Credit Card: क्रेडिट कार्ड शेयर करना पड़ सकता है भारी, इसके पीछे छिपे हैं वित्तीय खतरे

Credit Card: दोस्तों या पार्टनर के साथ क्रेडिट कार्ड शेयर करना सुविधाजनक लगता है लेकिन ये सुविधा कानूनी जिम्मेदारी का बोझ डाल सकती है।

अपडेटेड Mar 06, 2026 पर 4:12 PM
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क्रेडिट कार्ड को साझा करना कई लोगों को आसान और सुविधाजनक विकल्प लगता है। परिवार या दोस्तों के बीच खर्चों को मैनेज करने के लिए एक ही कार्ड का इस्तेमाल करना सीधा उपाय प्रतीत होता है। लेकिन इस सुविधा के पीछे कई गंभीर वित्तीय और कानूनी जोखिम छिपे होते हैं।

भारत में बैंक आमतौर पर पूरी तरह से संयुक्त क्रेडिट कार्ड जारी नहीं करते। इसके बजाय एक व्यक्ति मुख्य कार्डधारक होता है और दूसरा व्यक्ति ऐड-ऑन कार्ड यूजर होता है। इस व्यवस्था में असली जिम्मेदारी हमेशा प्राइमरी कार्डहोल्डर पर ही आती है। यानी अगर ऐड-ऑन यूजर ज्यादा खर्च कर देता है या भुगतान में देरी होती है, तो उसका असर सीधे मुख्य कार्डधारक के क्रेडिट स्कोर और वित्तीय स्थिति पर पड़ता है।

क्रेडिट कार्ड साझा करने से जुड़े सबसे बड़े खतरे हैं कर्ज का बोझ बढ़ना, क्रेडिट स्कोर खराब होना और रिश्तों में विवाद की संभावना। अगर ऐड-ऑन यूजर समय पर भुगतान नहीं करता, तो बैंक केवल मुख्य कार्डधारक को जिम्मेदार ठहराता है। इससे न केवल ब्याज और जुर्माना बढ़ता है बल्कि भविष्य में लोन लेने की क्षमता भी प्रभावित होती है।


हालांकि, साझा कार्ड के कुछ फायदे भी हैं। इससे खर्चों का हिसाब रखना आसान हो जाता है और परिवार में पारदर्शिता बनी रहती है। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि इस सुविधा का इस्तेमाल करते समय स्पष्ट नियम तय करना बेहद जरूरी है। जैसे कौन कितना खर्च करेगा, भुगतान कैसे होगा और कार्ड का इस्तेमाल किन खर्चों तक सीमित रहेगा।

रिपोर्ट्स यह भी बताती है कि ऐड-ऑन कार्ड यूजर का खुद का क्रेडिट स्कोर नहीं बनता। यानी अगर वह जिम्मेदारी से खर्च करता भी है, तो उसका फायदा उसकी व्यक्तिगत क्रेडिट हिस्ट्री में नहीं जुड़ता। दूसरी ओर, अगर भुगतान में गड़बड़ी होती है तो नुकसान केवल मुख्य कार्डधारक को झेलना पड़ता है।

क्रेडिट कार्ड साझा करना सुविधा तो देता है, लेकिन इसके साथ कई वित्तीय और कानूनी जिम्मेदारियां जुड़ी होती हैं। अगर पारदर्शिता और अनुशासन न हो तो यह रिश्तों में तनाव और आर्थिक नुकसान का कारण बन सकता है। विशेषज्ञों की सलाह है कि साझा कार्ड का इस्तेमाल सोच-समझकर करें, खर्चों पर नजर रखें और समय पर भुगतान सुनिश्चित करें। तभी यह सुविधा वास्तव में लाभकारी साबित हो सकती है।

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