रजिस्टर्ड इनवेस्टमेंट एडवाइजर्स के लिए शर्तें आसान बना सकता है सेबी, जानिए इससे क्या होगा फायदा

अभी इंडिया में रजिस्टर्ड इनवेस्टमेंट एडवाइजर्स बनने के लिए शर्तें बहुत मुश्किल हैं। इसके चलते आरआईए की संख्या बहुत कम है। देश में सिर्फ 961 आरआईए हैं। आरआईए की कमी के चलते फर्जी इनवेस्टमेंट एक्सपर्ट को अपना बिजनेस बढ़ाने का मौका मिल जाता है। लेकिन, यह क्लाइंट्स के हित में नहीं है

अपडेटेड Aug 07, 2024 पर 2:45 PM
Story continues below Advertisement
सेबी आरआईए के लिए पोस्ट-ग्रेजुएट डिग्री की जगह सिर्फ ग्रेजुएट की डिग्री की शर्त तय कर सकता है।

सेबी रजिस्टर्ड इनवेस्टमेंट एडवाइजर्स (आरआईए) के लिए नियमों को आसान बना सकता है। मार्केट रेगुलेटर ने इस बारे में 6 अगस्त को एक कंसल्टेशन पेपर जारी किया है। इसमें कहा गया है कि देश में रजिस्टर्ड इनवेस्टमेंट एडवाइजर्स की संख्या बढ़ाने की जरूरत है। सेबी की वेबसाइट के मुताबिक, अभी देश में सिर्फ 961 आरआईए हैं। आरआईए की संख्या कम होने से लोग ऐसे फर्जी एक्सपर्ट के झांसे में आ जाते हैं, जो अपने फायदे के हिसाब से निवेशकों को निवेश करने की सलाह देते हैं। खासकर पिछले कुछ सालों में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर ऐसे फर्जी एक्सपर्ट्स की संख्या तेजी से बढ़ी है।

नियमों में हो सकते हैं ये बदलाव

सेबी आरआईए के लिए पोस्ट-ग्रेजुएट डिग्री की जगह सिर्फ ग्रेजुएट की डिग्री की शर्त तय कर सकता है। कंसल्टेशन पेपर में यह भी कहा गया है कि आरआईए के लिए वर्क एक्सपीरियंस की शर्त को भी हटाया जा सकता है। यह बहुत बड़ी रियायत होगी, क्योंकि आरआईए के लिए पोस्ट-ग्रेजुएट और पांच साल वर्क एक्सपीरियंस जैसी शर्तें हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगल मार्केट रेगुलेटर इन प्रस्तावों को लागू करता है तो इससे आरआईए के प्रोफेशन में लोगों की दिलचस्पी बढ़ेगी।


आरआईए की संख्या बढ़ेगी

नए नियम के लागू होने से कॉर्पोरेट आरआईए जूनियर आरआईए को रिक्रूट कर सकते हैं। इससे पढ़ाई पूरी करने के बाद स्टूडेंट्स आरआईए बनने में दिलचस्पी दिखा सकते हैं। वर्क एक्सपीरियंस की शर्त होने की वजह से कई कॉर्पोरेट आरआईए नए लोगों को अपने ऑफिस में नहीं रख पाते हैं। उधर, आरआईए कॉर्पोरेट आरआईए के तहत काम करने के लिए मोटी सैलरी मांगते हैं।

सर्टिफिकेशन के नियमों में भी मिल सकती है ढील

अभी आरआईए के पास फाइनेंशियल प्लानिंग का सर्टिफिकेट होना जरूरी है। वह नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ सिक्योरिटीज मार्केट (NISM) या सर्टिफायड फाइनेंशियल प्लानर जैसे किसी दूसरे एक्रेडिटेड संस्थान का सर्टिफिकेट हासिल कर सकता है। हालांकि, सेबी के कंसल्टेशन पेपर में इस बारे में कुछ नहीं कहा गया है। लेकिन, माना जा रहा है कि सर्टिफिकेट से जुड़ी शर्त में भी रियायत दी जा सकती है। सेबी हर साल आरआईए अपने सर्टिफिकेट को रिन्यू कराने की शर्त को भी हटा सकती है। अभी हर साल सर्टिफिकेट को रिन्यू कराने के लिए एग्जाम में बैठना पड़ता है।

यह भी पढ़ें: Long term capital gains tax: सरकार ने प्रॉपर्टी पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस टैक्स में राहत दी, जानिए आपको किस तरह से होगा फायदा

फीस वसूलने के नियम भी होंगे आसान

सेबी आरआईए को कस्टमर्स से फीस वसूलने के नियमों को भी आसान बना सकता है। अभी आरआईए क्लाइंट के कुल एसेट की वैल्यू का एक निश्चित फीसदी फीस के रूप में लेते है। कुछ आरआईए फिक्स्ड फीस भी लेते हैं। यह मैक्सिमम प्रति परिवार सालाना 1.25 लाख रुपये हो सकता है। अगर कोई आरआईए क्लाइंट से फीस वसूलने के तरीके में बदलाव करना चाहता है तो वह कर सकता है। अभी 12 महीने के बदले इसमें बदलाव करने की इजाजत नहीं है।

हिंदी में शेयर बाजार स्टॉक मार्केट न्यूज़,  बिजनेस न्यूज़,  पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App  डाउनलोड करें।