Retirement planning: अपने बैंक अकाउंट या म्यूचुअल फंड स्टेटमेंट में रिटायरमेंट के लिए जमा की गई एक बड़ी रकम देखकर किसी को भी सुकून मिल सकता है। पर क्या सिर्फ एक बड़ा फंड यह तय कर सकता है कि ये जिंदगी भर के लिए काफी होगा? इसका जवाब ना में है।

Retirement planning: अपने बैंक अकाउंट या म्यूचुअल फंड स्टेटमेंट में रिटायरमेंट के लिए जमा की गई एक बड़ी रकम देखकर किसी को भी सुकून मिल सकता है। पर क्या सिर्फ एक बड़ा फंड यह तय कर सकता है कि ये जिंदगी भर के लिए काफी होगा? इसका जवाब ना में है।
अगर महंगाई, तेजी से बढ़ता मेडिकल खर्च, लंबी लाइफ को ठीक से कैलकुलेट न करना या फंड से बार-बार पैसे निकालना जैसी स्थिति बनती है, तो एक बड़ा रिटायरमेंट फंड भी आपकी उम्मीदों से पहले खत्म हो सकता है।
SEBI के रिटायरमेंट प्लानिंग टूल्स इन्वेस्टर्स को सलाह देते हैं कि वे अपने रिटायरमेंट फंड का अनुमान लगाते समय रिटायरमेंट के खर्चों, महंगाई दर, रिटायरमेंट के बाद के कुल वर्षों और टैक्स के बाद मिलने वाले रिटर्न का खास ध्यान रखें। आइए आपको ऐसी ही पांच चीजों के बारे में बताते हैं जिनका ख्याल रखना बहुत जरूरी है।
1. संभावित खर्चों की तुलना में एक्सपेक्टेड इनकम का कम होना
रिटायरमेंट फंड के कम होने का पहला और सबसे साफ संकेत यह है कि आपकी संभावित इनकम आपके अनुमानित खर्चों से काफी कम पड़ रही है। जरूरी है कि आप आज के दौर में राशन, घर, बिजली-पानी के बिल, इंश्योरेंस और हेल्थ केयर से जुड़े खर्चों को जोड़ें और यह अनुमान लगाएं कि रिटायरमेंट के समय तक वे कितने हो जाएंगे। अगर आपकी पेंशन, एन्युटी, घर के किराये और इन्वेस्टमेंट से होने वाली संभावित इनकम इन खर्चों को आसानी से पूरा नहीं कर पा रही है, तो आपको अपने रिटायरमेंट फंड का दोबारा वैल्युएशन करने की जरूरत है।
2. महंगाई के असर को ढंग से कैलकुलेट न करना
महंगाई एक ऐसा फैक्टर है जिसे अक्सर लोग नजरअंदाज कर देते हैं। आज के समय में 2 करोड़ रुपये का कॉर्पस एक बहुत बड़ी राशि लग सकती है, लेकिन 15 से 20 साल बाद बढ़ती महंगाई की वजह से इस फंड की परचेसिंग पावर काफी कम हो जाएगी। SEBI के मुताबिक महंगाई पैसे की असल वैल्यू को घटा देती है. इसलिए, ऐसे इन्वेस्टमेंट ऑप्शन का चुनाव करना चाहिए जो लंबे समय में महंगाई दर को पछाड़कर बेहतर रिटर्न दे सकें।
3. मेडिकल खर्चों की अनदेखी और सिर्फ एक इनकम सोर्स पर डिपेंडेंसी
रिटायरमेंट प्लानिंग के दौरान आमतौर पर घरेलू खर्च ही ध्यान में रहते हैं. अक्सर मेडिकल खर्चों को बाद की बात मान लिया जाता है। पर ये समझना जरूरी है कि आपका अस्पताल में भर्ती होना, लंबे समय तक चलने वाला इलाज या बुढ़ापे में देखभाल की जरूरत आपकी जमा पूंजी में का बड़ा हिस्सा उड़ा सकती है। ऐसे में हेल्थ इंश्योरेंस इस बोझ कौनकुछ हद तक कम कर सकता है, लेकिन रिटायरमेंट प्लान में उन खर्चों के लिए भी आपको व्यवस्था करनी चाहिए जिन्हें आपका इंश्योरेंस पूरी तरह से कवर नहीं करता।
