Real Estate vs Investment: करियर की शुरुआत में ही मेट्रो सिटी में अपना घर या 3 BHK फ्लैट खरीदना एक बड़ी उपलब्धि माना जाता है। लेकिन क्या कभी आपने सोचा है कि जो घर आप रहने के लिए नहीं बल्कि एक 'इन्वेस्टमेंट' के रूप में ले रहे हैं, वह आपके लिए कितना बड़ा 'फाइनेंशियल ट्रैप' बन सकता है?
हाल ही में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक यूजर ने एक ऐसा केस शेयर किया है जो आपको हैरान कर देगा। समझिए कि क्यों करियर के शुरुआती दिनों में होम लोन की भारी-भरकम EMI में बंधना आपकी वित्तीय आजादी और फ्लेक्सिबिलिटी को हमेशा के लिए छीन सकता है।
₹1.4 करोड़ का फ्लैट और ₹2.21 करोड़ का फाइनल पेमेंट
राहुल ने 2014 में ₹1.4 करोड़ रुपये में 3 BHK फ्लैट खरीदा। गृह प्रवेश से पहले इंटीरियर और फिनिशिंग पर ₹7-8 लाख अतिरिक्त खर्च हुए। उनकी कुल लागत करीब ₹1.48 करोड़ बैठी। खरीदने के एक साल बाद ही राहुल को काम के सिलसिले में परिवार सहित आयरलैंड जाना पड़ा। मजबूरी में उन्होंने फ्लैट ₹19,500 प्रति महीने के किराए पर दे दिया।
हाल ही में जब राहुल ने अपना होम लोन क्लोज किया, तो उन्होंने पाया कि मूलधन, ब्याज और प्री-क्लोजर चार्ज मिलाकर वे बैंक को कुल ₹2.21 करोड़ चुका चुके थे। आज इस फ्लैट से उन्हें लगभग ₹31,000 प्रति महीने का किराया मिल रहा है। जब उन्होंने इसे बेचने की कोशिश की, तो बाजार से ऑफर ₹1.9 करोड़ से ₹2 करोड़ के बीच ही मिल रहे हैं।
राहुल की दिक्कत यह है कि उन्होंने जितना पैसा बैंक को चुकाया है, वे उससे कम में इसे बेचने को तैयार नहीं हैं। वहीं दूसरी तरफ, विदेश में होने और माता-पिता के दूसरे शहर में रहने की वजह से वे इस घर में कभी रह भी नहीं पाएंगे।
प्रॉपर्टी से मिलने वाले रिटर्न का असली गणित
अगर आप प्रॉपर्टी को एक 'इन्वेस्टमेंट' की तरह देखते हैं, तो आपको दो प्रमुख बातों पर ध्यान देना होगा:
रेंटल यील्ड: भारत में आवासीय संपत्तियों की रेंटल यील्ड औसतन 2% से 3% ही होती है। यानी ₹1.4 करोड़ के घर पर ₹20,000 से ₹30,000 का किराया मिलना कोई बहुत बड़ी कमाई नहीं है, जबकि बैंक होम लोन पर 8.5% से 9.5% तक का ब्याज वसूलते हैं।
पूंजीगत बढ़त बनाम ब्याज की लागत: अक्सर लोग केवल खरीद मूल्य और बिक्री मूल्य का अंतर देखते हैं। वे भूल जाते हैं कि 15-20 साल के होम लोन में वे मूलधन का लगभग दोगुना पैसा केवल ब्याज के रूप में बैंक को दे देते हैं।
'अर्ली ईएमआई ट्रैप' से कैसे बचें?
करियर के शुरुआती 5-10 सालों में जब तक आपकी नौकरी का स्थान, शहर या विदेश जाने की योजनाएं पूरी तरह स्थिर न हों, भारी लोन लेने से बचें। शुरुआत में किराए के मकान में रहना आपको शहर या देश बदलने की पूरी आजादी देता है। किराए से बचा हुआ पैसा आप म्यूचुअल फंड, इक्विटी या अन्य एसेट क्लास में निवेश कर सकते हैं।
जब आपके पास पर्याप्त लिक्विड फंड जाए, तब अपने रहने के लिए घर खरीदने का फैसला लें। साथ ही अगर आपके पास बैंक में पर्याप्त कैश है, तो रीसेल मार्केट में लाखों ऐसी प्रॉपर्टी उपलब्ध होती हैं जिन्हें आप अच्छे डिस्काउंट पर खरीद सकते हैं।
Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।