Real Estate (Regulation and Development) Act, 2016 यानी RERA छह साल पहले लागू हुआ था। इस दौरान इस एक्ट की वजह से सुप्रीम कोर्ट और दूसरे कोर्ट ने घर खरीदारों के पक्ष में कई फैसले दिए हैं। इससे पहले यह देखा गया था कि बिल्डर्स घर खरीदारों के साथ मनमानी करते थे। इससे उनकी जिंदगी भर की कमाई हाथ से जाने की नौबत आ जाती थी।
शुरुआती दो साल RERA को प्रभावी तरीके से लागू करने में बीत गए। इनमें प्रोजेक्ट्स रजिस्ट्रेशन सहित दूसरी चीजें शामिल थीं। अब रेगुलेटरी अथॉरिटीज और एपेलेट ट्राइब्यूनल्स ने अपनी ताकत दिखानी शुरू कर दी है।
ऐसे कई मामले आए हैं, जिनमें RERA की वजह से ग्राहकों को मदद मिली है। न्यूटेक प्रमोटर्स एंड डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड का मामला इसका उदाहरण है। Newtech Promoters and Developers Pvt. Ltd. vs State of UP & Others मामले में सुप्रीम कोर्ट ने फैसला दिया था कि रेगुलेटरी अथॉरिटी के पास रिफंड, इंटरेस्ट और पेनाल्टी लगाने का आदेश देने का अधिकार है।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा था कि रेगुलेटरी अथॉरिटी शिकायतें सुनने के लिए एक सिंगल मेंबर को अपने पावर डेलिगेट कर सकती है। उत्तर प्रदेश में एक दूसरे मामले में भी न्यायालय की सक्रियता देखने को मिली। घर खरीदारों के पैसे के रिफंड मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गौतम बुद्ध नगर को डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट को कोर्ट में हाजिर होने का आदेश दिया। इससे जल्द मामले का निपटारा हो गया और घर खरीदारी को अपनी मेहनत की कमाई का पैसा वापस मिल गया।
गुरुग्राम से जुड़े एक मामले में RERA ने एक रियल एस्टेट कंपनी के डायरेक्टर्स के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया। एक दूसरे मामले में रेरा ने एक रियल एस्टेट कंपनी से जुड़े सभी बैंक अकाउंट को फ्रिज करने का आदेश दिया।
RERA ने उत्तर प्रदेश से जुड़े एक दूसरे मामले में आदेश नहीं मानने पर 9 बिल्डर्स पर 1.40 करोड़ रुपये की पेनाल्टी लगाई। महाराष्ट्र में राज्य की रेरा ने एक ग्राहक को फ्लैट का पजेशन देने तक रोजाना 10,000 देने का आदेश दिया।
उपर्युक्त मामलों से पता चलता है कि RERA ने घर खरीदारों के हितों की रक्षा करने में बड़ी भूमिका निभाई है। हाल में RERA की सेंट्रल एडवायजरी काउंसिल की मीटिंग हुई। इसमें केंद्र सरकार के सीनियर अधिकारियों ने हिस्सा लिया। इससे घर खरीदारों का भरोसा बढ़ रहा है। उन्हें लग रहा है कि अब पब्लिक पॉलिसी बनाने और उससे जुड़े फैसले अब ताकतवर लॉबीज के इशारे पर होने के दिन लद चुके हैं।