UPI पेमेंट करते समय अगर आपको अचानक 1 घंटे का इंतजार करना पड़े, तो हैरानी होगी? पर अब यही बदलाव जल्द हकीकत बन सकता है। RBI ऐसा नियम लाने की तैयारी में है, जो आपकी ट्रांजैक्शन को स्लो कर सकता है। लेकिन RBI ये कदम बढ़ने ऑनलाइन फ्रॉड को रोकने और पैसे को ज्यादा सेफ रखने के लिए करना चाहती है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) जल्द ही ऐसा नियम ला सकती है जिसमें 10,000 रुपये से ज्यादा के UPI या अन्य डिजिटल ट्रांसफर पर आपको 1 घंटे तक इंतजार करना पड़ सकता है।
ट्रांजेक्शन के बाद मिलेगा 1 घंटे का प्रोसेस टाइम
RBI के प्रस्ताव के मुताबिक अगर कोई व्यक्ति 10,000 रुपये से ज्यादा का अकाउंट-टू-अकाउंट ट्रांसफर करता है, तो बैंक उस ट्रांजैक्शन को तुरंत प्रोसेस करने के बजाय 1 घंटे के लिए होल्ड कर सकते हैं। इस दौरान ग्राहक के पास ट्रांजैक्शन को कैंसिल करने का ऑप्शन भी रहेगा।
क्यों लाया जा रहा है यह नियम?
दरअसल, देश में डिजिटल फ्रॉड तेजी से बढ़े हैं। आंकड़ों के अनुसार, 2021 में जहां करीब 2.6 लाख मामले सामने आए थे, वहीं 2025 तक यह बढ़कर 28 लाख हो गए। फ्रॉड की यह रकम 551 करोड़ रुपये से बढ़कर करीब 22,931 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है।
RBI का मानना है कि ज्यादातर फ्रॉड तकनीकी नहीं होते, बल्कि ठग लोगों को फोन या मैसेज के जरिए डराकर या लालच देकर खुद पैसे ट्रांसफर करवाते हैं। ऐसे में अगर ट्रांजैक्शन में थोड़ा समय दिया जाए, तो लोग सोच-समझकर फैसला ले सकते हैं और फ्रॉड रोका जा सकता है।
किन ट्रांजैक्शन पर नहीं होगा असर?
मर्चेंट पेमेंट (दुकानों पर पेमेंट)
इसके अलावा ग्राहक जिन लोगों को भरोसेमंद यानी whitelist मानते हैं, उन्हें जोड़कर इस देरी से बच सकते हैं।
और क्या हैं RBI के सुझाव?
70 साल से ज्यादा उम्र के लोगों और दिव्यांगों के लिए बड़े ट्रांसफर पर ट्रस्टेड पर्सन की मंजूरी जरूरी हो सकती है। एक साल में किसी खाते में 25 लाख रुपये से ज्यादा आने पर एक्स्ट्रा जांच हो सकती है। क्विक स्विच फीचर, जिससे ग्राहक एक क्लिक में सभी डिजिटल पेमेंट बंद कर सके, ऐसा फीचर लाया जाए।
यह कदम जहां फ्रॉड रोकने में मदद कर सकता है, वहीं इससे UPI की सबसे बड़ी खासियत—तुरंत पेमेंट—पर असर पड़ सकता है। कुछ लोगों को यह सिस्टम थोड़ा असुविधाजनक भी लग सकता है। फिलहाल RBI ने इस पर लोगों और संस्थाओं से 8 मई 2026 तक सुझाव मांगे हैं। RBI इसके बाद ही अंतिम फैसला लेगा।