RBI Monetary Policy: क्या आरबीआई के इंटरेस्ट रेट घटाने से 10 साल के सरकारी बॉन्ड्स की यील्ड 6.4% से नीचे चली जाएगी?

अगर आरबीआई रेपो रेट नहीं घटाता है, लेकिन अपना रुख नरम रखता है तो इसका असर बॉन्ड यील्ड पर पड़ेगा। अगर वह रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट्स की कमी करता है या आगे के लिए स्पष्ट गाइडेंस देता है तो 10 साल के सरकारी बॉन्ड्स की यील्ड 6.4 फीसदी से नीचे जा सकती है

अपडेटेड Dec 02, 2025 पर 4:13 PM
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इंटरेस्ट रेट में कमी से ज्यादा इंटरेस्ट रेट वाले मौजूदा बॉन्ड्स का आकर्षण बढ़ जाएगा।

आरबीआई 5 दिसंबर को मॉनेटरी पॉलिसी पेश करेगा। मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी की बैठक ऐसे वक्त होने जा रही है, जब जीडीपी ग्रोथ के तिमाही डेटा ने हैरान किया है। इस साल पहले ही केंद्रीय बैंक तीन बार में इंटरेस्ट रेट में 100 बेसिस प्वाइंट्स की कमी कर चुका है। इससे रेपो रेट 5.5 फीसदी पर आ गया है। रिटेल इनफ्लेशन 13 सालों में सबसे कम है। तिमाही जीडीपी ग्रोथ 8.2 फीसदी है। तो क्या 5 दिसंबर को आरबीआई रेपो रेट में कमी करेगा?

रेट में कमी और रुख में नरमी का असर बॉन्ड यील्ड पर पड़ेगा

एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर RBI रेपो रेट नहीं घटाता है, लेकिन अपना रुख नरम रखता है तो इसका असर Bond Yield पर पड़ेगा। अगर वह रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट्स की कमी करता है या आगे के लिए स्पष्ट गाइडेंस देता है तो 10 साल के सरकारी बॉन्ड्स की यील्ड 6.4 फीसदी से नीचे जा सकती है। इससे बॉन्ड्स के निवेशकों को अच्छा मार्क-टू-मार्केट गेंस होगा।


आरबीआई गवर्नर ने रुख में नरमी का संकेत दिया था

अमेरिका सहित बड़ी इकोनॉमी वाले देशों में मॉनेटरी पॉलिसी में नरमी दिख रही है। हाल में आरबीआई के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने इंटरेस्ट रेट में और कमी का संकेत दिया था। इसका असर बॉन्ड्स मार्केट पर पड़ा था। अगर आरबीआई 5 दिसंबर को अपना रुख नरम (Dovish) बनाए रखने का संकेत देता है तो इससे बॉन्ड यील्ड में कमी आएगी। रेपो रेट में कमी से बैंकों की फंडिंग कॉस्ट घट जाती है। इसका असर लोन के इंटरेस्ट रेट पर भी पड़ता है।

इंटरेस्ट रेट घटने से मौजूदा बॉन्ड्स की चमक बढ़ जाएगी

इंटरेस्ट रेट में कमी से ज्यादा इंटरेस्ट रेट वाले मौजूदा बॉन्ड्स का आकर्षण बढ़ जाएगा। इन बॉन्ड्स की डिमांड बढ़ने का असर उनकी कीमतों पर पड़ेगा। उनकी कीमतें बढ़ने पर उनकी यील्ड घट जाएगी। बॉन्ड की कीमत और उसकी यील्ड में विपरीत संबंध है। बॉन्ड की कीमत बढ़ने पर उसकी यील्ड घट जाती है। बॉन्ड की कीमत घटने पर उसकी यील्ड बढ़ जाती है।

इंटरेस्ट रेट में कमी का फैसला टाल सकता है केंद्रीय बैंक

दूसरी तिमाही में 8.2 फीसदी की जीडीपी ग्रोथ और करीब 0.25 फीसदी के रिटेल इनफ्लेशन रेट से क्लासिकल गोल्डीलॉक की स्थिति बनी है। ऐसे में केंद्रीय बैंक इंटरेस्ट रेट में कमी करने में देर कर सकता है या वह इंटरेस्ट रेट में कमी को टाल सकता है। वह ग्रोथ और रिटेल इनफ्लेशन पर डिस्टर्ब करने से परहेज करना चाहेगा। इनवेस्टर्स के लिए दो तरह की स्थितियां बन सकती हैं।

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लॉन्ग ड्यूरेशन बॉन्ड्स के इनवेस्टर्स को रेट घटने से फायदा

पहला, अगर आरबीआई रेपो रेट में कमी करता है या अपनी पॉलिसी नरम रखने का स्पष्ट संकेत देता है तो मौजूदा सरकारी बॉन्ड्स और कॉर्पोरेट्स बॉन्ड्स की कीमतों में तेजी दिख सकती है। इससे उन इनवेस्टर्स को फायदा होगा, जिन्होंने लॉन्ग ड्यूरेशन बॉन्ड्स में निवेश किया है। यील्ड में कमी आने से मार्क-टू-मार्केट रिटर्न बढ़ जाएगा। अगर आरबीआई रेपो रेट में बदलाव नहीं करता है तो यील्ड मौजूदा लेवल पर बनी रहेगी। इससे स्थिर इनकम चाहते वाले इनवेस्टर्स को फायदा होगा।

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