गिफ्ट सिटी की रिटेल फंड स्कीमों की हालत ठीक नहीं, जानिए क्या है इसकी वजह

गिफ्ट आईएफएससी में 139 फंड मैनेजमेंट एनटिटीज (एफएमई) हैं। इनमें से 123 नॉन-रिटेल स्कीम के रूप में रजिस्टर्ड हैं। सिर्फ 8 रिटेल स्कीम हैं। बाकी अथॉराइज्ड एफएमई स्कीम हैं। रिटेल स्कीम की संख्या नहीं बढ़ने की कई वजहें हैं

अपडेटेड Feb 13, 2025 पर 6:58 PM
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इस साल जनवरी में सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेज (CBDT) ने एक सर्कुलर जारी किया। कुछ मसलों पर सीबीडीटी के सर्कुलर में स्पष्टता की कमी है।

गिफ्ट सिटी में फंड मैनजमेंट बिजनेस बढ़ रहा है। कई पीएमएस और एआईएफ गिफ्ट सिटी में अपना बिजनेस शुरू कर रहे हैं। लेकिन, करीब से देखने पर पता चलता है कि इस सेगमेंट की ग्रोथ काफी कम है। इसमें म्यूचुअल फंड्स की रिटेल स्कीम भी शामिल हैं। अभी गिफ्ट आईएफएससी में 139 फंड मैनेजमेंट एनटिटीज (एफएमई) हैं। इनमें से 123 नॉन-रिटेल स्कीम के रूप में रजिस्टर्ड हैं। सिर्फ 8 रिटेल स्कीम हैं। बाकी अथॉराइज्ड एफएमई स्कीम हैं।

रिटेल फंड स्कीमों में कम दिलचस्पी की वजहें

एक्सपर्ट्स का मानना है कि इसकी वजह रेगुलेटरी अनिश्चितता हो सकती है। एनआरआई को रिटेल स्कीम बेचने पर रोक है। इसके अलावा गिफ्ट सिटी में रिटेल स्कीम को सेलेक्ट करने पर ज्यादा टैक्स बेनेफिट भी नहीं मिलता है। IFSC फंड मैनेजमेंट रेगुलेशन के तहत 2022 में IFSC में रिटेल स्कीम की इजाजत दी गई थी। लेकिन, उन्हें ऑफशोर फंडों के हिसाब से टैक्स रिजीम का फायदा नहीं मिलने से अनिश्चितता की स्थिति है। इसके चलते फंड मैनेजर्स रिटेल स्कीम में दिलचस्पी नहीं दिखाते हैं।


सीबीडीटी ने जनवरी में जारी किया सर्कुलर

इस साल जनवरी में सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेज (CBDT) ने एक सर्कुलर जारी किया। इसमें कुछ शर्तें शामिल थीं। प्राइसवाटरहाउस एंड कंपनी के पार्टनर सुरेश स्वामी ने कहा कि सर्कुलर में शामिल शर्तों में अनिलिस्टेड सिक्योरिटीज और एसोसिएट एनिटिटीज में इनवेस्टमेंट के लिए लिमिट की भी शर्त थी। यह शर्त रिटेल स्कीम के लिए काफी मुश्किल है। इस वजह से IFSC में रिटेल स्कीम में ज्यादा दिलचस्पी देखने को नहीं मिली है।

सर्कुलर में कई मसलों पर स्थिति स्पष्ट नहीं

एक अधिकारी ने बताया कि कुछ मसलों पर सीबीडीटी के सर्कुलर में स्पष्टता की कमी है। खासकर पैसिव ब्रीच (Passive Breach) का मतलब क्या है, इस बारे में स्थिति साफ नहीं है। इस ब्रीच को ठीक करने के लिए टाइमलाइन के बारे में भी नहीं बताया गया है। अधिकारी ने बताया कि इसे एक उदाहरण की मदद से समझा जा सकता है। किसी रिटेल स्कीम में एक स्टॉक का मैक्सिमम वेटेज 25 फीसदी हो सकता है। लेकिन, अगर वैल्यूएशन बढ़ने की वजह से यह लिमिट क्रॉस हो जाता है तो सर्कुलर में यह नहीं बताया गया है कि कितने समय में फंड मैनेजर को इसे तय लिमिट के अंदर लाना होगा।

मुश्किल शर्तों की वजह से रिटेल स्कीम का ऑपरेशन मुश्किल

इसी तरह एक फंड के कम से कम 20 क्लाइंट्स होने जरूरी हैं। अगर 1 या 2 क्लाइंट्स फंड से एग्जिट कर जाते हैं तो सीबीडीटी के सर्कुलर में यह नहीं बताया गया है कि ऐसी स्थिति में फंड मैनेजर को क्या करना होगा। ऐसे मसलों पर स्थिति स्पष्ट नहीं होने की वजह से रिटेल स्कीम का ऑपरेशन गिफ्ट सिटी में शु्रू करना फायदेमंद नहीं लगता है।

फेमा के नियमों ने भी बढ़ाई मुश्किल

इकोनॉमिक लॉज प्रैक्टिस के पार्टनर विनोद जोसफ ने कहा कि सवाल यह है कि गिफ्ट सिटी स्थित म्यूचुअल फंड में कौन निवेश करना चाहेगा। उन्होंने कहा, "अगर आप इंडिया में निवेश के मकसद से गिफ्टी सिटी में रिटेल फंड शुरू करते हैं तो ऐसा रिटेल फंड अपने फंड का एक खास हिस्से ज्यादा इंडियन इनवेस्टर्स से नहीं जुटा सकता। इसकी वजह फेमा के नियम हैं।"

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