रुपये को गिरने से बचाने के लिए RBI का 5 अरब डॉलर का बड़ा दांव, क्या इससे भारतीय करेंसी को फायदा होगा?

डॉलर के मुकाबले रुपया बीते एक साल में 13 फीसदी से ज्यादा कमजोर हुआ है। इस साल यह 7 फीसदी से ज्यादा गिरा है। इस गिरावट ने आरबीआई को चिंतित किया है। रुपये में कमजोरी का असर आम आदमी की जेब पर भी पड़ता है

अपडेटेड May 21, 2026 पर 1:15 PM
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डॉलर-रूपी बाय एंड सेल स्वैप ऑक्शन की शुरुआत 26 मई को होगी।

रुपये को गिरने से बचाने के लिए आरबीआई ने बड़ा ऐलान किया है। अगले हफ्ते वह 5 अरब डॉलर का डॉलर-रुपया का बाय एंड सेल स्वैप ऑक्शन करेगा। सवाल है कि क्या इससे डॉलर के मुकाबले रुपये में गिरावट पर रोक लगेगी? डॉलर-रुपया बाय एंड सेल स्वैप ऑक्शन क्या है?

20 मई को रुपया 97 के लेवल के करीब पहुंच गया था

सबसे पहले यह जान लेना जरूरी है कि बीते कुछ हफ्तों में डॉलर के मुकाबले रुपये में तेज गिरावट आई है। 20 मई को डॉलर के मुकाबले रुपया गिरकर एक समय 96.90 के लेवल पर पहुंच गया था। हालांकि, बाद में इसमें थोड़ी रिकवरी आई। 21 मई को भी रुपया मजबूत खुला है। 18 मई को रुपया 96.82 के लेवल पर बंद हुआ था। 21 मई को यह 52 पैसे की मजबूती के साथ 96.30 के लेवल पर खुला।


बीते एक साल में रुपये में 13 फीसदी से ज्यादा कमजोरी

डॉलर के मुकाबले रुपया बीते एक साल में 13 फीसदी से ज्यादा कमजोर हुआ है। इस साल यह 7 फीसदी से ज्यादा गिरा है। इस गिरावट ने आरबीआई को चिंतित किया है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि मध्यपूर्व में लड़ाई शुरू होने के बाद क्रूड ऑयल की कीमतों में उछाल आया। इससे रुपये पर दबाव बढ़ गया। अब भी ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर से ऊपर चल रहा है। क्रूड महंगा होने से भारत का इंपोर्ट बिल बढ़ जाता है। डॉलर की डिमांड बढ़ जाती है, जिसका असर रुपये पर पड़ता है।

डॉलर-रूपी बाय एंड सेल स्वैप ऑक्शन का मतलब

डॉलर-रूपी बाय एंड सेल स्वैप ऑक्शन की शुरुआत 26 मई को होगी। इसका मकसद बैंकिंग सिस्टम में लिक्विडिटी यानी रुपये की उपलब्धता बढाना है। स्वैप ऑक्शन के तहत कोई बैंक आरबीआई को डॉलर बेच सकता है। फिर स्वैप की अवधि खत्म होने पर बैंक को आरबीआई से उतने ही डॉलर (पहले बेचे गए) खरीदने होंगे। बैंकों के डॉलर बेचने से आरबीआई के पास डॉलर की उपलब्थता बढ़ जाती है।

आरबीआई के इस कदम का क्या होगा फायदा

एक्सपर्ट्स का कहना है कि आरबीआई के इस कदम से फॉरेक्स मार्केट में डॉलर की उपलब्धता बढ़ेगी। इसका असर तुरंत रुपये पर दिख सकता है। दबाव घटने से रुपये में कमजोरी पर लगाम लगेगी। यह न सिर्फ आरबीआई बल्कि सरकार के लिए भी अच्छी खबर होगी। डॉलर की डिमांड बढ़ने का असर भारत के विदेशी मुद्रा भंडार पर पड़ा है। 28 फरवरी को अमेरिका-ईरान की लड़ाई शुरू होने के बाद से विदेशी मुद्रा भंडार में करीब 38 अरब डॉलर की कमी आएगी।

रुपये में कमजोरी से महंगाई बढ़ने का भी डर

फरवरी में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 728 अरब डॉलर था, जो घटकर 691 अरब डॉलर पर आ गया है। अगर आरबीआई के स्वैप ऑक्शन के नतीजे उम्मीद के मुताबिक रहते हैं तो रुपये में गिरावट थमेगी। यह न सिर्फ सरकार बल्कि आम आदमी के लिए भी फायदेमंद होगा। रुपये में कमजोरी का असर आम आदमी की जेब पर भी पड़ता है। आयातित चीजों की कीमतें बढ़ने से महंगाई बढ़ने का खतरा होता है। विदेश में पढ़ाई, विदेश में इलाज और विदेश की यात्रा महंगी हो जाती है।

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