पिछले कई महीनों से करीब रोजाना आप डॉलर के मुकाबले रुपये में कमजोरी की खबरें सुनते, पढ़ते और देखते होंगे। आपको यह लगता होगा कि डॉलर के मुकाबले रुपया लगातार कमजोर हो रहा है। लेकिन, रुपये में आपके अनुमान से ज्यादा गिरावट आई है। बहुत तेजी से डॉलर के मुकाबले रुपया 90 से 95 के लेवल पर आया है। बीते एक दशक में संभवत: पहली बार रुपये में इतनी तेज गिरावट आई है।
सिर्फ 5 महीनों में 90 से 95 के लेवल पर आया रुपया
मनीकंट्रोल के एनालिसिस से पता चला है कि रुपये को 90 के लेवल से 95 के लेवल पर पहुंचने में सिर्फ 5 महीनों का समय लगा। 2013 के बाद डॉलर के मुकाबले रुपये में यह सबसे तेज गिरावट है। इससे पहले 2013 में रुपये में इतनी तेज गिरावट आई थी, जब यह सिर्फ एक महीने में 60 से गिरकर 65 के लेवल पर पहुंच गया था। तब काफी ज्यादा पूंजी देश से बाहर जाने और देश के बढ़ते करेंट अकाउंट डेफिसिट की वजह से रुपया गिरा था।
पहले भारतीय करेंसी में 5 रुपये की गिरावट में लंबा समय लगता था
ऊपर के दो मौकों को छोड़ दें तो आम तौर पर भारतीय करेंसी में 5 रुपये की गिरावट में कई महीनों को समय लगा है। रुपये के 85 से 90 के लेवल पर जाने में 14 महीनों का समय लगा। 80 से 85 के लेवल पर जाने में 28 महीनों का समय लगा। 75 से 80 के लेवल पर जाने में 31 महीनों का समय लगा था। इससे यह भी पता चलता है कि आम तौर पर रुपये पर अभी जैसा दबाव नहीं रहता है।
रुपये में तेज गिरावट के पीछ मध्यपूर्व में टकराव का हाथ
रुपये के 90 से 95 के लेवल पर जाने में मध्यपूर्व में टकराव का बड़ा हाथ रहा है। इस साल 28 फरवरी को अमेरिका-इजरायल ने ईरान पर हमले शुरू किए थे। फिर ईरान ने भी जवाबी हमले किए। इसका सबसे ज्यादा असर क्रूड़ ऑयल की कीमतों पर पड़ा है। इस लड़ाई के शुरू होने से पहले क्रूड का भाव 72 डॉलर प्रति बैरल था। आज क्रूड का भाव 110 डॉलर के करीब है। पिछले कई हफ्तों से ब्रेंट क्रूड का भाव 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बना हुआ है। एक समय तो यह 120 डॉलर तक चला गया था।
50 से 55 के लेवल पर जाने में रुपये को 43 महीने लगे थे
फरवरी में डॉलर के मुकाबले रुपये का औसत लेवल 90.88 था। मई के अंत तक यह 95.2 पर आ गया। 2018 में रुपया 65 के लेवल के करीब था। इसे 70 के लेवल पर जाने में 61 महीने यानी पांच साल से ज्यादा समय लगा। 70 से 75 के लेवल पर यह 20 महीनों में पहुंच गया। 50 से 55 के लेवल पर जाने में इसे 43 महीने लगे।
रुपये में तेज गिरावट के बावजूद इकोनॉमी की सेहत अच्छी
एक्सपर्ट्स का कहना है कि भले ही इस साल रुपये में तेज गिरावट आई है, लेकिन भारत की इकोनॉमी 2013 के मुकाबले मजबूत स्थिति में है। भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 690 अरब डॉलर से ज्यादा है। 2013 में यह 300 अरब डॉलर से कम था। देश का बैंकिंग सिस्टम और एक्सटर्नल अकाउंट्स भी तब के मुकाबले मजबूत स्थिति में हैं। हालांकि, इस साल रुपये में आई गिरावट का असर आम आदमी की जेब पर पड़ना तय है।