New Labour Codes: अप्रैल 2026 से देशभर के ज्यादातर कर्मचारियों की सैलरी स्ट्रक्चर में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। इसकी वजह सरकार के नए लेबर कानून हैं, जो नवंबर 2025 में लागू हुए थे और 1 अप्रैल से असर में आ गए हैं।
New Labour Codes: अप्रैल 2026 से देशभर के ज्यादातर कर्मचारियों की सैलरी स्ट्रक्चर में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। इसकी वजह सरकार के नए लेबर कानून हैं, जो नवंबर 2025 में लागू हुए थे और 1 अप्रैल से असर में आ गए हैं।
ये नए नियम धीरे-धीरे सैलरी के तरीके को बदल रहे हैं। सरकार का कहना है कि इससे लंबी अवधि में कर्मचारियों की रिटायरमेंट सेविंग बढ़ेगी। हालांकि, शॉर्ट टर्म में ज्यादातर सैलरीड लोगों की इन-हैंड सैलरी थोड़ी कम हो सकती है। सरकार का मकसद है कि कर्मचारी रिटायरमेंट के बाद आर्थिक रूप से सुरक्षित रहें और उनके पास पर्याप्त बचत हो।
सरकार का नया सैलरी नियम क्या है?
नए नियम के तहत सरकार ने 'वेज की एक समान परिभाषा' तय की है। इसके मुताबिक, सैलरी में बेसिक पे, डीए (Dearness Allowance) और रिटेनिंग अलाउंस को शामिल किया गया है। ये तीनों मिलकर कुल सैलरी का कम से कम 50 प्रतिशत होना जरूरी है।
वहीं, बोनस, HRA और स्पेशल अलाउंस जैसे हिस्सों को अलग कैटेगरी में रखा गया है। अगर ये 'एक्सक्लूडेड' हिस्से 50 प्रतिशत से ज्यादा हो जाते हैं, तो अतिरिक्त हिस्सा फिर से वेज में जोड़ दिया जाएगा। इससे कई कर्मचारियों का बेसिक सैलरी हिस्सा बढ़ जाएगा।
नए नियमों से क्या बदलेगा?
कई सरकारी और स्टैच्यूटरी फायदे 'वेज' के आधार पर तय होते हैं। ऐसे में बेसिक बढ़ने से EPF में कर्मचारी और कंपनी दोनों का योगदान बढ़ जाएगा। इसके साथ ही Employees' State Insurance Corporation (ESIC) से जुड़े फायदे भी प्रभावित हो सकते हैं।
इन-हैंड सैलरी पर क्या असर पड़ेगा?
जब PF में योगदान बढ़ेगा, तो आपकी सैलरी से कटौती भी बढ़ेगी। इसका मतलब है कि हर महीने मिलने वाली इन-हैंड सैलरी थोड़ी कम हो सकती है। लेकिन इसके बदले में आपकी रिटायरमेंट सेविंग, ग्रेच्युटी और इंश्योरेंस कवर जैसे फायदे बढ़ जाएंगे।
₹10 लाख CTC पर कितना असर?
अगर किसी कर्मचारी का CTC ₹10 लाख है, तो नए नियम के बाद सैलरी स्ट्रक्चर में इस तरह बदलाव आ सकता है। इसमें मान लेते हैं कि कुल ग्रॉस सैलरी लगभग ₹83,333 प्रति महीना है।
| कंपोनेंट | पहले (₹/महीना) | बाद में (₹/महीना) | बदलाव (₹/महीना) |
| बेसिक पे | 28,000 | 41,667 | +13,667 |
| HRA | 16,667 | 16,667 | - |
| स्पेशल अलाउंस | 38,666 | 25,000 | -13,666 |
| कुल ग्रॉस | 83,333 | 83,333 | - |
| EPF कटौती (कर्मचारी) | 3,360 | 5,000 | +1,640 |
| EPF योगदान (नियोक्ता) | 3,360 | 5,000 | +1,640 |
| प्रोफेशनल टैक्स | 200 | 200 | - |
| इन-हैंड सैलरी | 79,773 | 78,133 | -1,640 |
क्या समझें इस बदलाव से?
इस उदाहरण में आपकी इन-हैंड सैलरी करीब ₹1,600 प्रति महीने कम हो सकती है (टैक्स से पहले)। लेकिन दूसरी तरफ हर महीने PF में ज्यादा पैसा जमा होगा। ₹10 लाख CTC के केस में हर महीने EPF में करीब ₹1,640 ज्यादा कटेगा। इसमें कर्मचारी और कंपनी दोनों का हिस्सा शामिल होता है, यानी कुल मिलाकर करीब ₹3,280 हर महीने ज्यादा PF में जाएगा।
इस हिसाब से पूरे साल में आपके PF में करीब ₹39,000 से ₹40,000 तक अतिरिक्त रकम जमा हो सकती है। वहीं, बेसिक सैलरी बढ़ने की वजह से ग्रेच्युटी भी बढ़ती है। अनुमान के तौर पर सिर्फ एक साल की नौकरी में आपकी ग्रेच्युटी करीब ₹24,000 से ₹26,000 तक बन सकती है, जो पहले के मुकाबले ज्यादा है।
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