रिटारमेंट प्लानिंग में अक्सर लोगों से कुछ आम तरह की गलतियां होती हैं। इसका अहसास उन्हें तब होता है, जब समय उनके हाथ से निकल चुका होता है। रिटायर हो चुके या रिटायरमेंट के करीब पहुंच चुके लोगों से बात करने से इसका पता चलता है। आइए इस बारे में विस्तार से जानने की कोशिश करते हैं।
रिटायरमेंट प्लानिंग को ज्यादा महत्व नहीं देना
व्यक्ति की उम्र जब कम होती है तो वह रिटायरमेंट प्लानिंग को ज्यादा महत्व नहीं देता। उसे लगता है कि इसके लिए काफी वक्त बचा है। उसका ज्यादा फोकस दूसरी जरूरतों पर होता है। इसमें बच्चों की पढ़ाई, कार खरीदना और घर खरीदने जैसी चीजें शामिल होती हैं। इसका सबसे बड़ा नुकसान यह होता है कि रिटायरमेंट के लिए जरूरी सेविंग्स और इनवेस्टमेंट करने का वक्त उसके हाथ से निकल जाता है। बाद में वह चाहकर भी रिटायरमेंट के लिए पर्याप्त फंड नहीं जुटा पाता।
कई लोग यह सोचते हैं कि रिटायरमेंट के बाद उनका खर्च घटकर काफी कम रह जाएगा। कुछ हद तक यह बात सही है। लेकिन, पूरी तरह से सच नहीं है। इसकी वजह यह है कि रिटायरमेंट के बाद कुछ खर्च तो घट जाते हैं। लेकिन, कुछ नए तरह के खर्च शुरू हो जाते हैं। इनमें सबसे बड़ा खर्च मेडिकल से जुड़ा है। इलाज का खर्च जिस तरह से बढ़ रहा है, उससे व्यक्ति के कुल खर्च में मेडिकल खर्च की हिस्सेदारी बढ़ रही है।
किसी एक स्रोत पर जरूरत से ज्यादा निर्भरता
कई लोग रिटायरमेंट के बाद पेंशन, रेंटल इनकम या बिजनेस इनकम पर जरूरत से ज्यादा भरोसा करते हैं। इनमें पेंशन को छोड़ बाकी स्रोतों से होने वाली इनकम की गारंटी नहीं है। रेंटल इनकम बीच-बीच में बंद हो सकती है। अगर बिजनेस नया है तो उसे जमने में समय लग सकता है। इसलिए रिटायरमेंट बाद के खर्चों के लिए किसी एक स्रोत पर जरूरत से ज्यादा भरोसा करना ठीक नहीं है।
पैसे की सेफ्टी पर जरूरत से ज्यादा फोकस
कुछ लोग रिटायरमेंट से पहले ही अपनी सेविंग्स और इनवेस्टमेंट को सुरक्षित माने जाने वाले विकल्पों में शिफ्ट करना शुरू कर देते हैं। इनमें बैंक एफडी, डेट फंड आदि शामिल हैं। इससे उनके पैसे पर मिलने वाला रिटर्न घट जाता है। अगर रिटर्न इनफ्लेशन के मुकाबले कम है तो इसका मतलब है कि आपके पैसे की वैल्यू घटनी शुरू हो जाती है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि रिटायरमेंट फंड को अच्छे रिटर्न वाले ऑप्शन में डालना जरूरी है।
रिटायरमेंट बाद कम उम्र का अंदाजा
आजकल मेडिकल सुविधाओं के बढ़ने से व्यक्ति के लंबे समय तक जीवित रहने की संभावना बढ़ी है। लोग खानेपीने का सही ध्यान रख रहे हैं, जिससे वे ज्यादा उम्र में भी फिट रहते हैं। ऐसे में रिटायरमेंट बाद कम उम्र का अंदाजा लगाना बड़ी भूल साबित होती है। अगर व्यक्ति अनुमान से लंबे समय तक जीवित रहता है तो उसका फंड कम पड़ने लगता है। इससे उसे आर्थिक दिक्कत का सामना करना पड़ता है।