Railway Ticket Cancellation Rules: रेल यात्रियों को बड़ा झटका! अब 8 घंटे पहले टिकट कैंसिल नहीं की, तो मिलेगा 'जीरो' रिफंड; जानें नए नियम

Railway Ticket Cancellation Rules: भारतीय रेलवे के नए नियमों के अनुसार, 1 अप्रैल 2026 से ट्रेन छूटने के 8 घंटे के भीतर टिकट कैंसिल करने पर अब कोई रिफंड नहीं मिलेगा। रिफंड की राशि को समय के आधार पर तीन श्रेणियों (75%, 50%, और 0%) में बांटा गया है, जिससे यात्रियों को अब अपनी यात्रा रद्द करने का फैसला बहुत पहले लेना होगा।

अपडेटेड Apr 03, 2026 पर 2:48 PM
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अगर आप अक्सर ट्रेन से सफर करते हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है। भारतीय रेलवे ने 1 अप्रैल, 2026 से टिकट कैंसिलेशन और रिफंड की अपनी नीति में आमूलचूल बदलाव कर दिया है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव द्वारा घोषित इन नए नियमों के अनुसार, अब यात्रियों को अपनी यात्रा को लेकर काफी पहले फैसला लेना होगा, वरना उनकी मेहनत की कमाई पर पानी फिर सकता है।

8 घंटे की 'डेडलाइन'

पुराने नियमों के तहत, ट्रेन छूटने से 4 घंटे पहले तक टिकट रद्द करने पर यात्रियों को कुछ न कुछ रिफंड मिल जाता था। लेकिन अब इस 'गोल्डन विंडो' को घटाकर 8 घंटे कर दिया गया है। सरल शब्दों में कहें तो, यदि आपकी ट्रेन शाम 6 बजे की है, तो आपको सुबह 10 बजे तक हर हाल में टिकट कैंसिल करना होगा। अगर आप ट्रेन रवाना होने से 7 या 5 घंटे पहले टिकट रद्द करते हैं, तो रेलवे आपको शून्य (0%) रिफंड देगा।

नए रिफंड स्लैब: कब और कितना कटेगा पैसा?


रेलवे ने समय सीमा के आधार पर रिफंड की राशि को चार मुख्य श्रेणियों में बांट दिया है:

* 72 घंटे से अधिक पहले: यदि आप यात्रा से 3 दिन पहले ही मन बना लेते हैं कि आपको नहीं जाना है, तो आपको 100% रिफंड मिलेगा। हालांकि, बेसिक कैंसिलेशन चार्ज (60 से 120 रुपये तक) अभी भी लागू रहेंगे।

* 24 से 72 घंटे के बीच: इस समय सीमा में टिकट रद्द करने पर आपको 75% रिफंड ही मिलेगा। यानी रेलवे आपकी कुल राशि का 25% हिस्सा काट लेगा।

* 8 से 24 घंटे के बीच: अगर आप ट्रेन छूटने से एक दिन पहले या 8 घंटे पहले तक टिकट कैंसिल करते हैं, तो आपको केवल 50% रिफंड दिया जाएगा।

* 8 घंटे से कम समय: चार्ट बनने या ट्रेन छूटने के 8 घंटे पहले की सीमा समाप्त होते ही रिफंड की गुंजाइश खत्म हो जाएगी। इस स्थिति में रिफंड 'जीरो' होगा।

आखिर क्यों सख्त हुए नियम?

रेलवे का तर्क है कि आखिरी घंटों में बड़ी संख्या में टिकट कैंसिल होने से सीटें खाली रह जाती हैं, जिससे वेटिंग लिस्ट वाले उन यात्रियों को परेशानी होती है जिन्हें वास्तव में सफर करना है। 8 घंटे की समय सीमा होने से रेलवे के पास वेटिंग वाले यात्रियों को सीट अलॉट करने का पर्याप्त समय होगा। हालांकि, जानकारों का मानना है कि यह नियम उन लोगों के लिए बहुत सख्त है जो अचानक किसी इमरजेंसी की वजह से यात्रा रद्द करते हैं।

यात्रियों के लिए सुझाव

अब सफर की प्लानिंग पहले से करना ही समझदारी है। अगर आपको अपनी यात्रा को लेकर थोड़ा भी संदेह है, तो आखिरी वक्त का इंतजार न करें। मोबाइल ऐप या ऑनलाइन पोर्टल के जरिए समय रहते कैंसिलेशन करना अब आपकी जेब के लिए सुरक्षित रहेगा।

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