया था। बाद में प्लॉट का आकार घटाया गया और लीज डीड की गई। आगे चलकर इस प्लॉट को दो हिस्सों 2A और 2B में बांटने की अनुमति NOIDA ने दी।

NOIDA ने प्लॉट को सब-डिवाइड करते समय एक शर्त रखी थी। शर्त नंबर 3 में कहा गया था कि दोनों नए प्लॉट के लिए अलग साइट प्लान, अलग सब-लीज डीड और अलग पोजेशन सर्टिफिकेट जारी किया जाएगा। लेकिन NOIDA ने प्लॉट 2A के लिए अलग से पोजेशन सर्टिफिकेट जारी नहीं किया।


इसी बीच कंपनी का नाम बदलकर विजन टाउन प्लानर्स हो गया। NOIDA ने इसे चेंज इन कॉन्स्टीट्यूशन मानते हुए 7.38 करोड़ रुपये का चार्ज मांगा। कंपनी ने यह रकम जमा भी कर दी। बाद में NOIDA ने 168.37 करोड़ रुपये का लीज रेंट बकाया बताकर प्लॉट का आवंटन कैंसिल कर दिया।

कंपनी ने कोर्ट में दलील दी कि जब अलग पोजेशन सर्टिफिकेट दिया ही नहीं गया, तो लीज रेंट कैसे लिया जा सकता है। कोर्ट ने माना कि NOIDA ने अपनी ही शर्त पूरी नहीं की। इसलिए जब तक अलग पोजेशन सर्टिफिकेट जारी नहीं हुआ, तब तक जीरो पीरियड माना जाएगा। इस पीरियड का लीज रेंट नहीं लिया जा सकता।

कोर्ट ने CIC चार्ज को भी गलत ठहराया। पहले के फैसलों का हवाला देते हुए कहा गया कि सिर्फ शेयरहोल्डिंग बदलने से कंपनी की कानूनी पहचान नहीं बदलती। इसलिए यह चार्ज अवैध है। कोर्ट ने यह भी कहा कि सरकार दो तरह की बातें नहीं कर सकती। अगर पोजेशन सर्टिफिकेट जरूरी है, तो उसके बिना रेंट नहीं लिया जा सकता।

यह फैसला आम खरीदारों के लिए भी महत्वपूर्ण है। इससे साफ होता है कि विकास प्राधिकरण अपनी शर्तों का पालन करने के लिए बाध्य हैं। अगर पोजेशन या जरूरी डॉक्यूमेंट नहीं दिए गए हैं, तो खरीदार पर आर्थिक बोझ नहीं डाला जा सकता। खरीदारों को अपने अधिकारों की जानकारी रखनी अप पहले से ज्यादा जरूरी होगा।

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