इसके अलावा इनकम के सिर्फ एक ही सोर्स पर बहुत अधिक निर्भर रहना एक बड़ी गलती है। EPF, पेंशन, NPS, एन्युटी या किराये की आय, ये सभी महत्वपूर्ण हो सकते हैं, लेकिन परिस्थितियां बदलने पर सिर्फ एक ही सोर्स पर निर्भर रहने से जोखिम बढ़ जाता है। SEBI अलग-अलग एसेट क्लास में डाइवर्सिफिकेशन की सलाह देता है, ताकि आपका सारा पैसा किसी एक ही तरह के निवेश में न लगा हो।
4. ज्यादा विड्रॉल रेट और बाजार गिरने का जोखिम
आपका विड्रॉल रेट (फंड से पैसे निकालने की दर) भी एक महत्वपूर्ण संकेत है. अगर आपको सामान्य दैनिक खर्चों को पूरा करने के लिए ही हर साल अपने कॉर्पस का एक बड़ा हिस्सा निकालना पड़ रहा है, तो यह फंड लंबे समय तक नहीं टिकेगा. यह जोखिम तब और अधिक बढ़ जाता है जब रिटायरमेंट के शुरुआती वर्षों में ही शेयर बाजार गिर जाता है. मंदी के दौरान अपने इन्वेस्टमेंट को बेचने से भविष्य में बाजार के दोबारा उठने का फायदा उठाने के लिए आपके पास इन्वेस्टमेंट कम बचता है.
5. सेविंग्स बंद कर देना और समय से पहले रिटायरमेंट का फैसला
पांचवां खतरे का संकेत यह है कि मौजूदा कॉर्पस को पर्याप्त मानकर आपने एक्स्ट्रा बचत बंद कर दी है। रिटायरमेंट प्लानिंग कोई एक बार किए जाने वाला कैलकुलेशन नहीं है। समय के साथ आपका वेतन, खर्च, निवेश का रिटर्न, रिटायरमेंट की उम्र और अनुमानित जीवनकाल सब बदल सकते हैं। इसी वजह से SEBI का रिटायरमेंट कैलकुलेटर निवेशकों को रिटायरमेंट के वर्ष, महंगाई, टैक्स के बाद रिटर्न और रिटायरमेंट अवधि जैसे अनुमानों को समय-समय पर एडजस्ट करने की सुविधा देता है।
इसी तरह रिटायरमेंट की उम्र बदलने से भी बड़ा अंतर आता है। अगर आपने पहले 60 वर्ष की आयु तक काम करने की योजना बनाई थी लेकिन अब आप 55 वर्ष में रिटायर होना चाहते हैं तो आपके पास फंड बनाने के लिए कम साल होंगे और उस फंड पर निर्भर रहने के लिए अधिक साल होंगे। अगर आप अभी भी होम लोन चुका रहे हैं या बच्चों की जिम्मेदारी उठा रहे हैं तो यह फैसला आपके कैलकुलेशन को पूरी तरह बदल सकता है।
एक्सपर्ट शुरुआती उम्र से निवेश शुरू करने, निवेश को कंपाउंड होने का समय देने और अप्रत्याशित खर्चों के लिए पर्याप्त आपातकालीन फंड बनाए रखने पर जोर देते हैं। अगर आपके खर्च बढ़ने के बावजूद आपका रिटायरमेंट पोर्टफोलियो नहीं बढ़ रहा है तो यह रणनीति पर फिर से विचार करने का सही समय है।
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