SEBI Draft Framework: म्यूचुअल फंड में होंगे बड़े बदलाव! सीधे सैलरी से कटेगी SIP, डिस्ट्रीब्यूटर्स को यूनिट्स में मिलेगा कमीशन

SEBI Draft Framework: SEBI म्यूचुअल फंड निवेश के नियमों में बड़े बदलाव की तैयारी कर रहा है। नए प्रस्ताव के तहत सैलरी से सीधे SIP कट सकती है, डिस्ट्रीब्यूटर्स को यूनिट्स में कमीशन मिल सकता है और निवेशक म्यूचुअल फंड के जरिए सामाजिक दान भी कर सकेंगे। जानिए पूरी डिटेल।

अपडेटेड May 20, 2026 पर 7:46 PM
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SEBI का कहना है कि प्रस्तावित बदलाव का मकसद निवेश प्रक्रिया को आसान और आधुनिक बनाना है।

SEBI Draft Framework:  मार्केट रेगुलेटर SEBI यानी भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड ने म्यूचुअल फंड निवेश से जुड़े नियमों में बड़े बदलाव का प्रस्ताव रखा है। रेगुलेटर ने एक नया ड्राफ्ट फ्रेमवर्क जारी किया है। इसके तहत कुछ मामलों में थर्ड पार्टी पेमेंट की अनुमति दी जा सकती है।

अभी तक नियम यह था कि म्यूचुअल फंड में निवेश सिर्फ निवेशक के अपने बैंक खाते से ही होना चाहिए। लेकिन अब SEBI कंपनियों, म्यूचुअल फंड कंपनियों और सामाजिक योगदान वाली व्यवस्थाओं को भी सीमित और नियंत्रित तरीके से इसमें शामिल करने पर विचार कर रहा है।

SEBI का कहना है कि इसका मकसद निवेश प्रक्रिया को आसान और आधुनिक बनाना है। हालांकि, मनी लॉन्ड्रिंग रोकने और निवेशकों की सुरक्षा से जुड़े नियम भी पहले की तरह लागू रहेंगे।


सैलरी से सीधे SIP कट सकती है

सबसे बड़ा प्रस्ताव पेरोल लिंक्ड SIP को लेकर है। इसके तहत कंपनियां कर्मचारियों की सैलरी से रकम काटकर उनकी तरफ से म्यूचुअल फंड में निवेश कर सकेंगी। यह सुविधा सिर्फ लिस्टेड कंपनियों, EPFO में रजिस्टर्ड कंपनियों और एसेट मैनेजमेंट कंपनियों यानी AMC को दी जा सकती है। हालांकि इसमें कर्मचारी की सहमति जरूरी होगी और निवेश उसके ही नाम पर रहेगा।

SEBI ने कहा है कि कंपनियां पहले से सैलरी स्ट्रक्चर के जरिए सेविंग और वेल्थ क्रिएशन प्रोडक्ट्स देती रही हैं। इसलिए इस व्यवस्था को औपचारिक रूप देने पर विचार किया जा रहा है। हालांकि रेगुलेटर ने इस पर भी राय मांगी है कि कहीं कंपनियां कर्मचारियों को अपने ग्रुप AMC की स्कीमों में निवेश करने के लिए दबाव तो नहीं बना सकतीं।

डिस्ट्रीब्यूटर्स को कैश की जगह यूनिट्स

SEBI का एक और बड़ा प्रस्ताव म्यूचुअल फंड डिस्ट्रीब्यूटर्स यानी MFDs को लेकर है। रेगुलेटर चाहता है कि AMC डिस्ट्रीब्यूटर्स को कैश कमीशन की जगह म्यूचुअल फंड यूनिट्स में भुगतान कर सकें।

यह सुविधा सिर्फ AMFI रजिस्टर्ड डिस्ट्रीब्यूटर्स को मिलेगी और यूनिट्स सीधे उनके नाम अलॉट होंगी। SEBI का मानना है कि इससे डिस्ट्रीब्यूटर्स लंबी अवधि के निवेश के लिए प्रोत्साहित होंगे और उनका फायदा बाजार के प्रदर्शन से ज्यादा जुड़ जाएगा।

हालांकि रेगुलेटर ने यह चिंता भी जताई है कि इससे गलत तरीके से स्कीम बेचने का खतरा बढ़ सकता है। यानी डिस्ट्रीब्यूटर्स उन स्कीमों को ज्यादा बेच सकते हैं जिनसे उन्हें ज्यादा फायदा मिले। इसी वजह से SEBI ने इस पर लोगों से सुझाव भी मांगे हैं।

म्यूचुअल फंड के जरिए दान भी कर सकेंगे

SEBI ने सामाजिक दान से जुड़ा भी एक नया प्रस्ताव दिया है। इसके तहत निवेशक अपने म्यूचुअल फंड निवेश या रिटर्न का कुछ हिस्सा सामाजिक कामों के लिए दान कर सकेंगे। यह पैसा सोशल स्टॉक एक्सचेंज में रजिस्टर्ड गैर-लाभकारी संस्थाओं यानी NGO को दिया जा सकेगा।

इसके लिए दो मॉडल प्रस्तावित किए गए हैं। पहला, अलग सामाजिक योगदान म्यूचुअल फंड स्कीम शुरू की जाए। दूसरा, मौजूदा स्कीमों में ही दान की सुविधा जोड़ी जाए। SEBI का कहना है कि इससे लोगों को भरोसेमंद NGO ढूंढने की परेशानी कम होगी और दान प्रक्रिया ज्यादा पारदर्शी और नियंत्रित बनेगी।

मनी लॉन्ड्रिंग रोकने के नियम बने रहेंगे

हालांकि SEBI ने साफ किया है कि एंटी मनी लॉन्ड्रिंग नियम इस पूरे ढांचे का अहम हिस्सा बने रहेंगे।

प्रस्ताव में मजबूत KYC जांच, पैसे भेजने और पाने वाले के बीच संबंध की जांच, इलेक्ट्रॉनिक फंड ट्रेल और सत्यापित खातों में ही रिडेम्पशन या डिविडेंड भेजने जैसे नियम शामिल किए गए हैं। SEBI ने कहा है कि कामकाजी दिशा-निर्देश बाद में AMFI और रेगुलेटर मिलकर तैयार करेंगे।

10 जून तक मांगे गए सुझाव

SEBI ने इस ड्राफ्ट पेपर पर 10 जून 2026 तक लोगों से सुझाव मांगे हैं। इसके बाद मिले सुझावों के आधार पर अंतिम नियम तैयार किए जा सकते हैं।

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