SIP Returns: एक जैसा SIP इन्वेस्टमेंट, फिर भी ₹2.85 करोड़ का अंतर! जानिए म्यूचुअल फंड में 'रिटर्न की टाइमिंग' का पूरा खेल
Same SIP Different Returns Formula: निवेश के शुरुआती दो-तीन सालों में जब बाजार में उतार-चढ़ाव होता है, तो पोर्टफोलियो में कोई जादुई ग्रोथ नहीं दिखती। ऐसे में लोग मान लेते हैं कि कंपाउंडिंग की बातें सिर्फ कागजी हैं। अगर आप भी ऐसा सोचते हैं, तो आप गलत हैं। SIP के शुरुआती साल दौलत बनाने के नहीं, बल्कि एक बड़ा बेस तैयार करने के होते हैं
नए निवेशकों के मन में अक्सर एक सवाल आता है कि 'क्या मेरी SIP वाकई काम कर रही है?
Same SIP Different Returns: म्यूचुअल फंड में सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) शुरू करने वाले नए निवेशकों के मन में अक्सर एक सवाल आता है कि 'क्या मेरी SIP वाकई काम कर रही है?' निवेश के शुरुआती दो-तीन सालों में जब बाजार में उतार-चढ़ाव होता है, तो पोर्टफोलियो में कोई जादुई ग्रोथ नहीं दिखती। ऐसे में लोग मान लेते हैं कि कंपाउंडिंग की बातें सिर्फ कागजी हैं।
अगर आप भी ऐसा सोचते हैं, तो आप गलत हैं। SIP के शुरुआती साल दौलत बनाने के नहीं, बल्कि एक बड़ा बेस तैयार करने के होते हैं। आइए एडेलवाइस एसेट मैनेजमेंट के हेड निरंजन अवस्थी के इनपुट्स के साथ एक दिलचस्प उदाहरण से समझते हैं कि कैसे एक ही रकम की SIP करने के बावजूद दो लोगों के रिटर्न में ₹2.85 करोड़ का भारी अंतर आ सकता है।
एक जैसा निवेश, फिर भी रिटर्न में जमीन-आसमान का अंतर
मान लेते हैं कि दो अलग-अलग निवेशक A और B हैं। दोनों ही हर महीने ₹50,000 की SIP पूरे 20 साल के लिए करते हैं। दोनों का कुल निवेश बराबर है, लेकिन उन्हें मिलने वाले मार्केट रिटर्न की टाइमिंग अलग-अलग है:
निवेशक A (शुरुआत में बंपर रिटर्न): इसे शुरुआती 5 सालों में 24% का सालाना रिटर्न मिलता है, और आखिरी के 15 सालों में 12% का सालाना रिटर्न मिलता है।
निवेशक B (आखिरी सालों में बंपर रिटर्न): इसके साथ स्थिति बिल्कुल उल्टी है। इसे पहले 15 सालों तक 12% का सालाना रिटर्न मिलता है, लेकिन आखिरी के 5 सालों में 24% का तगड़ा सालाना रिटर्न मिलता है।
हैरान करने वाला नतीजा
20 साल पूरे होने पर निवेशक B का कुल फंड ₹8.77 करोड़ हो जाता है, जबकि निवेशक A का फंड सिर्फ ₹5.92 करोड़ ही रह जाता है। दोनों ने हर महीने एक बराबर पैसा जमा किया, लेकिन रिटर्न की टाइमिंग के फेर के कारण दोनों के बीच ₹2.85 करोड़ का बड़ा फासला आ गया।
अगर यही SIP छोटी रकम यानी ₹10,000 महीना की भी होती, तब भी आखिरी सालों में बड़ा रिटर्न पाने वाला निवेशक करीब ₹57 लाख ज्यादा कमा लेता।
आखिर ऐसा क्यों होता है?
आम तौर पर लोग सोचते हैं कि शुरुआत में ज्यादा रिटर्न मिलने पर पैसा बढ़ने के लिए ज्यादा समय मिलेगा, इसलिए फंड बड़ा होना चाहिए। एकमुश्त निवेश में यह बात सही हो सकती है, लेकिन SIP का नियम अलग है।
जब आप SIP शुरू करते हैं, तो पहले कुछ सालों में आपका कुल जमा फंड बहुत छोटा होता है। अगर उस समय बाजार 24% की रफ्तार से भागता भी है, तो वह छोटी रकम पर ही काम करेगा।
15 साल तक लगातार निवेश करने के बाद आपका फंड बहुत बड़ा हो जाता है। अब इस बड़े फंड पर जब आखिरी सालों में 24% का रिटर्न मिलता है, तो रुपयों के मामले में होने वाला मुनाफा बहुत विशाल होता है।
इस पर निरंजन अवस्थी ने कहा कि, 'शुरुआती साल अमीर बनने के लिए नहीं, बल्कि अलग-अलग कीमतों पर म्यूचुअल फंड यूनिट्स इकट्ठा करने और एक मजबूत बेस बनाने के लिए होते हैं। असली वेल्थ क्रिएशन बाद में होती है। निवेश में धैर्य रखना कोई मजबूरी नहीं, बल्कि इसकी सबसे बड़ी खूबी है।'
लॉन्ग टर्म SIP में निवेशक कहां करते हैं गलती?
सबसे बड़ी गलती यह होती है कि लोग अपनी लॉन्ग टर्म SIP का मूल्यांकन बहुत जल्दी यानी 2-3 साल में ही करने लगते हैं। शुरुआत में आपकी अधिकांश किस्तें हाल ही में बाजार में गई होती हैं, इसलिए कंपाउंडिंग का जादू तुरंत स्क्रीन पर रिफ्लेक्ट नहीं होता। जैसे-जैसे समय बीतता है, वैसे-वैसे आपकी पुरानी यूनिट्स पर मिलने वाला ब्याज आपके फंड को रॉकेट की तरह आगे बढ़ाता है।
क्या हमें शुरुआत में खराब रिटर्न की दुआ करनी चाहिए?
बिल्कुल नहीं, इस उदाहरण का मकसद यह समझाना नहीं है कि शुरुआत में बाजार खराब चले तो अच्छा है। बाजार कब ऊपर जाएगा और कब नीचे, यह किसी के हाथ में नहीं है। मुख्य सीख यह है कि शुरुआती 2-3 साल का धीमा सफर यह तय नहीं करता कि आपकी इन्वेस्टमेंट स्ट्रेटेजी फेल हो गई है।
कुल मिलाकर अगर आपकी SIP को अभी सिर्फ 2 या 3 साल ही हुए हैं और रिटर्न मामूली दिख रहा है, तो भरोसा मत खोइए। यह फेज सिर्फ अनुशासन के साथ बाजार में टिके रहने और ज्यादा से ज्यादा यूनिट्स बटोरने का है। कंपाउंडिंग पहले दिन से काम करती है, लेकिन उसका असली और बड़ा असर तभी दिखाई देता है जब आपके पास एक बड़ा इन्वेस्टमेंट बेस तैयार हो जाता है।