म्यूचुअल फंड के निवेशकों के लिए अच्छी खबर है। सेबी ने एक ऐसा प्लेटफॉर्म शुरू करने का प्रस्ताव पेश किया है, जिस पर निवेशकों को अपने इनएक्टिव म्यूचुअल फंड फोलियो की जानकारी मिल जाएगी। मार्कट रेगुलेटर ने इस बारे में एक कंसल्टेशन पेपर 17 दिसंबर को पेश किया है। इसमें 'मित्रा' पेश करने के प्लान के बारे में बताया गया है। मित्रा का मतलब है-म्यूचुअल फंड इनवेस्टमेंट ट्रेसिंग एंड रिट्रिवल असिस्टेंट।
इनएक्टिव म्यूचुअल फंड फोलियो का मतलब क्या है?
इनएक्टिव फोलियो (inactive folio) का मतलब म्यूचुअल फंड के ऐसे फोलियो से है जिसमें निवेशक की तरफ से पिछले 10 साल में कोई निवेश नहीं किया गया है, लेकिन इसमें यूनिट्स मौजूद हैं। सेबी ने निवेशकों के हित को ध्यान में रख यह प्रस्ताव पेश किया है। कई म्यूचुअल फंड निवेशक किसी वजह से अपने इनवेस्टमेंट को भूल जाते हैं। फिर, उनका फोलियो इनएक्टिव हो जाता है। लेकिन, इसमें निवेश किया गया फंड पड़ा रहता है।
फोलियो इनएक्टिव होने की क्या है वजह
ओपन-एंडेड ग्रोथ ऑप्शन वाली म्यूचुअल फंड स्कीम में निवेश तब तक पड़ा रहता है जब तक इनवेस्टर/उसकी नॉमिनी/कानूनी उत्तराधिकारी संबंधित एसेट मैनेजमेंट कंपनी (AMC) में रिडेम्प्शन का रिक्वेस्ट नहीं डालता है। PAN, ईमेल आईडी या सही एड्रेस नहीं होने की वजह से ऐसे फोलियो निवेशक के कंसॉलिडेटेड अकाउंट स्टेटमेंट में नहीं आते हैं। कई बार फिजिकल तरीके से किए गए निवेश के बाद इनवेस्टर का ट्रांसफर हो जाता है या कुछ मामलों में इनवेस्टर की मौत हो जाती है। ऐसी स्थिति में रिडेम्प्शन में फ्रॉड की आशंका बढ़ जाती है।
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प्लेटफॉर्म शुरू होने से क्या फायदा होगा
सेबी अगर इनएक्टिव फोलियो के प्लेटफॉर्म शुरू करता है तो इनवेस्टर्स अपने अनक्लेम्ड फोलियो की तलाश कर सकते हैं। रजिस्ट्रार और ट्रांसफर एजेंट्स इस प्लेटफॉर्म को विकसित कर सकते हैं। सेबी ने इस प्रस्ताव पर 7 जनवरी तक लोगों की राय मांगी है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस प्लेटफॉर्म के शुरू होने से म्यूचुअल फंड की स्कीम में बड़े अनक्लेम्ड अमाउंट को क्लेम किया जा सकेगा।