डॉलर के मुकाबले रुपये में गिरावट जारी है। 20 दिसंबर को रुयया गिरकर 85.10 के लेवल पर आ गया। डॉलर के मुकाबले रुपये का कमजोर होना सिर्फ सरकार और आरबीआई के लिए चिंता की बात नहीं है बल्कि यह आम आदमी के लिए भी मुश्किल पैदा कर सकता है। इसकी वजह यह है कि इसका असर विदेशी यात्रा, विदेश में पढ़ाई, विदेश में इलाज जैसे खर्चों पर भी पड़ेगा। इसके अलावा इंडिया में उन चीजों की कीमतें बढ़ सकती हैं, जिनका हम आयात करते हैं। दलहन, खाद्य तेल सहित रोजमर्रा की चीजों का इंडिया आयात करता है। इसके अलावो गोल्ड और फ्यूल का भी इंपोर्ट होता है। आइए इस बारे में विस्तार से जानते हैं।
आयात (import) की कॉस्ट बढ़ने का असर प्रोडक्ट्स की खुदरा कीमतों पर पड़ता है। खासकर दलहन (Pulses), खाद्य तेल (Edible Oil) और फल (Fruits) जैसी रोजमर्रा की चीजों की कीमतें बढ़ने का असर इनफ्लेशन पर पड़ता है। इसके अलावा ऐसे उद्योग हैं, जिसमें उत्पादन के लिए कच्चे माल का आयात करना पड़ता है। कच्चे माल के आयात का खर्च बढ़ने का असर प्रोडक्ट्स की रिटेल कीमतों पर पड़ता है। इससे भी इनफ्लेशन पर दबाव बढ़ जाता है। इंडिया क्रूड की अपनी जरूरत के काफी ज्याद हिस्से का आयात करता है। क्रूड का आयात खर्च एक सीमा से ज्यादा होने पर सरकार इसका बोझ ग्राहकों पर डालती है। इससे पेट्रोल, डीजल और एलएनजी की कीमतें बढ़ जाती हैं।
विदेश में पढ़ाई, इलाज का खर्च बढ़ेगा
विदेश में पढ़ाई करने वाले स्टूडेंट्स का हर महीने का खर्च बढ़ जाएगी। कॉलेज की फीस सहित दूसरी फीस के लिए भी अब ज्यादा रुपये खर्च खर्च करने पड़ेंगे। पिछले कुछ सालों में विदेश में स्टडी पर लोगों का फोकस बढ़ा है। अमेरिका, कनाडा, यूरोप और आस्ट्रेलिया में बड़ी संख्या में इंडियन स्टूडेंट्स हायर स्टडी करते हैं। रुपया कमजोर होने से कॉलेज की फीस चुकाने के लिए स्टूडेंट्स को अब ज्यादा अमाउंट का एजुकेशन लोन लेना होगा। इससे उनकी पढ़ाई की कुल कॉस्ट बढ़ जाएगी।
विदेश में हॉलीडे ट्रिप का बजट बढ़ाना होगा
अगर आप विदेश का हॉलीडे ट्रिप प्लान कर रहे हैं तो आपको अपना बजट बढ़ाना पड़ेगा। इसी तरह अगर परिवार के किसी सदस्य का विदेश में इलाज चल रहा है तो इलाज का खर्च बढ़ जाएगा। साथ ही पेंशेट की देखभाल के लिए विदेश में परिवार के दूसरे सदस्यों को भी ज्यादा खर्च करने होंगे। हवाई टिकट का पेमेंट अगर डॉलर में आप कर रहे हैं तो इसके लिए आपको ज्यादा पैसे खर्च करने होंगे। इसका मतलब है कि विदेश में खर्च से जुड़ा आपका कुल बजट बढ़ जाएगा।
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आईटी और फार्मा कंपनियों का बढ़ जाएगा प्रॉफिट
रुपये की कमजोरी से आईटी कंपनियों को फायदा होगा। इसकी वजह यह है कि इंडियन आईटी कंपनियों के रेवेन्यू का बड़ा हिस्से विदेश से आता है। उन्हें डॉलर में इनकम होती है। डॉलर को रुपये में बदलने पर उनकी इनकम और प्रॉफिट बढ़ जाएगी। यही बात फार्मा कंपनियों पर लागू होती है, जिनके बिजनेस में अमेरिका और यूरोपीय मार्केट की बड़ी हिस्सेदारी है। इन कंपनियों का प्रॉफिट बढ़ जाएगा। इसका असर उनके स्टॉक्स पर भी पड़ेगा।