6 महीने में विदेश से अपना 104 टन सोना लाया RBI, क्या कीमतों पर दिखेगा असर?
RBI Gold Reserves: आरबीआई ने छह महीने में 104 टन सोना विदेश से भारत शिफ्ट किया है। कुल भंडार लगभग स्थिर रहा। रिपोर्ट के मुताबिक, मार्च 2026 में देश के भीतर रखा गया सोना 290.37 मीट्रिक टन रहा। जानिए RBI ने यह फैसला क्यों लिया और क्या इसका सोने की कीमतों पर कोई असर दिखेगा।
RBI का विदेश से सोना लाकर भारत में रखना एक रणनीतिक कदम है।
RBI ने मार्च 2026 तक के छह महीनों में विदेश में स्टोर अपना 104.23 मीट्रिक टन सोना देश में लाया है। यह जानकारी विदेशी मुद्रा भंडार पर जारी उसकी अर्धवार्षिक रिपोर्ट में सामने आई है। इस दौरान आरबीआई के कुल सोने के भंडार में हल्की बढ़ोतरी हुई। यह सितंबर 2025 के 880.18 मीट्रिक टन से बढ़कर मार्च 2026 में 880.52 मीट्रिक टन हो गया।
अब देश में कितना है RBI का सोना?
रिपोर्ट के मुताबिक, मार्च 2026 में देश के भीतर रखा गया सोना 290.37 मीट्रिक टन रहा। इससे पहले सितंबर 2025 में यह आंकड़ा 575.82 मीट्रिक टन और मार्च 2025 में 511.99 मीट्रिक टन था। यानी समय के साथ सोने के भंडारण के पैटर्न में बदलाव देखने को मिला है।
विदेश में कहां रखा है सोना
आरबीआई ने अपने सोने का एक बड़ा हिस्सा विदेश में भी सुरक्षित रखा है। मार्च 2026 तक 197.67 मीट्रिक टन सोना बैंक ऑफ इंग्लैंड और बैंक फॉर इंटरनेशनल सेटलमेंट्स (BIS) के पास सुरक्षित था। इसके अलावा 2.80 मीट्रिक टन सोना गोल्ड डिपॉजिट के रूप में रखा गया था।
अलग जगहों पर क्यों रखा जाता है सोना
इसका मकसद सुरक्षा, लिक्विडिटी और ऑपरेशनल सुविधा का संतुलन बनाना है। विदेश में सोना रखने से जरूरत पड़ने पर उसे जल्दी गिरवी रखकर डॉलर जुटाना या ट्रेड करना आसान होता है। क्योंकि वहां ग्लोबल गोल्ड मार्केट एक्टिव रहता है। वहीं देश के भीतर सोना रखने से रणनीतिक नियंत्रण, सुरक्षा और भरोसा बढ़ता है।
पिछली रिपोर्ट से क्या बदला
सितंबर 2025 की रिपोर्ट में बताया गया था कि 290.37 मीट्रिक टन सोना बैंक ऑफ इंग्लैंड और BIS के पास था, जबकि 13.99 मीट्रिक टन सोना गोल्ड डिपॉजिट के रूप में रखा गया था। यानी पिछले छह महीनों में विदेश में रखे सोने और डिपॉजिट में भी बदलाव आया है।
फॉरेक्स रिजर्व में सोने की हिस्सेदारी बढ़ी
कीमती धातुओं की कीमतों में तेजी के चलते भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की हिस्सेदारी बढ़कर मार्च 2026 में 16.7 प्रतिशत हो गई, जो छह महीने पहले 13.92 प्रतिशत थी।
कुल 552.28 अरब डॉलर के विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों में से 465.61 अरब डॉलर सिक्योरिटीज में निवेश किए गए थे। 46.83 अरब डॉलर अन्य केंद्रीय बैंकों और BIS के पास जमा थे, जबकि बाकी 39.84 अरब डॉलर विदेशी वाणिज्यिक बैंकों में जमा थे।
निवेश पैटर्न में हल्का बदलाव
रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों के निवेश पैटर्न में मामूली बदलाव हुआ है। सिक्योरिटीज और विदेशी बैंकों में जमा थोड़ी कम हुई है, जबकि अन्य केंद्रीय बैंकों और BIS में जमा बढ़ा है।
मार्च 2026 के अंत तक भारतीय रिजर्व बैंक की नेट फॉरवर्ड परिसंपत्तियां (देय) 103.06 अरब डॉलर पर पहुंच गईं, जो विदेशी मुद्रा प्रबंधन की स्थिति को दिखाती हैं।
क्या सोने की कीमतों पर होगा असर?
RBI का विदेश से सोना लाकर भारत में रखना एक रणनीतिक कदम है। इसका सोने की कीमतों पर कोई असर नहीं पड़ेगा। क्योंकि आरबीआई ने नया सोना खरीदा या बेचा नहीं है। सिर्फ अपने भंडार की जगह बदली है यानी विदेश से भारत में शिफ्ट किया है।
ग्लोबल गोल्ड प्राइस असल में डॉलर, ब्याज दरों, महंगाई, जियोपॉलिटिक्स और डिमांड-सप्लाई जैसे फैक्टर्स से तय होती है। इसलिए इस तरह के ट्रांसफर का असर बहुत सीमित रहता है। यह कदम भरोसे और रणनीतिक नियंत्रण के नजरिए से जरूर अहम माना जाता है।
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